BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की बातचीत अब अंतिम दौर में पहुँच गई है। दोनों पक्षों के बीच सीट बंटवारे को लेकर वार्ता चल रही है और जल्द ही गठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है।
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में BJP 35‑45 सीटें जीतने का लक्ष्य रख रही है, जबकि बाकी सीटों पर अकाली दल और उसके सहयोगी दलों का कब्ज़ा होगा।
दोनों दल पहले अलग‑अलग चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन अब उन्हें एहसास हो रहा है कि एक साथ रहने से दोनों को फायदा हो सकता है। अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि गठबंधन का ऐलान जल्द होना चाहिए, ताकि चुनाव से पहले संगठनात्मक तालमेल बन सके।
संभावित गठबंधन में अकाली दल "बड़े भाई" की भूमिका निभाएगा। यदि गठबंधन जीतता है, तो मुख्यमंत्री पद पर अकाली का मजबूत दावा रहेगा, जबकि BJP उन क्षेत्रों पर ज़ोर दे रही है जहाँ उसका प्रदर्शन पहले बेहतर रहा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में एनडीए सरकार बनाने के बयान के बाद गठबंधन की गति तेज हुई है। BJP का आंतरिक आकलन 80 से अधिक सीटें जीतने का है, लेकिन यह अभी तक स्वतंत्र अनुमान नहीं माना गया।
वोटों के आंकड़े भी इस गठबंधन को समर्थन दे रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP को लगभग 25 लाख (18.56%) और अकाली को 18 लाख (13.42%) वोट मिले। दोनों के जोड़ से लगभग 43 लाख (32%) वोट बनते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली को 28.61 लाख (18.38%) और BJP‑सहयोगियों को 12 लाख (8%) वोट मिले।
वहीं, AAP ने 2022 में 42% वोट से 92 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में उसका वोट प्रतिशत 26.30% तक गिर गया, जबकि कांग्रेस का 26.02% रहा। BJP का मानना है कि अकाली के साथ गठबंधन AAP‑कांग्रेस को कड़ी चुनौती देगा, पर सीधे वोट जोड़ना सटीक सीट अनुमान नहीं देता।
2024 के लोकसभा परिणामों में BJP 23 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, कुल 45 क्षेत्रों में सबसे अधिक सीटें जीतीं। अकाली दल 9 में पहले, 5 में दूसरे और 5 में तीसरे स्थान पर रहा। दोनों के साथ लड़ने पर कई सीटों की तस्वीर बदल सकती थी।
सीट बंटवारा इस गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती है। पारंपरिक रूप से BJP शहरी क्षेत्रों में, अकाली ग्रामीण में मजबूत रहा है, पर अकाली अब सेमी‑अर्बन (अर्ध‑शहरी) सीटों पर भी खेलना चाहता है, जहाँ BJP की पकड़ है। इसलिए उम्मीदवार चयन और सीटों की अदला‑बदली पर समझौता आवश्यक होगा।
अकाली दल अपने अलग हुए नेताओं को वापस लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिखरे धड़ों को फिर से एकत्रित किया जा सके और गठबंधन को सुदृढ़ बनाया जा सके।
दोनों दल 1996‑2020 तक कई बार गठबंधन में रहे, 1997, 2007 और 2012 के चुनावों में सफल सरकारें बनाई। 2020 में कृषि कानूनों पर मतभेद से गठबंधन टूट गया, लेकिन अब फिर से मिलन की संभावना बन रही है। गठबंधन का औपचारिक ऐलान, सीट बंटवारा और मुख्यमंत्री पद पर सहमति के बाद ही अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
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