एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रिटायर्ड) राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बन गए हैं. जितेंद्र मिश्र वायुसेना के तेज-तर्रार ऑफिसर रहे हैं और 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आदमपुर में तैनात थे. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रि) ने कुछ ही दिन पहले ऑपरेशन सिंदूर की कहानी बताई थी. तब ऑपरेशन सिंदूर खत्म होने के तीन दिन बाद पीएम नरेंद्र मोदी आदमपुर पहुंचे थे.
इस मुलाकात की कहानी बताते हुए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रिटायर्ड) ने एक इंटरव्यू में कहा था, "13 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने एयरफोर्स स्टेशन आदमपुर आने का निर्णय लिया, वे वहां के सैनिकों से मिलना चाहते थे, जिन्होंने लड़ाई लड़ी थी और जीते थे, चूंकि मैं एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ था तो मैंने उन्हें रिसीव किया."
एएनआई के साथ एक पॉडकास्ट में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रिटायर्ड) ने कहा था कि एयरफोर्स चीफ उनके विमान में ही साथ आए थे. इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात की एक कहानी बताई.
राम मंदिर के नए-नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (रि) ने कहा कि वे एक बेहद रोचक घटना बताना चाहेंगे. जब प्रधानमंत्री मोदी आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे तो उन्होंने पीएम मोदी से पूछा था, "क्या मैं आपकी कार में आपके साथ यात्रा कर सकता हूं सर?"
जितेंद्र मिश्र उस घटना को याद करते हुए कहते हैं, "उन्होंने माइक्रो सेकंड भी नहीं लिया और कहां- "हां, ऑफ कोर्स, चलिए. इसके बाद के डेढ़ घंटे तक मुझे देश के अब तक के शायद सबसे बेहतरीन नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ मिला. मैं सचमुच बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे एयर फ़ोर्स स्टेशन पर उनसे डेढ़ घंटे तक बात करने और उन्हें सुनने का जीवन भर याद रहने वाला अनुभव मिला."
वायुसेना के पूर्व अधिकारी ने कहा कि एयरफोर्स स्टेशन पर हमने उन्हें ऑपरेशन की ब्रीफ दी और पूरा घटनाक्रम बताया.
जितेंद्र मिश्र ने कहा कि इसके बाद हम उन्हें S-400 साइट पर ले गए, जो हमारा मुख्य हथियार है और जिसने हवा से ज़मीन या ज़मीन से हवा में मार करने वाले 90% हमले को फेल किया. फिर उन्होंने एयरफ़ील्ड का दौरा किया. हमने उन्हें दिखाया कि हम सेना के साथ कैसे मिलकर काम करते हैं और हमारी एयर डिफ़ेंस में सेना की क्या भूमिका है. हमने उन्हें स्वदेशी हथियार सिस्टम, आकाश मिसाइल और आकाश मिसाइल से जुड़े रडार दिखाए. और जैसा कि मैंने पहले कहा, हम उन्हें उन जगहों पर ले गए जहां हवाई जहाज़ खड़े किए जाते हैं; वहां वे 25-28 साल के युवा और जोश से भरे पायलटों और कुछ एयरमैन से मिले. उन्होंने इसके बारे में जानकारी ली. मैंने उन्हें एयरक्राफ़्ट और उसके हथियार सिस्टम के बारे में सब कुछ बताया. तो मैं कहूंगा कि प्रधानमंत्री के साथ यह एक प्रेरणादायक मुलाक़ात थी.
जितेंद्र मिश्र इस मुलाकात में प्रधानमंत्री से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके. उन्होंने कहा, "सच कहूं तो एक बात जिसने मुझे बहुत हैरान किया वह यह थी कि प्रधानमंत्री के पास कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी होती है, उनके काम का दायरा कितना बड़ा होता है और उन्हें देश के हर पहलू के बारे में कैसी-कैसी ब्रीफिंग मिलती होगी. उन्हें हर चीज़ की बहुत अच्छी जानकारी थी. उन्हें सब कुछ पता था. उन्हें हथियारों के सिस्टम के नाम पता थे. उन्हें पता था कि कौन-से हथियार भारत में बने हैं और हमने क्या-क्या किया है. मैं हैरान रह गया. मुझे लगा कि मुझे उन्हें ब्रीफ करना पड़ेगा, लेकिन मुझे हैरानी हुई कि मुझे उन्हें कुछ भी ब्रीफ करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. उन्हें सब कुछ पता था."
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