यूपी में समय से पहले चुनाव की चर्चा के बीच चुनावी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार लखनऊ पहुंच गए हैं। उनके साथ निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधिमंडल भी लखनऊ पहुंचा है। यह दल दो दिनों तक लखनऊ में रहेगा। इस दौरान ज्ञानेश कुमार 20 जिलों के अधिकारियों के साथ ही स्कूली छात्रों, प्रिंसिपलों से संवाद करेंगे। वह 120 विधानसभा सीटों के बूथ लेवल अधिकारियों से मतदाता सूची पर बात करेंगे। लखनऊ के कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में जाएंगे। यहीं से उन्होंने पढ़ाई भी की है।
पहले दिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज सभागार में विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे। ज्ञानेश कुमार इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं। छात्रों से संवाद के बाद इंदिरागांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सोमवार की सुबह लखनऊ पहुंचने पर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लखनऊ मेरी तपोभूमि रही है, यहां मेरी शिक्षा भी हुई। हम उत्तर प्रदेश के मतदाताओं खासतौर से हमारे बूथ लेवल अधिकारी, जो लोकतंत्र की आधारशिला होते हैं, उनको कुछ बातें समझाने आए हैं। प्रदेश की जितनी यूनिवर्सिटी और स्कूल हैं, वहां चुनाव की पारदर्शिता और पूरी प्रक्रिया को समझाने के लिए भी कार्यक्रम होंगे।
निर्वाचन आयोग लखनऊ, मेरठ तथा वाराणसी में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन करेगा। पहला सम्मेलन लखनऊ में सोमवार को होगा। इसमें शाहजहांपुर, अयोध्या, बाराबंकी, सुलतानपुर, अमेठी, गोण्डा, बहराइच, मैनपुरी, कानपुरनगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज, प्रतापगढ़, लखनऊ, हरदोई, खीरी, रायबरेली, सीतापुर उन्नाव समेत 20 जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारी, डीआईओएस, मीडिया नोडल अधिकारी शामिल होंगे।
अधिकारियों के अलावा 20 जिलों की 120 विधानसभा क्षेत्रों के 440 शैक्षणिक संस्थानों के 1500 विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य शामिल होंगे। इसके साथ ही माध्यमिक, उच्च, व्यवसायिक तथा कौशल विकास, प्राविधिक, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव भी शामिल होंगे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त मंगलवार को आईजीपी में बीएलओ के साथ संवाद करेंगे। इसमें 500 बीएलओ हिस्सा लेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणदीप रिणवा ने बताया कि इसके बाद मेरठ और वाराणसी में भी क्षेत्रीय सम्मेलन होगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग, डीजी मीडिया आशीष गोयल, डीजी आीटी डॉ. सीमा खन्ना सेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी रहेंगे।
दरअसल उत्तर प्रदेश में पिछला विधानसभा चुनाव 2022 में फरवरी से मार्च के बीच सात चरणों में आयोजित हुआ था। इससे पहले 2017 में भी फरवरी-मार्च के दौरान ही चुनाव कराए गए थे। मार्च में नई सरकार का गठन होता रहा है। इस बार फरवरी में जनगणना होनी है। जगणना और चुनाव दोनों ही प्रक्रियाओं में टीचरों और सरकारी कर्मचारियों की मदद ली जाती है। ऐसे में दोनों कार्यक्रम एक साथ होना संभव नहीं दिख रहा है।
चुनाव या जनगणना में से कोई कार्य टालना मुश्किल भी माना जा रहा है। अगर टाला जाता है कि आगे स्कूल-कॉलेजों की परीक्षाओं का समय आ जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव या जनगणना में से कोई कार्य समय से पहले कराया जा सकता है। जनगणना पूरे देश में एक साथ होगी, ऐसे में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जाने की चर्चा हो रही है। प्रमुख राजनीति दलों ने अपनी तैयारियां भी तेज कर रखी हैं। दलों और नेताओं की तरफ से अपने कार्यकर्ताओं को भी इस बात का संदेश दिया जा रहा है कि चुनाव समय से पहले हो सकता है।
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