सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने लगभग एक दशक बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) का पुनर्गठन किया। इसमें पंकज त्रिपाठी, प्रीति जिंटा और रूपाली गांगुली जैसे फिल्म‑इंडस्ट्री के प्रमुख शामिल हैं। अब नई सर्टिफ़िकेशन गाइडलाइंस फिर से चर्चा में हैं।
नई गाइडलाइंस में उन मानदंडों को बताया गया है जिन्हें CBFC को फिल्म को थिएटर में दिखाने से पहले देखना होगा। इन नियमों में कहा गया है कि फिल्म को सामाजिक मूल्यों और मानकों के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए, जबकि सर्टिफ़िकेशन प्रक्रिया को भी सामाजिक बदलावों के प्रति सजग रहना चाहिए। हिंसा का महिमामंडन, अपराधियों के काम करने के तरीके या अपराध उकसाने वाले दृश्य व शब्द नहीं दिखाए जाने चाहिए।
गाइडलाइंस में कहा गया है कि "सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, विज्ञान‑विरोधी या राष्ट्र‑विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले दृश्य या शब्द नहीं दिखाए जाने चाहिए।" साथ ही, "फिल्मों से विदेशी देशों के साथ भारत के दोस्ताना रिश्तों पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए।"
यह प्रावधान विशेष रूप से भारत‑चीन तनाव पर आधारित फिल्मों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों ने हाल ही में रिश्ते सुधरने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
इसी संदर्भ में सलमान खान की आगामी वॉर ड्रामा “मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस” (पहले “गलवान अटैक” के नाम से) चर्चा में है। यह फिल्म 2020 की गलवान झड़प के दौरान भारत‑चीन सैन्य तनाव पर आधारित है। रिपोर्टों के अनुसार, CBFC से सर्टिफ़िकेशन मिलने में देरी हो रही है और कारण में फिल्म का चीन से जुड़ाव बताया जा रहा है।
इस पर एक सूत्र ने "गलवान की लड़ाई का जिक्र कुछ लोगों को नाराज़ कर रहा था, इसलिए अब किसी भी विवाद से बचना चाहते हैं। चीन का सीधा उल्लेख नहीं है, जैसे जब दो पड़ोसी देशों के रिश्ते सुधर रहे थे, तब पाकिस्तान को ‘पड़ोसी मुल्क’ कहा जाता था। ‘धुरंधर’ के उलट, जहाँ पाकिस्तान की भूमिका प्रमुख थी, सलमान की फिल्म ऐसा जोखिम नहीं उठा सकती क्योंकि भारत के लिए चीन की स्थिति पाकिस्तान जैसी नहीं है," कहा।
नई सर्टिफ़िकेशन फ्रेमवर्क में नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक ड्रग्स के चित्रण पर कड़ी पाबंदी है। ऐसे दृश्य के साथ कानूनी चेतावनी या डिस्क्लेमर दिखाना अनिवार्य है।
गाइडलाइंस में भावनात्मक आहत, बच्चों के शोषण, महिलाओं के खिलाफ अपराध और अनावश्यक हिंसा के चित्रण को भी रोकने की चेतावनी दी गई है।
जो फिल्में मानदंडों को पूरा करती हैं, उन्हें उनकी प्रकृति, कंटेंट और थीम के आधार पर UA, UA 7+, UA 13+, UA 16+ या A में सर्टिफ़ाई किया जाएगा। यदि कोई फिल्म नाबालिगों के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है, तो उसे केवल वयस्क दर्शकों के लिए A वर्ग में रखा जाएगा।
सार्वजनिक प्रदर्शन वाली फिल्मों के लिए बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंटेंट परिवार के साथ देखने योग्य हो, यानी सभी उम्र के दर्शक एक साथ फिल्म देख सकें। यदि माता‑पिता के मार्गदर्शन की जरूरत हो, तो UA 7+, UA 13+ या UA 16+ वर्ग में रखा जा सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में कई फिल्में CBFC के साथ टाइटल या कंटेंट में बदलाव की मांगों से जुड़ी रही हैं। नई गाइडलाइंस में टाइटल की बारीकी से जांच करने और यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया है कि वे भड़काऊ, अश्लील या आपत्तिजनक न हों।
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