लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य दस प्रमुख विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की। इस याचिका में चुनाव आयोग द्वारा लागू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को असवैधानिक घोषित करने और उसकी पूरी प्रक्रिया की कानूनी वैधता की जाँच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने कुल ग्यारह नामों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना, सीपीआई (मार्क्सवादी) और कई छोटे दलों के नेता शामिल हैं। उनका कहना है कि SIR के तहत किए गए कई फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बिना अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के लिये हैं, जिससे ‘Colourable Exercise of Power’ का आरोप लगाया गया है।
याचिका में प्रमुख 10 मांगें पेश की गई हैं:
1. CEC के अधिकारों पर सवाल – मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अकेले लिए गए फैसलों को अवैध घोषित करने की मांग।
2. SIR की मंजूरी प्रक्रिया – 24 जून 2025 के आदेश के बाद देशव्यापी SIR को मंजूरी देने वाली मूल फाइलों की माँग।
3. संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन – 1995 के टीएन शेषन बनाम भारत संघ फैसले के आधार पर CEC को अन्य आयुक्तों के साथ सर्वसम्मति में निर्णय लेना अनिवार्य बताया गया।
4. ऑनलाइन फॉर्म‑6 में बदलाव – जुलाई‑2026 में किए गए संशोधनों को गैरकानूनी घोषित कर, उनका वैधता पर सवाल उठाया गया।
5. ECINET और ERONET का स्वतंत्र ऑडिट – चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की सुरक्षा और डेटा परिवर्तन की प्रक्रिया की तकनीकी जांच की मांग।
6. लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का मामला – ड्राफ्ट चरण में हटाए गए नामों की वास्तविकता और संभावित निष्कासन की जांच की अपील।
7. फ़ॉर्म‑7 के माध्यम से बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया – फर्जी नामों, झूठी घोषणाओं और विशेष समुदायों के खिलाफ अनुचित कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग।
8. पंजाब में 20.66 लाख नामों की कमी – ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़े अंतर को स्पष्ट करने और प्रभावित मतदाताओं को समय पर सूचना देने की मांग।
9. EVM की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा – इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के तकनीकी मानकों और संचालन प्रक्रिया की अंतरराष्ट्रीय मानकों से तुलना करने की मांग।
10. सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति – चुनाव डेटाबेस, SIR और EVM से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं की जांच के लिए एक तकनीकी विशेषज्ञों की समिति गठित करने की मांग।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह विवाद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संविधान द्वारा निर्धारित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के मूल सिद्धांतों की रक्षा से जुड़ा है। विपक्ष का तर्क है कि चुनाव आयोग के निर्णयों की वैधता को स्पष्ट नहीं किया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने याचिका पर हस्ताक्षर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दौरा किया, जहाँ उन्होंने अपने दावों की पुष्टि की। अब अदालत से इस याचिका पर सुनवाई की तिथि और आगे की प्रक्रिया का इंतज़ार है।
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