हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के एक बयान ने यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पीते हैं और अगर हां तो क्या शराबबंदी वाले बिहार में भी पीते हैं? 17 अगस्त को माउंटैनमैन दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में भाषण दे रहे तेजस्वी यादव की जुबान फिसल गई थी और उन्होंने दशरथ मांझी की जगह जीतनराम मांझी का नाम ले लिया, जिसे श्रोताओं के बताने पर उन्होंने ठीक कर लिया था, लेकिन यह बात जीतनराम मांझी ने पकड़ ली।
मांझी ने तेजस्वी पर ऐसा निशाना साधा, जिससे उनके बिहार में पीने का सवाल उठ गया है। 2016 में जब नीतीश कुमार की सरकार ने पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, तब बिहार विधानसभा में विधायकों ने 30 मार्च को एकमत होकर शराब ना पीने की शपथ ली थी। विधायकों ने सदन के बाहर जनता को को भी नए कानून के मुताबिक ना पीने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया था। राज्य में तब पहली महागठबंधन सरकार और बतौर डिप्टी सीएम तेजस्वी की पहली पारी चल रही थी।
रात वाला उतरा नहीं था, इसलिए मुझे श्रद्धांजलि दे दी; तेजस्वी पर मांझी का तीखा हमला
बिहार में कुछ समय मुख्यमंत्री भी रहे जीतनराम मांझी ने तेजस्वी की जुबान फिसलने वाला वीडियो ट्वीट करते हुए मंगलवार को लिख दिया- ‘नशा शराब में होती तो नाचती बोतल। लगता है बाबू साहब का रात वाला उतरा नहीं था, इसलिए मुझे श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले वक्त में ये जनाब जीते जी अपने पिता लालू यादव एवं राबड़ी देवी को भी श्रद्धांजलि दे देंगे। नशा कुछ भी करा सकता है।’
प्रशांत किशोर को बधाई या तेजस्वी को ताना; रोहिणी आचार्या ने एक मैसेज से साधा दो निशाना
मांझी ने तेजस्वी की जुबान फिसलने को जब शराब और नशा का एंगल देकर तीखे आरोप लगा दिए तो बचाव में बहन रोहिणी आचार्या कूदीं। लालू यादव की पार्टी और परिवार में तेजस्वी से अलग चल रहीं रोहिणी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मंत्री श्रेयसी सिंह की जुबान फिसलने पर चुप रहने के लिए मांझी पर हमला बोला और उन्हें सामंतियों का गुलाम तक कह दिया। सीतामढ़ी की प्रभारी मंत्री श्रेयसी सिंह ने वहां 15 अगस्त के समारोह में महात्मा गांधी को राष्ट्रपति और जयप्रकाश नारायण को जनप्रकाश कह दिया था।
11 साल बाद RJD का राजभवन मार्च, पांच साल बाद सड़क पर पैदल कैसे चल पड़े तेजस्वी यादव?
रोहिणी आचार्या ने ट्वीट में लिखा- ‘कही बीजेपी की श्रेयसी सिंह वाला नशा तो नही किया था प्रतिपक्ष के नेता? बीजेपी की श्रेयसी सिंह पर बोलने की औकात नहीं है सामंतियों के इस गुलाम जीतनराम मांझी की? सम्मान उम्र देखकर नहीं, आचरण को देखकर दिया जाता है। पिता की उम्र का होकर भी घटिया हो, वह आदर के लायक नहीं होता।’ तेजस्वी ने मांझी के आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन मांझी का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है कि विधानसभा के नेता विपक्ष पीते हैं या नहीं, और अगर पीते हैं तो क्या बिहार के अंदर भी पीते हैं।
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