यूपी विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को लखनऊ में एक कार्यशाला में सच्चे जनप्रतिनिधि के गुण बताते हुए कहा कि अपयश मिलने के बाद भी लगातार जनता की सेवा में जुटे रहने वाला जनप्रतिनिधि ही वास्तव में सच्चा जनप्रतिनिधि होता है। उन्होंने कहा कि सामान्य नागरिक के लिए उसका जनप्रतिनिधि ही सबसे बड़ा सहारा होता है। बता दें कि हाल में राष्ट्रगान के अपमान के विवाद के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने वायरल वीडियो को भ्रामक बताते हुए लोगों से सच जानने के बाद ही आरोप लगाने की अपील की थी। उस वीडियो के जरिए महाना पर आरोप लगाया जा रहा था कि वह राष्ट्रगान चलने के बीच में ही वहां से चले गए थे। सतीश महाना ने वीडियो को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया था कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ था।
मंगलवार को उन्होंने लखनऊ के एक होटल में ‘साइबर सुरक्षा : ए डिजिटल सिक्योरिटी ब्रीफिंग फॉर लेजिस्लेटर्स’ विषय पर अपनी बात रखी। इसमें उन्होंने एक तरह से नेताओं को सीख दी। महाना ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि समाज के लिए पूरे दिन मेहनत करता है लेकिन सोशल मीडिया पर दो -चार नेगेटिव कमेंट्स से वो हताश हो जाता है। इस बात का हमेशा ध्यान रखिए कि ऐसे नकारात्मक कमेंट्स से हताश होने की आवश्यकता नहीं है। आप जनता की सेवा करते रहिए। आपकी सेवा का मूल्यांकन जनता को करना होता है। सतीश महाना ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनता के सुख-दुःख में उसके साथ खड़ा रहना और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयास करना भी उसकी जिम्मेदारी है। जनसेवा के इस दायित्व को पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र बेहद चुनौतीपूर्ण है और पिछले चार वर्षों में विधानसभा के सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी निष्ठा से काम किया है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि विधानसभा चुनाव करीब हैं। ऐसे में सभी सदस्यों को संयम और मर्यादा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। राजनीतिक जीवन में परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि का जनता के प्रति दायित्व सदैव बना रहता है। इसलिए सभी सदस्यों को लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादाओं और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए काम करना चाहिए। इस मौके पर साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे ने साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा, डिजिटल खतरों तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपायों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधियों को अपने मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों तथा सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा को लेकर विशेष रूप से सजग रहना चाहिए। किसी भी उपकरण या निजी जानकारी का दुरुपयोग किया जा सकता है, इसलिए जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा, डिजिटल खतरों तथा सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों के साथ साइबर और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा में हुए विभिन्न नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में तकनीक और साइबर सुरक्षा की जानकारी हर जनप्रतिनिधि के लिए जरूरी है। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विधायिका और इंटरनेट से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए तकनीक के दुरुपयोग को रोकने तथा डिजिटल व्यवस्था में आवश्यक सुधारों पर बल दिया। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने भी साइबर और डिजिटल सुरक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त रखे।
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