एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान को 3‑1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई है, पर देश में हॉकी प्रशासन को लेकर विवाद तेज़ है। हॉकी इंडिया के भीतर चल रही खींचतान के बीच पूर्व कप्तानों और दिग्गजों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया, उनका मुख्य उद्देश्य – हॉकी इंडिया में ‘क्लीन‑अप’ करना है।
प्रमोद बटला, अशोक दीवान, रोमियो जेम्स और असुंता लाकड़ा सहित कई पूर्व खिलाड़ियों ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन किया। स्टेडियम के अंदर प्रवेश नहीं दिया गया, इसलिए उन्होंने बाहर ही अपनी मांगें रखी।
दिग्गजों के हाथों में कई पोस्टर थे, जिनमें एक पर लिखा था – “हॉकी का ABCD नहीं पता, बन गया सेक्रेटरी”. यह संदेश हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह को लेकर था। असुंता लाकड़ा ने उनके खिलाफ धमकी और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई, कहती हैं कि फोन पर उन्हें धमकी दी गई और यह केवल उनके लिये नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों के लिये चिंता का कारण है।
रोमियो जेम्स ने भी कहा कि लाकड़ा को बताया गया था “हम तुम्हें तुम्हारी जगह दिखाएंगे”, लेकिन ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं।
दिग्गजों ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें हॉकी इंडिया की मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर एडहॉक कमेटी बनाने की मांग की गई। इस कमेटी में पूर्व खिलाड़ी‑ओलंपियन, एक रिटायर्ड जज या कानूनी विशेषज्ञ, तथा युवा मामलों और खेल मंत्रालय और SAI के प्रतिनिधियों को ऑब्ज़र्वर के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव है। कमेटी को छह महीने में नए चुनाव करवाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उन्होंने राष्ट्रीय खेल विकास कोड, 2025 के कड़े पालन की भी माँग की – पदाधिकारियों की आयु‑सीमा, कार्यकाल की सीमा, कार्यकारिणी में कम से कम 25% खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व, और स्वतंत्र चुनाव अधिकारी द्वारा चुनाव कराने जैसे प्रावधान।
दिग्गजों ने ‘कूलिंग‑ऑफ़’ नियमों के उल्लंघन को रोकने की मांग की। उनका कहना है कि एक राष्ट्रीय खेल संघ में कार्यकाल समाप्त करने वाला अधिकारी तय कूलिंग‑ऑफ़ अवधि के दौरान किसी अन्य संघ में पद नहीं ले सके।
साथ ही हॉकी इंडिया की मान्यता और फंडिंग को स्पोर्ट्स कोड के पूर्ण पालन से जोड़ने की भी मांग की गई।
दिलीप तिर्की के समर्थन में दिग्गजों की यह मांग है। तिर्की के कार्यकाल में पुरुष टीम ने पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक और 2025 एशिया कप जीतकर सफलता हासिल की। दिग्गजों का कहना है कि तिर्की एक ओलंपियन खिलाड़ी हैं और उनका विज़न भारतीय हॉकी को आगे ले जा सकता है।
अशोक दीवान ने कहा कि वे तिर्की के साथ हैं, जबकि बटला ने कहा कि पूर्व खिलाड़ियों को हॉकी के प्रबंधन में बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए। बटला ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नहीं सुना गया तो आंदोलन दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, राज्य‑स्तर पर भी विस्तार हो सकता है।
असुंता लाकड़ा ने कहा कि उनके साथ हुई घटना व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों, विशेषकर महिला खिलाड़ियों के लिये चिंता का विषय है। उन्होंने दोहराया कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए और हॉकी को ऊँचे स्तर पर ले जाने के लिये इन मुद्दों पर ध्यान देना आवश्यक है। लाकड़ा ने बताया कि शिकायत की जांच के लिये कमेटी बनायी गई है और शीघ्र परिणाम की आशा है।
बटला ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा – “उन्हें जाना होगा, सिंपल”.
इस बीच भारतीय महिला हॉकी टीम एशियन गेम्स में अपना अभियान जारी रखे हुए है, जापान को 3‑1 से हराकर सेमीफाइनल में पहुँची है। लेकिन मैदान के बाहर हॉकी इंडिया का विवाद भारतीय हॉकी में नया टकराव पैदा कर रहा है।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!