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पीलीभीत जिले के रमपुरा नौगवां गांव में शुक्रवार शाम 20 वर्षीय अंशिका गंगवार की गोली मारकर हत्या करने का आरोपी उसका पिता अजय पाल सिंह पहले से ही आपराधिक प्रवृत्ति का बताया जा रहा है। पुलिस अभिलेखों के अनुसार बीसलपुर कोतवाली में उसके खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से एक मुकदमे में वह न्यायालय से बरी हो चुका है, जबकि अन्य मामलों का पुलिस रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। गांव में भी उसकी छवि दबंग व्यक्ति की बताई जाती है। घटना के बाद पुलिस जब गांव पहुंची तो कई ग्रामीणों ने वारदात के बारे में जानकारी होने से इन्कार कर दिया। ग्रामीणों की इस चुप्पी को आरोपी के दबदबे से जोड़कर देखा जा रहा है।
खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन करता था अजय पाल गांव में खेती-बाड़ी करता है। सामान्य तौर पर उसका परिवार गांव में ही रहता था। पुलिस की शुरुआती जांच में उसके शराब के नशे का आदी होने की बात भी सामने आई है। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि वह कई बार नशे की हालत में घर पहुंचकर विवाद करता था। शुक्रवार को भी वह खेत से घर पहुंचा और नशे की हालत में बेटी से कहासुनी के बाद उस पर तमंचे से गोली चला दी। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पास तमंचा कहां से आया और वह इसे कब से अपने पास रखे हुए था। वारदात में इस्तेमाल तमंचा आरोपी के भाग जाने के बाद उसके साथ ही है। इसकी बरामदगी के लिए भी पुलिस टीमें प्रयास कर रही हैं।
कड़े पहरे में जी रही थी, मां बोली- पढ़ाई भी छुड़वाई छात्रा की मां श्वेता गंगवार ने पुलिस को बताया कि पति उन पर कड़ी पाबंदी रखते थे और करीब 20 वर्षों से वह घर में अघोषित रूप से कैद जैसी जिंदगी जी रही थीं। बेटी पर भी पाबंदियां थीं, जिसके चलते उसकी पढ़ाई बंद करा दी गई थी। गांव के लोग भी अजय पाल के घर आने-जाने से कतराते थे। पुलिस को सूचना देने वाली युवती ने नाम और मोबाइल नंबर गोपनीय रखने का अनुरोध किया। उसका कहना था कि पहचान उजागर होने पर उसे नुकसान पहुंचाया जा सकता है। पढ़ाई में आगे थी अंशिका हत्या की शिकार हुई अंशिका गंगवार पढ़ाई कर रही थी। उसने करीब दो वर्ष पहले बीसलपुर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उसने बीसलपुर के बाला देवी रोशन लाल डिग्री कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया और पढ़ाई की।
बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसकी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रह सकी। परिजनों के अनुसार किन्हीं कारणों से अंशिका का बीए द्वितीय और तृतीय वर्ष में दाखिला नहीं कराया गया। इसके बाद वह घर पर ही रहने लगी थी। परिवार में चार भाई-बहनों में अंशिका सबसे बड़ी थी। उसके बाद अनुज, अनामिका और अंकित हैं। बरामदे से आंगन तक खून ही खून शुक्रवार शाम जिस स्थान पर अंशिका घर के लोगों के बीच मौजूद थी, वहीं कुछ देर बाद उसकी लाश पड़ी थी। हर तरफ खून फैल गया था। गोली चलने के बाद परिवार के लोग चीख-पुकार करते हुए उसे संभालने में जुट गए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। देखते ही देखते गांव में भीड़ जमा हो गई। घटना के बाद से घर में मातम पसरा है और मां समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
माथे में लगी गोली अंशिका को आरोपी पिता ने बेहद करीब से गोली मारी थी। गोली उसके माथे के बाएं हिस्से में लगी। गोली लगने से उसके सिर के साथ ही बाईं आंख को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद मौत की चिकित्सकीय स्थिति और स्पष्ट होगी। परिवार के एक सदस्य ने किया गुमराह करने का प्रयास अजय पाल के परिवार के एक सदस्य ने मीडिया वालों को गुमराह करने का प्रयास किया। बता दिया कि छात्रा ने अपने गोली स्वयं मारी है। उस सदस्य ने यह भी दलील दी कि छात्रा मानसिक रूप से बीमार थी। बीमारी से परेशान होकर उसने गोली मारी है। घर के उस सदस्य से जब गोलीकांड में प्रयुक्त तमंचे के बारे में पूछा गया तो वह कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाया।
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