इस मीटिंग में सिर्फ हालिया हार की समीक्षा नहीं होगी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के फ्यूचर और प्लानिंग पर भी चर्चा की जाएगी. खासतौर पर आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे पर टीम इंडिया के प्रदर्शन, खिलाड़ियों की फिटनेस, चोटों के मैनेजमेंट और IPL के वर्कलोड जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे.
BCCI के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया पहले ही कह चुके हैं कि इन हार के बाद बोर्ड भारत के 'अवे फॉर्म' (घर से बाहर प्रदर्शन) की समीक्षा करेगा.हालांकि कुछ कारणों से यह मीटिंग टलती रही. अब बोर्ड ने इस पर गंभीरता से चर्चा के लिए टीम मैनेजमेंट और सेलेक्शन से जुड़े अहम लोगों को एक साथ बुलाया है.
आयरलैंड से शुरू हुई गिरावट, इंग्लैंड ने बढ़ाई चिंता
टीम इंडिया के लिए हालिया विदेशी दौरे के नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं. जून में आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की T20I सीरीज में भारत को 2-0 से हार झेलनी पड़ी. इस हार के साथ ही मौजूदा T20 वर्ल्ड कप चैम्पियन का करीब तीन साल से चला आ रहा लगातार 16 सीरीज में बिना हारे रहने का सिलसिला भी टूट गया. इसके बाद इंग्लैंड का दौरा आया और यहां स्थिति और खराब हो गई.
भारत पांच मैचों की T20I सीरीज 4-0 से हार गया. इस सीरीज में नॉटिंघम में मिली 125 रनों की हार ने भी टीम के प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए.वनडे सीरीज में टीम इंडिया ने जरूर कुछ सम्मान बचाया. बर्मिंघम में भारत ने पहला वनडे जीता, लेकिन आखिर में इंग्लैंड ने सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली.
खिलाड़ियों को CoE पर भरोसा क्यों नहीं? मीटिंग का एक बड़ा मुद्दा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) भी रहने वाला है. इस साल के आखिर में भारतीय टीम को न्यूजीलैंड का दौरा करना है. इसके बाद 2027 वर्ल्ड कप भी टीम की बड़ी प्राथमिकता है. ऐसे में BCCI चाहता है कि टीम मैनेजमेंट, सेलेक्शन कमेटी, खिलाड़ी और CoE एक ही दिशा में काम करें.
लेकिन खबरों के मुताबिक कई खिलाड़ियों को CoE पर भरोसा नहीं है. खिलाड़ियों, CoE और सेलेक्शन कमेटी के बीच बातचीत और तालमेल की कमी भी सामने आई है. यही वजह है कि खिलाड़ियों की चोटों और फिटनेस के मैनेजमेंट को लेकर बोर्ड अब ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है.
चोटों ने बढ़ाई BCCI की टेंशन हाल के दौरों से पहले कई अहम खिलाड़ियों के चोटिल होने की वजह से BCCI और CoE दोनों की आलोचना हुई है. कम से कम एक ऐसा मामला भी सामने आया जब सीनियर सेलेक्शन कमेटी को यह जानकारी नहीं दी गई कि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह दौरे के लिए पूरी तरह फिट नहीं थे. वहीं वॉशिंगटन सुंदर भी चोट के कारण बाहर हो गए. साई सुदर्शन को भी फिट होने में उम्मीद से ज्यादा समय लगा. इन घटनाओं के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर सिस्टम पर सवाल उठे हैं. अब BCCI की मीटिंग में इस पूरे मैकेनिज्म की समीक्षा की जाएगी.
IPL का वर्कलोड कितना जिम्मेदार? खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर एक और बड़ा सवाल IPL के वर्कलोड से जुड़ा है. 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा होगी कि IPL के दौरान खिलाड़ियों पर पड़ने वाला काम का बोझ उनकी फिटनेस को किस तरह प्रभावित करता है. टीम मैनेजमेंट पहले भी BCCI के सामने खिलाड़ियों के पूरी तरह फिट नहीं होने को लेकर चिंता जाहिर कर चुका है. अब बोर्ड यह समझने की कोशिश करेगा कि लंबे IPL सीजन के बाद खिलाड़ियों को नेशनल अीम के अहम विदेशी दौरों के लिए किस तरह तैयार रखा जाए.
चार खिलाड़ियों की फिटनेस पर पहले से नजर अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए भारत की T20I टीम के ऐलान में भी चार खिलाड़ियों की उपलब्धता उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगी. जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर, नीतीश रेड्डी और हर्षित राणा का 9 सितंबर को फिटनेस टेस्ट होना है. इन चारों के खेलने को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. ऐसे में न्यूजीलैंड दौरे को देखते हुए BCCI इस बात पर भी चर्चा करेगा कि तेज गेंदबाजों का पूल किस तरह मजबूत और फिट रखा जाए. बोर्ड का फोकस चोटों की मौजूदा समस्या से आगे बढ़कर भविष्य में चोट लगने की दर को कम करने पर भी होगा.
हार्दिक पंड्या भी चर्चा के केंद्र में मीटिंग में हार्दिक पंड्या की फिटनेस और रिकवरी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. सेलेक्शन कमेटी चाहती है कि हार्दिक 2027 वर्ल्ड कप के लिए उपलब्ध रहें. लेकिन फिलहाल वह वनडे मुकाबले में पांच या छह ओवर से ज्यादा गेंदबाजी करने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में उनकी फिटनेस टीम इंडिया के लिए अहम है. खासकर इसलिए क्योंकि एक ऑलराउंडर के तौर पर हार्दिक टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन देते हैं.
फ्यूचर की तैयारी पर BCCI का फोकस गंभीर, अगरकर और लक्ष्मण की यह मीटिंग इसलिए भी अहम है क्योंकि BCCI अब सिर्फ हालिया हार का पोस्टमार्टम नहीं करना चाहता. न्यूजीलैंड दौरे से लेकर 2027 वर्ल्ड कप तक भारतीय टीम का रोडमैप तैयार करना है. इसके लिए फिटनेस, चोटों का मैनेजमेंट, खिलाड़ियों का वर्कलोड और CoE के साथ तालमेल जैसे मुद्दों को सुलझाना जरूरी है.
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