फिल्म रिलीज़ से पहले सिर्फ स्टार‑कास्ट, कहानी या बॉक्स‑ऑफ़िस नहीं, बल्कि CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन) की कसौटी भी पास करनी पड़ती है। अब CBFC ने संशोधित सर्टिफ़िकेशन गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनमें हिंसा, ड्रग्स, सामाजिक संवेदनशीलता, टाइटल और विदेशी संबंधों से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं।
इसी समय CBFC का नया 18‑सदस्यीय बोर्ड भी बना है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को बोर्ड का पुनर्गठन किया, जिसमें प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी, प्रियदर्शन और प्रोसेनजीत चटर्जी जैसे फ़िल्म‑मनोरंजन जगत के प्रमुख शामिल हैं।
नई गाइडलाइंस में स्पष्ट कहा गया है कि किसी फ़िल्म की सामग्री भारत के अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को नुकसान नहीं पहुँचानी चाहिए। इसलिए भारत‑चीन तनाव या सैन्य टकराव को दर्शाने वाली फ़िल्में, जैसे सलमान खान की आगामी वॉर फ़िल्म “मातृभूमि” (पहले “गलवान अटैक और बैटल ऑफ गलवान”), को विशेष scrutiny का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार इस फ़िल्म को CBFC सर्टिफ़िकेशन में देरी का सामना करना पड़ा क्योंकि चीन‑संबंधी पहलू पर प्रश्न उठे। सूत्रों ने बताया कि फ़िल्म में सीधे चीन का उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि “पड़ोसी मुल्क” जैसे सामान्य शब्दों का प्रयोग किया गया है, लेकिन बोर्ड यह जांचेगा कि तनाव को कैसे प्रस्तुत किया गया है।
हिंसा के संदर्भ में नई गाइडलाइंस ने कहा है कि फ़िल्म में हिंसा का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। अपराधियों के modus operandi को इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए जिससे दर्शकों को अपराध करने की प्रेरणा मिले। एक्शन दृश्यों पर पूरी रोक नहीं है, लेकिन उनका प्रस्तुतीकरण बोर्ड की नजर में रहेगा।
ड्रग्स से जुड़े दृश्यों के लिए अनिवार्य डिस्क्लेमर की मांग की गई है: “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No To Drugs.” यानी ड्रग्स के दुरुपयोग को दिखाते समय दर्शकों को नुकसान और कानूनी सजा की चेतावनी दिखानी होगी।
गाइडलाइंस में धार्मिक, सांप्रदायिक, अंधविश्वासी या राष्ट्र‑विरोधी विचारों को बढ़ावा देने वाले शब्दों या दृश्यों को प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही बच्चों के दुर्व्यवहार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और अनावश्यक हिंसा को भी बोर्ड सतर्क रहेगा।
सर्टिफ़िकेशन के वर्गीकरण में UA, UA 7+, UA 13+, UA 16+ और A जैसे लेबल लागू होंगे। यदि कोई फ़िल्म सभी मानकों पर खरा उतरती है परन्तु बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है, तो उसे A सर्टिफ़िकेट मिलेगा। अन्यथा, कंटेंट के आधार पर उपयुक्त उम्र‑सीमा तय की जाएगी।
फ़िल्म के टाइटल को लेकर भी नई गाइडलाइंस में कड़ी निगरानी होगी। टाइटल भड़काऊ, अश्लील या संवेदनशीलता को चोट पहुँचाने वाला नहीं होना चाहिए। हाल ही में मलयालम फ़िल्म ‘जानकी वी वर्सेज स्टेट ऑफ केरल’ के टाइटल विवाद ने इस मुद्दे को उजागर किया था।
नया बोर्ड और संशोधित गाइडलाइंस दोनों ही आने वाले समय में फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन प्रक्रिया को कड़ी नजर से देखेंगे, खासकर युद्ध, अंतरराष्ट्रीय तनाव, ड्रग्स या सामाजिक संवेदनशीलता वाले प्रोजेक्ट्स पर।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!