राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत नागपुर में विजयदशमी के मौके पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के पावन अवसर पर अपने संबोधन में देश और दुनिया से जुड़े कई ज्वलंत एवं वैचारिक मुद्दों पर अपनी राय रखी. नागपुर में संघ प्रमुख ने अपने भाषण में वैश्विक उथल-पुथल से लेकर आधुनिक तकनीक और सामाजिक बदलावों पर बात रखी.
भागवत ने जहां एक ओर वैश्विक पटल पर फ्रांस के घटनाक्रम और भारत में होने वाले सुनियोजित प्रोटेस्ट्स के जरिए सामाजिक ताने-बाने को चुनौती दिए जाने पर चिंता जताई, तो साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीक के दौर में Gen-Z (नई पीढ़ी) की भूमिका और प्राथमिकताओं पर भी विशेष जोर दिया.
विजयदशमी के आयोजन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी को समस्या नहीं समाधान बनना चाहिए. इसके साथ ही मुसलमानों को लेकर भी भी सियासी संदेश दिया दिया. उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के लिए एकजुटता की भावना बनाए रखना बहुत जरूरी है.
'आंदोलन समाधान के लिए, समस्या के लिए नहीं'
मोहन भागवत ने कहा कि भारत विकास की राह पर है, विकास पूरा नहीं हुआ है तो समस्या तो रहेंगीं ही. समस्या के चलते आंदोलन भी होते ही हैं और प्रजातंत्र में आंदोलन होंगे ही, लेकिन आंदोलन समाधान के लिए होना चाहिए, समस्या के लिए नहीं. आंदोलनों का उद्देश्य हमेशा समाधान खोजना होना चाहिए. हमारी किसी भी कृति से समाज में अनबन, द्वेष या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए.
संघ प्रमुख ने अपने एक अखंड समाज में किसी भी कारण विघटन नहीं होना चाहिए. सस्ती लोकप्रियता हमारे ऊपर हावी नहीं होना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि चाहे आंदोलन करने वाले समूह हों या नेता सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए. किसी के भी व्यवहार से समाज में आपसी टकराव, नफरता या विभाजन की स्थिति नहीं पैदा होनी चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि वोट, सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक फायदे का लालच समझ और सद्भावना पर हावी नहीं होनी चाहिए.
मोहन भागवत ने भारत में लगातार हो रहे आंदोलन को लेकर एक बड़ा सियासी संदेश दिया है, लेकिन साथ ही यह भी मैसेज देने का काम किया है. समस्या के समाधान के लिए आंदोलन होना चाहिए, लेकिन उससे सामाजिक विघटन पैदा न हो और न ही देश को कमजोर किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी दूसरे लक्ष्य से चले तो वह राजनीतिक का साधन बन जाता है. इसका लाभ भारत को दबानेवाली शक्तियां लेती हैं. वे भारत को बांटकर दूसरा वर्ग बनाती हैं,. असंतोष और अराजकता भड़काती हैं. इस दौरान मोहन भागवत ने आशा भोसले के एक गाने का भी जिक्र किया.
फ्रांस और नेपाल के बहाने दिया सियासी संदेश
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, एक पश्चिम से आंधी चली है, जो हर तरह की व्यवस्था, भद्रता, मांगल्य और सांस्कृतिक मानवीय संस्कार से विरोध रखती है. उसको नष्ट भ्रष्ट करना चाहती है. और प्रगति देश भी उससे त्रस्त है. अभी दो चार दिन पहले से जो समाचार आ रहे हैं, वो सुन लीजिए. अल्बानिया में क्या हो रहा है. बांग्लादेश में क्या हुआ, नेपाल में क्या हुआ, ये सब किया कराया उनका है, वो कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बनती है. लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है. पहले नहीं हुआ है, आज भी नहीं हुआ है."
मोहन भागवत ने कहा, फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में जो कुछ हुआ, वह सब एक सोचे-समझे षड्यंत्र का हिस्सा है,. रिजीम चेंज के नाम पर दुनिया भर में जो कार्रवाइयां चल रही हैं, उनसे आज प्रगतिशील देश भी त्रस्त हैं. रिजिम चेंज से परिस्थितियां ना कभी बदली हैं और ना होंगीं. अपने स्वार्थ का पोषण करने वाले अपने पिठ्ठू सब जगह प्रभावी रहे हैं. इसके लिए ये कार्यवाहियां सारी दुनिया में चलती है और भारत का बड़ा होना इसमें खलल डालेगा. भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी दूसरे लक्ष्य से चले तो वह राजनीतिक का साधन बन जाता है. इसका लाभ भारत को दबानेवाली शक्तियां लेती हैं. वे भारत को बांटकर दूसरा वर्ग बनाती हैं,. असंतोष और अराजकता भड़काती हैं. इस दौरान मोहन भागवत ने आशा भोसले के एक गाने का भी जिक्र किया.
