मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने “हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर‑मंतर” नारा दिया है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को पूरी तरह रद्द करने व CEC के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
इस आंदोलन में राजनीतिक अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर, वकील प्रशांत भूषण, किसान नेता राकेश टिकैत, सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी, छात्र नेता आईशे घोष और कई अन्य सक्रिय लोग शामिल होने की घोषणा कर रहे हैं।
10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर‑मंत्र पर प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसके बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को स्थल तक पहुँचने से रोका और 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।
13 अक्टूबर को CJP के नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अंजिक्य शिंदे ने तिरंगा लेकर जंतर‑मंत्र पहुँचे, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। उसी महीने 16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके ने कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च का ऐलान किया, पर उन्हें स्थल पर पहुँचते ही हिरासत में ले लिया गया।
14 अक्टूबर को 200 से अधिक सामाजिक, किसान, छात्र, महिला, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर संगठनों ने ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ के बैनर तले एक व्यापक गठबंधन बनाया। इस गठबंधन ने राष्ट्रीय स्तर पर 23 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया।
पराकला प्रभाकर ने अपने X (Twitter) हैंडल पर “हर गली में जंतर‑मंत्र! 23 अक्टूबर, लोकतंत्र की बहाली के लिए जन‑मार्च” का संदेश दिया, जिससे आंदोलन में उनके भागीदारी की पुष्टि हुई।
गठबंधन द्वारा जारी पोस्टर में अभिनेता प्रकाश राज, वकील प्रशांत भूषण, पराकला प्रभाकर, किसान नेता राकेश टिकैत, तुषार गांधी, अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और आईशे घोष की तस्वीरें शामिल हैं। नारा “हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर‑मंत्र” है, जिसका उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों को एक मंच पर लाना है।
10 अक्टूबर से नई दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत पाँच या अधिक लोगों के एकत्रित होने पर लिखित अनुमति के बिना जुलूस या नारेबाजी पर रोक लग सकती है। इस पाबंदी के कारण कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 23 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाला दूसरा जनसंपर्क चरण शुरू किया, जिसका शीर्षक “लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ” है। पार्टी इस अभियान के माध्यम से SIR से संबंधित विपक्षी आरोपों का जवाब देना और अपनी नीति को जनता तक पहुँचाना चाहती है।
भाजपा ने देश भर के सभी जिलों में पदयात्राओं का आयोजन करने की योजना बनाई है, जिसमें प्रत्येक यात्रा में लगभग 10,000 लोगों की भागीदारी का लक्ष्य है। वरिष्ठ नेताओं द्वारा विभिन्न राज्यों में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें SIR और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किए जाएंगे।
23 अक्टूबर को ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ का राष्ट्रीय मार्च और भाजपा का “लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ” अभियान एक ही दिन शुरू होगा। दोनों पक्षों के बीच टकराव की संभावना बढ़ी है, और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशासनिक अनुमति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अब देखना होगा कि आंदोलन में प्रमुख चेहरे—पराकला प्रभाकर, अभिजीत दिपके, नेहा बोरा, आईशे घोष, प्रशांत भूषण, राकेश टिकैत—शामिल हो पाते हैं या नहीं, और भाजपा की पदयात्राओं को जनता कितना समर्थन देती है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ होने की संभावना है।
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