2027 के विधानसभा चुनावों के करीब आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी को जातीय‑सामाजिक समीकरणों को संतुलित रखने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘इक्विटी/कास्ट‑बेस्ड डिस्क्रिमिनेशन रूल्स’ को लेकर उठे विवाद ने पार्टी के कोर वोटबैंक, यानी सवर्ण वर्ग, में असंतोष पैदा कर दिया है।
यह असंतोष न केवल सवर्णों में बल्कि युवा व नए मतदाताओं में भी महसूस किया जा रहा है, जिससे बीजेपी को दोनों वर्गों को साथ ले कर चलने की टेंशन पैदा हुई है।
विधान परिषद की शिक्षक‑और‑स्नातक कोटे की सीटों पर हुए चुनावों में सवर्ण वर्ग की नाराज़गी ने आगरा, वाराणसी और लखनऊ जैसी प्रमुख सीटों पर बीजेपी को कठिनाइयों का सामना कराया। अब पार्टी ने 2027 के चुनाव से पहले इस समीकरण को ठीक करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर ली है।
UGC के नए प्रावधानों को लेकर कई शैक्षणिक संस्थानों और छात्र संगठनों में विरोध की लहर है। विपक्ष इन मुद्दों को चुनावी हथियार बनाकर बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए पार्टी ने इस पर शीघ्र कार्रवाई शुरू कर दी है।
बीजेपी के अंदर और RSS के साथ मिलकर ‘छात्र संवाद’ रणनीति तैयार की गई है, जिसका मकसद युवाओं और छात्रों को सही जानकारी देना और किसी भी गलत संदेश को रोकना है। पार्टी को दोहरे दुविधा का सामना है: UGC का खुलकर समर्थन करने से 17‑18 % सवर्ण वोटबैंक छूटने का डर है, जबकि खुलकर विरोध करने से OBC‑दालित वोटबैंक पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने कानूनी राहत दी, पर राजनीतिक नुकसान की भरपाई अभी भी चिंता का विषय है।
इन चुनौतियों को दूर करने के लिए राष्ट्रीय समन्वयक वी. डी. शर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को दिशा‑निर्देश दिए। उन्होंने अफवाहों से सतर्क रहने, सोशल मीडिया पर सही जवाब देने और घर‑घर जाकर मतदाता सूची की जाँच करने पर ज़ोर दिया।
शर्मा ने बताया कि शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों, युवाओं, दुग्ध उत्पादकों, रेहड़ी‑पटरी विक्रेताओं और वरिष्ठ नागरिकों को अभियानों से जोड़कर हर वर्ग के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। UGC के मुद्दे को समझाने के लिए सामाजिक चौपालों का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि नाराज़ सवर्ण युवाओं को पार्टी की नीति का सही अर्थ समझाया जा सके।
बीजेपी और RSS के कार्यकर्ता मिलकर राज्यभर में छात्रों और युवा वर्ग के साथ संवाद सत्र आयोजित करेंगे। सभी प्रकोष्ठों को एक महीने की कार्ययोजना बनाकर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े किसी भी मुद्दे को तुरंत उठाया जा सके।
सामाजिक चौपालें इस रणनीति का मुख्य हिस्सा होंगी। इन मंचों पर विभिन्न जातीय और सामाजिक समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे बातचीत करके पार्टी का संदेश पहुंचाया जाएगा। लक्ष्य है कि जातीय पिच से हटकर धर्म‑आधारित पिच पर चुनाव को लाया जाए और SP के ‘पीडीए’ फॉर्मूले को काउंटर किया जाए।
यूपी में सवर्ण वोट भले ही कुल वोट का 18 % के आसपास हो, लेकिन चुनावी माहौल बनाने में इनका प्रभाव बहुत बड़ा है। इसलिए बीजेपी ने सवर्ण वर्ग की नाराज़गी को कम करने, OBC‑दालित समीकरण को बनाए रखने और विपक्षी नैरेटिव को खारिज करने के लिए आक्रामक रणनीति तैयार की है। आने वाले दिनों में पार्टी और संगठन मिलकर जिला‑स्तरीय बैठकों, सामाजिक चौपालों और प्रकोष्ठ कार्यों के जरिए इस मुद्दे को शांति‑पूर्ण समाधान की ओर ले जाने की कोशिश करेंगे।
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