भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लड़ाकू स्क्वॉड्रन की घटती ताकत पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वायु सेना को हर साल 36‑40 फाइटर जेट, यानी दो स्क्वॉड्रन के बराबर, जोड़ने की आवश्यकता है ताकि मौजूदा संख्या में गिरावट न आए।
सिंह ने रक्षा कार्यक्रमों में देरी को सीधे ऑपरेशनल क्षमता को नुकसान पहुंचाने वाला बताया और दोहराया, "टेक्नोलॉजी में देरी का मतलब है टेक्नोलॉजी से इनकार"। यदि विकास‑उत्पादन चक्र लंबा खिंचता रहा तो दुश्मन आगे निकल जाएगा और तकनीक अपना महत्व खो देगी।
स्क्वॉड्रन की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने तेजस‑Mark‑1A, तेजस‑Mark‑2, 114 विमानों वाला प्रस्तावित MRFA प्रोग्राम और पाँचवीं पीढ़ी का एएमसीए जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स का उल्लेख किया।
सिंह ने चेतावनी दी कि एएमसीए या अन्य प्रोग्रामों में देरी होने पर वैकल्पिक लड़ाकू जेट देखना पड़ सकता है। रूस के सु‑57 ऑफर पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
यदि सभी प्रोग्राम योजना के अनुसार आगे बढ़ें तो उत्पादन रफ़्तार जरूरी स्तर तक पहुंच सकती है। HAL हर साल 24 से अधिक विमान बनाने की दिशा में काम कर रहा है और MRFA कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर इंडक्शन रेट में उल्लेखनीय सुधार होगा।
थिएटर कमांड के मुद्दे पर एयर चीफ ने स्पष्ट किया कि भारतीय वायु सेना इसके खिलाफ नहीं है, पर संरचना और कार्यान्वयन को सावधानी से देखना होगा। ऑपरेशन सिंधूर के बाद मिले प्रत्यक्ष अनुभवों ने इस चर्चा की दिशा बदल दी है, और नई चीफ्स‑ऑफ‑स्टाफ कमेटी के गठन के बाद इस पर फिर से विचार होगा।
यह तय होगा कि थिएटर कमांड को एक साथ लागू किया जाए या चरणबद्ध तरीके से। सैन्य नेतृत्व सरकार को विकल्प पेश करेगा, लक्ष्य ऐसा ढांचा बनाना है जो ऑपरेशनल दृष्टि से प्रभावी हो।
पाकिस्तान‑चीन के बीच पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर सहयोग को एपी सिंह ने चिंता का विषय बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इन प्लेटफ़ॉर्म को अपनी समग्र युद्ध प्रणाली में पूरी तरह एकीकृत नहीं कर पा रहा है।
सिर्फ विमान नहीं, पूरे नेटवर्क का समन्वय ही उसकी प्रभावशीलता तय करता है। फ्लाईदुबई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने भारतीय पायलटों के साहस की सराहना की और कहा कि कोई व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है।
पिछले दो साल की उपलब्धियों को सामूहिक प्रयास माना गया है, और अंतरिक्ष जागरूकता, ऑपरेशनों का समर्थन तथा स्पेस हथियारों पर काम शुरू हो चुका है।
चुनौतियों की बात करते हुए, एपी सिंह ने कहा कि संख्या बढ़ाना, स्वदेशी‑आधुनिक बेड़े की ओर संक्रमण, देरी से बचना और उत्पादन रफ़्तार बढ़ाना सभी आवश्यक हैं। यदि प्रोग्राम समय पर पूरे हुए तो वायु सेना न सिर्फ मौजूदा अंतर को पाटेगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी।
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