‘मैं करीब 800 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ के एक सुरक्षित स्थान पर खड़ा था। अचानक तेज आवाज हुई और देखते ही देखते पहाड़ से पानी का सैलाब नीचे की ओर दौड़ पड़ा। मेरी आंखों के सामने बड़ी-बड़ी इमारतें पानी और मलबे में समाती चली गईं। मजदूर जान बचाने के लिए पहाड़ियों की ओर भागने लगे। कुछ ही मिनट में पूरा इलाका चीख-पुकार से गूंज उठा। यह मंजर देखकर मैं वहीं गश खाकर गिर पड़ा।’ नेपाल में जलप्रलय के प्रत्यक्षदर्शी बस्ती जिले के रहने वाले कुलदीप सिंह उर्फ रोशन सिंह ने फोन पर अपनी आपबीती के जरिए दिल दहला देने वाला मंजर बयां किया। इस हादसे में उन्होंने अपने 9 साथियों को खो दिया।
बनकटी नगर पंचायत के मथौली गांव के रहने वाले रोशन टुंडी ग्रुप कंपनी में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। वह नेपाल में विद्युत प्रसारण, हाइड्रो पॉवर और सड़क निर्माण का काम देख रहे हैं। त्रिशूली में बुधवार सुबह करीब 9 बजे वह काम शुरू ही करने वाले थे, तभी पहाड़ से अचानक सैलाब आ गया। रोशन बताते हैं कि हादसे से पहले स्थानीय प्रशासन ने कुछ देर पहले अलर्ट जारी किया था। इसके चलते कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का मौका मिल गया, लेकिन देखते ही देखते पानी की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। दो तरफ से त्रिशूली नदी से घिरे कस्बे में पानी और मलबा इस कदर घुसा कि कुछ ही देर में पूरा इलाका श्मशान जैसा नजर आने लगा। मजदूर जान बचाने के लिए पहाड़ों पर चढ़ रहे थे, जिसे जहां रास्ता मिला, उधर भाग रहा था। इसी दौरान कई साथी पानी की ऊंची लहरों में समा गए। कोई मलबे में दब गया तो कोई तेज बहाव में बह गया। रोशन की आवाज में उस खौफनाक मंजर का दर्द साफ झलक रहा था।
रोशन के लिए यह त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि अपनों को खोने का दर्द भी है। वह बताते हैं कि नौ साथियों की मौत की खबर ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया है। वहीं रक्षाबंधन के पर्व पर घर न पहुंच पाने का दुख भी उन्हें सता रहा है। रक्षाबंधन पर घर लौटने की तैयारी थी। सोचा था बहनों से राखी बंधवाएंगे और परिवार के साथ पर्व मनाएंगे, लेकिन कुदरत ने सब कुछ बदल दिया। व्हाट्सअप कॉल पर आपबीती सुनाते-सुनाते रोशन की आवाज भर्रा गई।
रोशन ने बताया कि त्रिशूली में काम करने वाले दर्जनों मजदूर अब भी लापता हैं। उनके 9 साथियों की मलबे में दबने से मौत हो चुकी है। त्रिशूली से धादिंग जिले की सीमा और नवलकोट तक तबाही का मंजर है। कहीं मलबे में लोग दबे हैं तो कहीं टनल और जंगलों में फंसे लोग मदद की आस लगाए बैठे हैं। कोई टनल में फंसा है तो कोई जंगल में भटक रहा है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर अपने जिंदा होने की जानकारी दे रहे थे, लेकिन उन्हें खुद नहीं पता था कि वे किस जगह फंसे हैं। कुछ घंटे बाद कई लोगों के मोबाइल भी बंद हो गए। उन्होंने बताया कि हादसे के दौरान कुछ युवा झूलते पुल पर खड़े होकर वीडियो बनाने में लगे थे। ऊंची लहरों और तेज बहाव की चपेट में आने से कई लोगों की जान चली गई।
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