लखनऊ में अखिलेश यादव और CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका के बीच डेढ़ घंटे की मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है। इस मुलाकात को लेकर विभिन्न अनुमान लगाए जा रहे थे, पर रांका ने आज स्पष्ट शब्दों में अपनी पार्टी के उद्देश्य और रणनीति बताई।
रांका ने कहा कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों और सांसदों से समय‑समय पर मिलते रहते हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि CJP अभी चुनाव लड़ने वाली पार्टी नहीं बनना चाहती, बल्कि एक Political Pressure Group के रूप में कार्य करेगी, जिससे सभी दल युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से उठाएँ।
अखिलेश यादव के साथ हुई मुलाकात को रांका ने "शिष्टाचार मुलाकात" बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई विशेष राजनीतिक समझौता नहीं हुआ और यह मुलाकात सिर्फ सामान्य संवाद थी। रांका ने यह भी जोड़ दिया कि बीजेपी के कई नेताओं से भी उनकी नियमित बातचीत होती रहती है, इसलिए इस मुलाकात को विशेष राजनीतिक महत्व नहीं देना चाहिए।
पहले सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बताया था कि रांका जंतर‑मंतर आंदोलन के दौरान सपा के समर्थन के लिए आए थे। रांका ने पुष्टि की कि उस मुलाकात में किसी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि यह केवल समर्थन व्यक्त करने का मंच था।
रांका ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी बात की। उनका मानना है कि सत्ता हासिल करना लक्ष्य नहीं, बल्कि हिंदु‑मुस्लिम, जाति और पहचान की राजनीति को हटाकर मुद्दा‑आधारित राजनीति लाना है। वे चाहते हैं कि शिक्षा, बेरोजगारी, संस्थानों की विश्वसनीयता जैसे वास्तविक मुद्दे राजनीति का केंद्र बनें।
यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता शिक्षा या बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, तो CJP उनसे मिलने को तैयार है। लेकिन रांका ने दोहराया कि उनका फोकस किसी एक पार्टी पर नहीं, बल्कि देश के युवाओं की लड़ाई पर रहेगा।
जब उनसे सीधे पूछा गया कि अखिलेश यादव के साथ बंद कमरे में क्या बात हुई, तो उन्होंने इसका खुलासा करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि CJP पारदर्शी आंदोलन है, पर हर मुलाकात की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं है।
UP में CJP की आगे की रणनीति के बारे में रांका ने कहा कि उनका एजेंडा वही रहेगा जो पूरे देश में है: सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार, शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना और बेरोजगारी पर ठोस कदम उठाना। चाहे चुनाव हों या न हों, ये मुद्दे ही उनका काम रहेगा।
रांका ने स्पष्ट किया कि CJP किसी भी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं के मुद्दों पर दबाव बनाने के लिए मौजूद है। उनका दावा है कि यह दबाव सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मुद्दों के लिए है, जिससे सभी दल युवाओं की मांगों को अपने एजेंडे में शामिल करें।
जंतर‑मंतर प्रोटेस्ट के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर रांका ने कहा कि कार्रवाई बहुत देर से हुई। उन्होंने मांग की कि इस मामले में एससी‑एसटी एक्ट और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाए, और यह जांचे कि क्या भारद्वाज को किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण मिला था।
अंत में रांका ने कहा कि सरकार को आंदोलन का इंतजार नहीं करना चाहिए। कई मामलों में, जैसे नीट पेपर लीक के बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, तुरंत कदम उठाने चाहिए थे। उनका मानना है कि CJP द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल संगठन की मांग नहीं, बल्कि युवाओं के गंभीर सवाल हैं, और सरकार को इन पर पहल करनी चाहिए।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!