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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली, चोरी और अवैध रूप से बेची जा रही कैंसर दवाओं के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। ये दवाइयां करीब 9 करोड़ रुपये की हैं। यह गिरोह दिल्ली-NCR, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय था। अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस के मुताबिक, जांच में पता चला है कि कुछ अस्पताल और हेल्थकेयर कर्मचारी इस नेटवर्क की मदद कर रहे थे, जिससे महंगी कैंसर दवाइयां हासिल कर उन्हें बेचा जाता था। गिरफ्तार किए गए लोगों में फरीदाबाद के ऑन्कोलॉजी नर्सिंग स्टाफ, एक नर्सिंग इंचार्ज, एक ऑन्कोलॉजिस्ट के पूर्व निजी सहायक, और हैदराबाद व अलवर के मेडिकल स्टोर और अस्पतालों से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
जांचकर्ताओं ने बताया कि गिरोह कई तरीकों से दवाइयां हासिल करता था। इनमें नकली दवाएं, अस्पतालों के कैंसर वार्ड से चोरी की गई दवाइयां, और सरकारी संस्थानों व गोदामों से अवैध रूप से निकाली गई दवाइयां शामिल हैं।
इसके बाद दवाइयों को दोबारा पैक करके बेचा जाता था। पुलिस ने बताया कि आरोपी एसीटोन का इस्तेमाल करके बैच नंबर, MRP और अन्य पहचान चिह्नों को हटाते थे, फिर दवाइयों को पुराने कार्टन में रखकर बेचते थे।
दवाइयों को बिना ड्रग लाइसेंस, वैध बिल या खरीद रिकॉर्ड के आवासीय परिसरों में रखा जाता था। वहां से उन्हें बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई 11 जुलाई 2026 को शुरू हुई, जब सात टीमों ने स्थानीय पुलिस और ड्रग्स विभाग की मदद से दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की।
अगले दिन, 12 जुलाई को दिल्ली के क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज की गई।
DCP (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम ने बताया कि इंटर-स्टेट सेल को एक संगठित नेटवर्क के बारे में सूचना मिली थी, जो नकली और चोरी की कैंसर दवाइयों को एक स्थापित चेन के जरिए लोगों तक पहुंचा रहा था।
पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान 588 भरी हुई एंटी-कैंसर वायल्स और 3,021 अन्य दवा यूनिट्स बरामद की हैं।
जब्त की गई कैंसर दवाओं में ये महंगी दवाएं शामिल हैं:
Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Opdiva, Gazyva, Bavencio, Adcetris, Keytruda
जांचकर्ताओं ने छह खाली वायल्स, सात खाली दवा बॉक्स, एसीटोन, थर्मोकोल, बबल रैप और टेप भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल दवाइयों को दोबारा पैक करने में किया जा रहा था।
इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए हैं, जो इस अवैध कारोबार से हासिल हुए माने जा रहे हैं। जब्त दवाइयों की कुल कीमत 9 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
इस मामले में गिरफ्तार 17 आरोपियों में दिल्ली के लक्ष्मी नगर से अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी; गोविंदपुरी से सतीश कुमार; गाजियाबाद से गगन और विश्वास त्यागी; नोएडा से आनंद कुमार; गुरुग्राम से मुकेश और मयंक गर्ग; फरीदाबाद से दीपक उर्फ रवि और जसवंत शर्मा; झज्जर से परमजीत श्योराण; अलवर से मनीष शर्मा; नवी मुंबई से आयुष कुमार; और हैदराबाद से श्रीनिवासुलु कलवा, रामदास सतीश कुमार और मालुगारी श्रीनाथ रेड्डी शामिल हैं।
जांच अभी भी जारी है। पुलिस छापेमारी के दौरान बरामद डायरियों, रजिस्टरों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की जांच कर रही है, ताकि पैसे के लेन-देन का पता लगाया जा सके और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
जांचकर्ता दवाइयों के असली स्रोतों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दवाइयां आखिर में कहां सप्लाई की जाती थीं। पुलिस ने कहा कि जांच जारी रहने पर और गिरफ्तारियां और बरामदगी होने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार ने ऑन्कोलॉजी सुविधाओं वाले अस्पतालों को सलाह दी है कि वे कैंसर दवाइयों का सख्त रिकॉर्ड रखें और इस्तेमाल के तुरंत बाद खाली वायल्स और एम्प्यूल्स को नष्ट कर दें, ताकि नकली दवाइयां बनाने वाले उनका दोबारा इस्तेमाल न कर सकें। केंद्र सरकार ने भी कैंसर दवाइयों, नारकोटिक पेनकिलर्स और वैक्सीन के लिए QR कोड का इस्तेमाल बढ़ा दिया है, ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके और नकली दवाइयों की सप्लाई रोकी जा सके।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई जुलाई 2026 में शुरू हुई थी, और रैकेट से जुड़े अन्य सहयोगियों, सप्लायरों और डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है, ताकि और गिरफ्तारियां की जा सकें।
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