रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन‑दिन की भारत यात्रा पर आए हैं, जहाँ वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में रक्षा सहयोग मुख्य एजेंडा रहेगा, क्योंकि भारत‑रूस के सैन्य संबंध अब नई ऊँचाइयों को छूने की दहलीज पर हैं।
पुतिन‑मोदी वार्ता में चार प्रमुख प्रोजेक्ट्स के लिए संभावित समझौते तय किए जाने की उम्मीद है: S‑400 एंटी‑एयर सिस्टम, ब्रह्मोस‑NG सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, Su‑30MKI का सुपर‑सुखोई अपग्रेड और Su‑57E (एक्सपोर्ट वर्जन) का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर।
S‑400 एंटी‑एयर सिस्टम: 2018 में भारत ने रूस से पाँच S‑400 बैटरियों के लिए 5.43 अर्ब डॉलर का अनुबंध किया था। अब तक चार बैटरियों की डिलीवरी और तैनाती पूरी हो चुकी है, जबकि पाँचवीं बैटरी की डिलीवरी नवंबर 2026 तक अपेक्षित है। पुतिन‑मोदी मुलाकात में इस अंतिम खेप की समयबद्ध डिलीवरी, मेंटेनेंस और ओवरहॉल सुविधाओं पर चर्चा होगी। साथ ही, भारत अतिरिक्त पाँच बैटरियों की खरीद पर भी विचार कर रहा है, जिसके लिए रूस ने लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है, जिससे भारत की एअर डिफेंस क्षमता दो‑गुनी हो सकती है।
ब्रह्मोस‑NG: भारत‑रूस का संयुक्त सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोजेक्ट ब्रह्मोस‑NG अब विकास के अंतिम चरण में है। यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की (लगभग 1.3 टन) और तेज (स्पीड 4 322 km/h) है, तथा 400 km से अधिक रेंज रखती है। छोटा आकार होने के कारण तेजस, मिग‑29 जैसे कई प्लेटफ़ॉर्म पर एक साथ कई मिसाइलें स्थापित की जा सकती हैं। पुतिन के दौरे में इस मिसाइल के विकास, संयुक्त उत्पादन और आगे के अपग्रेड पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
Su‑30MKI अपग्रेड: भारतीय वायुसेना के पास लगभग 260 Su‑30MKI हैं, जिन्हें अब सुपर‑सुखोई कॉन्फ़िगरेशन में अपग्रेड करने की योजना पर काम चल रहा है। अनुमानित लागत 11 अर्ब डॉलर से अधिक है, जिसमें नए रडार, उन्नत एवियोनिक्स, आधुनिक हथियार सिस्टम और लंबी रेंज वाली मिसाइलें शामिल होंगी। अपग्रेड चरणबद्ध तरीके से होगा, जिससे मौजूदा बेड़े की सेवा आयु बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
Su‑57E (एक्सपोर्ट वर्जन): रूसी पाँचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर Su‑57 का एक्सपोर्ट वर्जन भारत को पेश किया गया है, साथ ही संयुक्त उत्पादन और पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव भी दिया गया है। सीमित संख्या में खरीद कर बाद में स्थानीय उत्पादन शुरू करने से भारत की स्टेल्थ क्षमताओं में अंतर को पाटने में मदद मिल सकती है। रडार, इंजन और वेपन इंटीग्रेशन जैसी संवेदनशील तकनीकों पर बातचीत चल रही है।
इन सभी संभावित सौदों का उद्देश्य भारत की सैन्य शक्ति को आधुनिक खतरे के अनुरूप बनाना है। S‑400 एंटी‑एयर सिस्टम एअर डिफेंस को सुदृढ़ करेगा, ब्रह्मोस‑NG स्ट्राइक पावर बढ़ाएगा, Su‑30MKI अपग्रेड मौजूदा बेड़े को दीर्घकालिक उपयोगी बनाएगा, जबकि Su‑57E भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगा। साथ ही, मेक‑इन‑इंडिया और आत्मनिर्भरता की दिशा में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन वाले प्रोजेक्ट्स विशेष रूप से आकर्षक हैं।
रूस को अपने रक्षा निर्यात को बढ़ाना है और भारत जैसे विश्वसनीय साझेदार के साथ गहरा सहयोग स्थापित करना चाहता है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान यह द्विपक्षीय मुलाकात न केवल दो देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। फाइनल डील तुरंत नहीं बन सकती, लेकिन दिशा तय हो जाएगी और आने वाले महीनों में इन प्रोजेक्ट्स की प्रगति देखी जाएगी।
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