ताइवान ने शुक्रवार को अमेरिका से खरीदे 66 F‑16V ब्लॉक‑70 लड़ाकू विमानों की पहली खेप प्राप्त की। दो जेट्स हवाई और गुआम द्वीपों से होकर चिहांग एयर बेस, ताइचुंग में लैंड हुए, जो 2019 में मंजूर हुए लगभग 8 अरब डॉलर के रक्षा सौदे का हिस्सा है। उत्पादन में हुई देरी के बाद यह पहली डिलीवरी हुई।
1997 के बाद ताइवान को विदेश से मिला नया लड़ाकू विमान समूह यह पहला है। पूरी डिलीवरी के बाद ताइवान का F‑16 बेड़ा 200 से अधिक विमानों तक पहुँच जाएगा, जिससे उसकी हवाई शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उसी दिन, चीनी वायुसेना के छह विमान स्ट्रेट ऑफ ताइवान की मध्य रेखा पार कर गए, जिससे क्षेत्र में तनाव फिर से स्पष्ट हो गया। चीन नियमित रूप से ताइवान के आसपास सैन्य उड़ानें भरता रहता है, जबकि ताइवान इन उड़ानों को ट्रैक कर अपनी हवाई सीमा की निगरानी में सुधार कर रहा है।
रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख जोसेफ वू ने इस डिलीवरी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये दो जेट्स ताइवान के आसमान की सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक हैं और देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूती प्रदान करेंगे।
F‑16V ब्लॉक‑70 विश्व के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स में से एक है। इसमें उन्नत AESA रडार, बेहतर हथियार प्रबंधन सिस्टम और सुदृढ़ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताएँ शामिल हैं, जो पुराने F‑16 मॉडलों की तुलना में काफी अधिक प्रभावी हैं। ताइवान का मौजूदा F‑16 बेड़ा इन नई क्षमताओं से और सशक्त हो जाएगा।
नए विमानों की आगमन से ताइवान की संभावित चीनी आक्रामकता के प्रति प्रतिरोध क्षमता बढ़ेगी। स्ट्रेट ऑफ ताइवान में तनाव लगातार बना हुआ है, जहाँ चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्रता को बनाए रखने का प्रयास करता है।
यह डिलीवरी अमेरिका की ताइवान के प्रति सुरक्षा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जबकि अमेरिका आधिकारिक तौर पर ताइवान को मान्यता नहीं देता, लेकिन हथियार बिक्री के माध्यम से उसकी रक्षा क्षमता को निरंतर सुदृढ़ करता रहा है। 2019 का यह सौदा ट्रम्प प्रशासन के दौरान मंजूर हुआ था और उसके बाद भी जारी रहा।
दो विमानों की पहली खेप का आगमन दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और गहरा करता है। इंडो‑पैसिफिक में शक्ति संतुलन पर इसका असर पड़ेगा, जिससे जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की भी नज़र इस पर टिकी होगी। चीन ने इस कदम की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
हालाँकि 66 विमानों की पूरी डिलीवरी में अभी काफी समय लगेगा। उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों के साथ-साथ ताइवान को इन विमानों के संचालन, रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स के लिए अमेरिकी प्रशिक्षण की भी आवश्यकता होगी।
सिर्फ जेट्स ही पर्याप्त नहीं हैं; आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली, सतह‑से‑वायु मिसाइल, और साइबर क्षमताएँ भी आवश्यक हैं। फिर भी, इन दो विमानों का आगमन प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ताइवान को यह संदेश देता है कि वह अकेला नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ ताइवान में तनाव के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं और चीन की सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं। इस संदर्भ में अमेरिकी F‑16V विमानों की डिलीवरी ताइवान की सुरक्षा रणनीति में एक अहम कड़ी बन गई है, और आने वाले वर्षों में इन विमानों की भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को आकार देगी।
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