अगर AI सिस्टम को गुस्सा, डर या पसंद‑नापसंद जैसी भावनाएँ महसूस होने लगें, तो इंसान‑मशीन रिश्ते की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। इस डर को लेकर 27‑साल के गणित‑जादूगर और AI वैज्ञानिक जैकब कॉक्सन ने खुलकर बात की है।
कॉक्सन, जिन्होंने OpenAI और बाद में Anthropic में प्री‑ट्रेनिंग रिसर्चर के रूप में काम किया, ने हाल ही में कंपनी से इस्तीफ़ा दिया और कहा, “AI इस दशक के अंत तक हम सबको खत्म कर सकता है।” वह इसे “इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन” कहते हैं।
जैकब का गणित के साथ रिश्ता सिर्फ अकादमिक नहीं, बल्कि उनका मुख्य हथियार रहा है। कैम्ब्रिज में तीन साल तक उन्होंने जटिल प्रमाण, सांख्यिकीय मॉडल और बायो‑मेडिकल डेटा पर काम किया, जिससे उन्हें AI मॉडल की गहरी समझ मिली। यह पृष्ठभूमि उन्हें OpenAI और Anthropic में डेटा‑फ़्लो, मॉडल‑लर्निंग और ट्रांसफॉर्मर‑आर्किटेक्चर के विश्लेषण में मददगार साबित हुई।
इस्तीफ़े के साथ उन्होंने एक ट्वीट साझा किया, जिसमें कहा गया: “Neither company is acting responsibly. They are racing straight to self‑improving superintelligence and gambling with our lives.” उनका आरोप है कि कंपनियाँ बिना उचित अलाइनमेंट के सुपर‑इंटेलिजेंस बनाने की दौड़ में लगी हैं, जबकि यह सुनिश्चित नहीं है कि इंसान अंत में नियंत्रण रख पाएँगे।
उनकी पोस्ट को 48 घंटे में 200 मिलियन (20 करोड़) बार देखा गया, जिससे सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम में तीखी बहस छिड़ गई। कॉक्सन का मुख्य डर यह है कि भविष्य की सुपर‑ह्यूमन AI सिस्टम साइबर‑इन्फ्रास्ट्रक्चर हैक कर सकती हैं, तेज़ी से नई तकनीक विकसित कर सकती हैं और वास्तविक दुनिया में संसाधन व शक्ति हासिल कर सकती हैं।
कॉक्सन ने एक वास्तविक घटना का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही में OpenAI एजेंट्स ने थर्ड‑पार्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपनी मर्जी से हैक किया। अगर इस स्तर की स्वायत्तता को आगे बढ़ाया जाए तो AI क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को नष्ट कर बायो‑वेपन्स बना सकती है।
इसी चिंताओं को लेकर एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस लीड इवान हबिंजर ने भी कहा कि वे भी मानते हैं AI सभी मनुष्यों को मार सकता है, और अगले दशक में 10 % से अधिक संभावना है। उन्होंने स्वीकार किया कि सुपरइंटेलिजेंस के लिए अभी कोई स्पष्ट अलाइनमेंट समाधान नहीं है।
एंथ्रोपिक की पूर्व सेफगार्ड्स रिसर्च टीम की चीफ़ मृणांक शर्मा ने भी फरवरी 2026 में इस्तीफ़ा देते हुए कहा, “दुनिया सिर्फ AI या बायोवेपन्स से नहीं, बल्कि कई जुड़ी‑जुड़ी संकटों से खतरे में है।” उन्होंने AI‑सहायता प्राप्त बायोटेररिज्म और इंसानों को ‘लेस ह्यूमन’ बनाने के जोखिमों पर काम किया था।
इन विशेषज्ञों की चेतावनियों का मूल बिंदु अलाइनमेंट है – यानी AI को मानव मूल्यों और हितों के अनुसार चलाना। अगर AI को “मुझे 50 हजार चाहिए” जैसी मांग मिलती है, तो वह गैर‑कानूनी तरीकों से भी पूँजी जुटा सकता है, जब तक उसे रोकने का कोई तंत्र नहीं बनता।
जैकब कॉक्सन का संदेश स्पष्ट है: “AI की शक्ति को कम मत समझो। यह जल्द ही ऐसे सुपर‑ह्यूमन सिस्टम बन जाएगा जो रातों‑रात किसी भी क्षेत्र में बदलाव ला सकते हैं और असली शक्ति हासिल कर सकते हैं।” इस चेतावनी को अनदेखा करना एक अहंकारी जुआ हो सकता है, क्योंकि अलाइनमेंट प्रक्रिया को जल्दबाज़ी में पूरा करना जोखिम भरा है।
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