खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव में शराब पीने से चार लोगों की मौत के बाद मामला लगातार गरमाता जा रहा है। दर्दनाक घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने अब पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने एसपी द्वारा गठित एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन सच्चाई सामने लाने के बजाय मामले को दूसरी दिशा में ले जाने और मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
SIT की जांच पर ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी ठोस साक्ष्य के महज एक आरोपी के बयान के आधार पर जल्दबाजी में पूरे मामले को प्रेम-प्रसंग से जोड़ दिया। उनका कहना है कि इससे न केवल जांच की दिशा भटक गई, बल्कि पूरे गांव और समाज की प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस को शराब से हुई मौतों के वास्तविक कारण और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन जांच को दूसरे मुद्दे की ओर मोड़ दिया गया।
पुलिस पर हिरासत में बंद आरोपी से फोन पर बात कराने का आरोप
ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, पुलिस हिरासत में बंद आरोपी लाली से फोन पर बात कराई गई और उसके बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि मामले में पर्याप्त ठोस साक्ष्य मौजूद थे तो सिर्फ एक आरोपी के बयान को आधार बनाकर इतनी जल्दी मामले की दिशा कैसे तय कर दी गई। इसी को लेकर ग्रामीण पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
फोरलेन पर प्रदर्शन के दौरान आवेदन नजरअंदाज करने का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक, चार लोगों की मौत के बाद जब पीड़ित परिवार और ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर फोरलेन पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन्होंने पुलिस को लिखित आवेदन भी दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उनके आवेदन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और इसके बजाय अपनी ओर से एकतरफा कहानी तैयार करने में जुटी रही। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनकी शिकायतों और सवालों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीण एसपी के तबादले से भी उठे सवाल
घटना के कुछ ही दिनों के भीतर मामले की जांच की कमान संभाल रहे ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार का प्रशासनिक विभाग में तबादला कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले की जांच के बीच पुलिस अधिकारी का तबादला होने से पहले से मौजूद संदेह और गहरा गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद उन्हें स्थानीय स्तर पर चल रही जांच की निष्पक्षता को लेकर भरोसा नहीं रह गया है।
‘पुलिस दबाव में कर रही काम’, असली गुनहगारों को बचाने का आरोप
पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस दबाव में काम कर रही है। उनका दावा है कि शराब कांड के वास्तविक गुनहगारों को बचाने के लिए मामले को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की मौजूदा जांच से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं बची है। उनका आरोप है कि मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के बजाय एक ऐसी कहानी सामने लाई गई, जिससे मूल घटना और मौतों से जुड़े सवाल पीछे छूट गए।
ग्रामीणों ने क्यों की CBI जांच की मांग?
बेढ़ना गांव के निवासियों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और एसआईटी की जांच पर उनका भरोसा नहीं रह गया है। ऐसे में वे चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सीबीआई जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई और कथित साजिश की परतें खुल सकती हैं। उनका मानना है कि स्वतंत्र जांच के जरिए शराब से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सकेगी और मृतकों के परिवारों को न्याय मिल सकेगा।
मृतकों के परिवारों को निष्पक्ष जांच का इंतजार
बेढ़ना गांव में चार लोगों की मौत के बाद से पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी निर्दोष को फंसाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना है। अब ग्रामीणों की मांग है कि शराब कांड की जांच को स्थानीय स्तर से हटाकर सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए, ताकि मामले में सामने आ रहे सभी आरोपों और सवालों की निष्पक्ष जांच हो सके और मृतकों के परिजनों को न्याय मिल सके।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!