UP News: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती खुलकर जयंत चौधरी के समर्थन में आ गई हैं। समाजवादी पार्टीअध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर तीखा हमला बोला है। बसपा सुप्रीमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सपा को अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी के बारे में इस तरह का सार्वजनिक बयान देना शर्मनाक है। उन्हें पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक्स पर लिखा, ‘समाजवादी पार्टी प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उस पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना, ‘हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह पूरी तरह अमर्यादित, अशोभनीय और अत्यंत शर्मनाक है। इस प्रकार की अहंकारी और अलोकतांत्रिक बयानबाजी के लिए उन्हें न केवल रालोद और उसके नेता से, बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए पूरे जाट समाज से भी बिना किसी देरी के माफी मांगनी चाहिए। वैसे, देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र और चेहरा अपने विरोधी दलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगियों के लिए भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित, ज्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय रहा है। यही कारण है कि इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ अक्सर भाजपा उठाती रही है और सेक्युलर ताकतें कमजोर होती रही हैं।’
मायावती ने आगे लिखा, ‘इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वभाव के कारण पहले साल 1993 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के साथ सपा और बसपा का बना गठबंधन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप 2 जून 1995 को मेरी हत्या के षड्यंत्र के तहत मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ। आगे इनके बेटे अखिलेश यादव द्वारा अपने पिता की तरह पुरानी गलतियों को फिर से न दोहराने का आश्वासन देते हुए, लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया गया। हालांकि, चुनाव के नतीजे इनके अनुरूप नहीं आने के कारण कुछ समय बाद ही बसपा के प्रति इनके अहंकारी और स्वार्थी रवैये के चलते यह गठबंधन भी टूट गया।'
मायावती ने अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में कहा कि सपा गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है। साथ ही, दूसरी पार्टियों के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी खूब इस्तेमाल करती रहती है। सपा का यह पुराना रवैया रहा है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से जरूर सावधान रहें।
मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पंडितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी खुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से खासकर ब्राह्मण समाज के भी हितैषी नहीं रहे हैं। इस पार्टी की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण और उत्पीड़न आदि किया गया।
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