स्मार्टफोन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, जिससे 10,000 रुपये के आसपास 5G फोन ढूंढना मुश्किल हो गया है। बजट ग्राहक अब 15‑20 हजार रुपये तक जाने को मजबूर हैं, जबकि पहले 10,000 रुपये के आसपास 5G फोन आसानी से मिल जाते थे।
Vivo के T‑सीरीज का उदाहरण लें: 2025 में लॉन्च हुआ Vivo T4 Lite 5G 9,999 रुपये से शुरू हुआ, जबकि 2026 में लॉन्च हुआ Vivo T5 Lite 5G की शुरुआती कीमत 19,999 रुपये है। यह एक ही मॉडल का दोगुना मूल्य नहीं है, पर यह दर्शाता है कि समान सेगमेंट में कीमतें बढ़ रही हैं।
सैमसंग, Realme, Poco, Xiaomi, Nothing और अन्य ब्रांडों के भी कई मॉडल इसी तरह महंगे हो रहे हैं। पुराने मॉडल की कीमत बढ़ी है और नए मॉडल अधिक प्रीमियम पर आ रहे हैं।
तो सवाल उठता है: क्या कंपनियों की लागत वास्तव में इतनी बढ़ गई है? क्या AI के कारण फोन की कीमत बढ़ रही है? क्या कंपनियां AI और मेमोरी की बढ़ती कीमतों को बहाना बनाकर ज़रूरत से ज़्यादा मूल्य बढ़ा रही हैं?
स्मार्टफोन की लागत पर सबसे बड़ा दबाव रैम और स्टोरेज के ऊपर है। DRAM और NAND जैसी मेमोरी की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2026 में मेमोरी लागत में 70% तक की बढ़ोतरी ने कम कीमत वाले फोन की बिल ऑफ़ मैटेरियल्स को भारी प्रभावित किया।
मेमोरी की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण AI का बढ़ता उपयोग है। AI मॉडल को ट्रेन और रन करने के लिए डेटा सेंटरों को उच्च‑बैंडविड्थ मेमोरी की आवश्यकता होती है। इस मांग में वृद्धि ने मेमोरी सप्लाई चेन पर दबाव डाला और कीमतें बढ़ाईं।
स्मार्टफोन पर इसका असर स्पष्ट है: AI के लिए डेटा सेंटर बढ़े → डेटा सेंटर में मेमोरी की मांग बढ़ी → मेमोरी की कीमत बढ़ी → फोन बनाने की लागत बढ़ी → कंपनियों ने इसका कुछ हिस्सा फोन की कीमत में जोड़ दिया।
लेकिन फोन की अंतिम कीमत सिर्फ पार्ट्स से तय नहीं होती। इसमें प्रोसेसर, डिस्प्ले, कैमरा, बैटरी, सॉफ्टवेयर, मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स, रिटेल मार्जिन और कंपनी का मुनाफा भी शामिल है। इसलिए कंपनियों के पास लागत बढ़ने पर केवल कीमत बढ़ाने के अलावा मार्जिन कम करने, खर्च घटाने या हार्डवेयर बदलने के विकल्प भी हैं।
बजट सेगमेंट पर सबसे ज़्यादा दबाव 15,000 रुपये से नीचे के फोन पर है। काउंटरपॉइंट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट 10% घटा, जबकि 15,000 रुपये से कम के सेगमेंट में गिरावट लगभग 45% रही।
इसका मतलब है कि अगर इस सेगमेंट में फोन महंगे हो जाएं तो ग्राहक के पास तीन विकल्प बचते हैं: खरीदारी टालना, पुराना फोन ज़्यादा समय तक चलाना या अधिक कीमत वाले कैटेगरी में जाना।
कई फोन अभी भी इस कीमत पर उपलब्ध हैं, खासकर ऑफ़र या पुराने मॉडल के रूप में। लेकिन नए लॉन्च में 5G, अच्छी स्क्रीन, पर्याप्त रैम, बड़ा स्टोरेज, अच्छा कैमरा और बड़ी बैटरी का पूरा पैकेज 10,000 रुपये में देना पहले जितना आसान नहीं रहा।
कंपनियां न केवल कीमत बढ़ा रही हैं, बल्कि कॉन्फ़िगरेशन भी बदल रही हैं। कम स्टोरेज वाले वेरिएंट ज़्यादा प्रमुख हो रहे हैं, कैमरा सेटअप में बदलाव देखा जा रहा है और बजट सेगमेंट में 4G फोन को भी फिर से जगह मिल रही है।
औसत बिक्री कीमत भी बढ़ रही है। IDC के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट 4.1% घटकर 3.1 करोड़ यूनिट रह गई, जबकि औसत बिक्री कीमत 302 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले से 10.4% अधिक है।
प्रीमियम सेगमेंट भी बढ़ रहा है: 30,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की शिपमेंट 11% बढ़ी और यह कुल शिपमेंट का 22% हिस्सा बन गया।
महंगे फोन बेचने में EMI और फाइनेंसिंग का भी बड़ा रोल है। 40 या 50 हजार रुपये का फोन मासिक किस्तों में खरीदा जा सकता है, जबकि 10,000 रुपये के फोन में 2‑3 हजार रुपये की अतिरिक्त कीमत भी बड़ा अंतर पैदा करती है।
इसलिए बजट सेगमेंट में छोटी सी लागत बढ़ोतरी भी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। 50,000 रुपये के फोन में कुछ हजार रुपये की लागत बढ़ने पर कंपनी के पास विकल्प अधिक होते हैं, जबकि 10,000 रुपये के फोन में वही लागत बढ़ोतरी पूरी कीमत का बड़ा हिस्सा बन जाती है।
क्या 10,000 रुपये में अच्छा 5G फोन खत्म हो जाएगा? अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। स्वदेशी कंपनियां अभी भी इस सेगमेंट में फोन लाती हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में से एक है और बजट ग्राहक बड़ी संख्या में हैं। इसलिए कंपनियां इस सेगमेंट को पूरी तरह छोड़ नहीं सकतीं।
भविष्य में 10,000 रुपये में 5G फोन मिलने की संभावना है, लेकिन उसमें कुछ समझौते हो सकते हैं: डिस्प्ले कम बेहतर, कैमरा सीमित, रैम या स्टोरेज कम, प्रोसेसर कमजोर।
काउंटरपॉइंट ने 2026 में भारत के स्मार्टफोन बाजार की मात्रा में लगभग 13% गिरावट का अनुमान लगाया है। मेमोरी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। Apple ने Samsung से चिप महंगे दाम पर खरीदी है, जिससे अगला iPhone और भी महंगा हो सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर फोन की कीमत लगातार बढ़ती जाएगी। त्योहारों के दौरान छूट, बैंक ऑफ़र, एक्सचेंज बोनस और पुराने मॉडल पर कीमत कटौती से ग्राहकों को राहत मिल सकती है, पर इस बार का फेस्टिव सेल भी फीका रह सकता है।
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