भागवत ने साफ संदेश दिया है कि भारत को कमजोर करने की साजिश की जा रही है, रिजीम चेंज करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि विश्व की शक्ति विचित्र है. उनको भारत चाहिए भी और भारत बड़ा भी नहीं होना चाहिए. क्योंकि उनके बड़प्पन को झटका लगेगा, इसलिए वो भी अपना खेल खेलना चाहती है. अपना जो एक टारगेट है भारत को बड़ा बनाना, उसका ध्यान रखकर सावधान रहिए. परस्पर सद्भावना की रक्षा करनी है, सावधान रहकर किसी तरह से उत्तेजित न होकर, हमको सतत प्रयास करने पड़ेंगे.
'AI तकनीक का इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए हो'
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की प्रगति से व्यक्ति का जीवन आसान और सुविधाजनक हुआ है. विज्ञान और तकनीक का स्वागत करना चाहिए, लेकिन उनका उपयोग विवेक और नैतिकता के साथ होना चाहिए. तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने का साधन है, स्वयं जीवन का उद्देश्य नहीं. केवल भौतिक सुविधाओं और उपभोग पर आधारित विकास से पर्यावरण और मानव जीवन को नुकसान हो सकता है.
उन्होंने नेपाल में आई आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पीछे हिमालयी क्षेत्र में अपनाए गए एकतरफा विकास की भूमिका भी रही है. भागवत ने कहा कि तकनीक का सही या गलत इस्तेमाल व्यक्ति के समझ पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा की समझ स्वच्छ ऊर्जा देने की जगह विनाशकारी हथियार बनाने में भी इस्तेमाल हो सकती है.
उन्होंने AI पर भी बात की. उन्होंने कहा, 'AI जैसी उपयोगी तकनीक का इस्तमाल लोगों को भ्रमित करने, ठगने और झूठ फैलाने के भी किया जा सकता है.' परमाणु तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए. भारत को पर्यावरण संरक्षण, नैतिकता, संयम और समन्वय पर आधारित संतुलित विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए,
नई पीढी को भागवत ने दिया संदेश
संघ प्रमुख ने नई पीढ़ी को भी जरूरी सलाह दी. उन्होंने कहा, आज के अभिभावकों को अपनी इस नई पीढ़ी को चुनने की कला सिखानी होगी. इन बच्चों को उचित और अनुचित में से चुनाव करना सिखाना होगा. युवाओं को सही आचरण अपनाना होगा क्योंकि आचरण त्यागने के कारण ही हमारा पतन हुआ था और हम गुलाम हुए थे.
मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में ड्रग्स की समस्या पर भी बात की. उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी नशीली दवाओं की आदी होती जा रही है. उन्होंने नशे को एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि अभिभावकों को आने वाली पीढ़ी को इसे लेकर सीख देने की बात की है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सीखने के लिए उत्सुक रहती है और नई चीज़ें उसे आकर्षित करती हैं. लेकिन उसे सही गलत का अंतर समझना चाहिए.
भागवत ने कहा कि आरएसएस खुद नशे के खिलाफ भारत में अभियान चलाएगा. भारत की सनातन परंपरा सभी को अपनाती है. सभी के अंदर राष्ट्र सबसे पहले का भाव होना जरूरी है.’ इसके साथ संघ प्रमुख ने कहा कि विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी बिना उचित-अनुचित का विवेक किए नई पीढ़ी ग्रहण करती है. उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद विभिन्न देशों ने कुछ अनुशासन और प्रतिबंध लागू किए हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेष तौर पर 'ओटीटी प्लेटफॉर्म' को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है. शासन-प्रशासन को इसका विचार करना चाहिए. ऐसे में समाज की वर्तमान अभिभावक पीढ़ी को यह विवेक नई पीढ़ी को देना पड़ेगा.
भारत में हिंदू-मुस्लिम एक हैं-संघ प्रमुख
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में अच्छा माहौल बनाने और बनाए रखने के लिए सभी को धैर्य और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए. लोगों को सोच-समझकर काम करना चाहिए और एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को भी अपने रोजमर्रा के व्यवहार में सावधानी बरतनी चाहिए.
भागवत ने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं. उनके प्रभाव में आकर हमें उत्तेजित नहीं होना चाहिए. लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ाय लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रुक सका, क्योंकि लोगों के मन में आ गया था कि जो अलग दिखते हैं, वे अलग ही हैं.
संघ प्रमुख ने कहा कि हमारे पूर्वज एक, सबको साथ लेकर चलना जरूरी हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है. किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए. भारत की परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है.
मोहन भागवत ने कहा, हिंदुओं का स्वभाव है समाज और राष्ट्र की सुरक्षा करना. हाल ही में कैप्टन स्मित मच्छार ने जो फ्लाईदुबई फ्लाइट में लोगों की जान बचाई वह देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला कदम तो था ही यह हिंदू स्वभाव भी था. हिंंदू भाव में विश्व को जोड़ने की शक्ति है. इसके साथ ही राष्ट्रीय और वैश्विक शांति के लिए भी उठाया गया महत्वपूर्ण कदम था. सभी युवाओं को यह राष्ट्रबोध और कर्तव्यनिष्ठा को समझने की जरूरत है.
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