उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक कई जिलों में छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के सड़क पर उतरने और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करने से शासन प्रशासन गंभीर हो गया है। एक तरफ देर रात समाज कल्याण निदेशालय दोबारा खोला गया और दोबारा पहले वाली शर्तों के अधीन टीचरों को ज्वाइन कराने के आदेश जारी किए गए। दूसरी तरफ जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को इसे लेकर निर्देश जारी किए जा रहे हैं। ऐसा ही आदेश आगरा में जारी हुआ है। जेन अल्फा के बच्चों की पढ़ाई और उनकी जरूरतों को समझने के लिए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी स्कूलों का दौरा करेंगे। इस दौरान अधिकारी बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को जानेंगे।
अधिकारियों की विजिट का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति को परखना होगा। यही नहीं उन्हें पढ़ाएंगे भी। इससे पता चलेगा कि आम दिनों में स्कूल में पढ़ाई का स्तर क्या है।
प्रदेश सरकार जल्द ही युवाओं को लेकर एक नई पॉलिसी बनाने जा रही है। इसे उसी क्रम में देखा जा रहा है। इस तरह की कवायद से काफी डिटेल प्राप्त हो जाएगी, जिससे भविष्य में जेन अल्फा को होने वाली किसी भी परेशानी को दूर करते हुए उनकी जरूरतों को भी पूरा किया जा सकेगा। सरकार चाहती है कि जेन अल्फा के बारे में अधिकारी मौके पर जाकर जानकारियां जुटाएं। इसी को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी स्वयं स्कूलों में जाकर जेन अल्फा से संवाद करेंगे। उससे सही तस्वीर निकलकर आएगी। शिक्षकों के बारे में भी सही रिपोर्ट जेन अल्फा से प्राप्त हो सकेगी।
स्कूलों में संवाद के दौरान बच्चों से पढ़ाई के स्तर, शिक्षण व्यवस्था, खानपान, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों के बारे में जानकारी ली जाएगी। अधिकारी यह भी समझने का प्रयास करेंगे कि बच्चों को स्कूल में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और उनकी पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए किन संसाधनों की जरूरत है। पढ़ाई के अलावा खेलकूद और जेन अल्फा के मानसिक स्तर को विकसित करने के लिए और क्या-क्या गतिविधियां शुरू कराईं जा सकती हैं। इन सभी की जानकारी जुटाई जाएगी।
विजिट के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को दर्ज कर उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे। इससे स्कूलों में बच्चों के अनुकूल माहौल तैयार करने और उनकी जरूरतों के मुताबिक व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है। डीएम-सीडीओ की यह पहल बच्चों से सीधे जुड़कर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी को देखते हुए जिलाधिकारी स्वयं जेन अल्फा से संवाद करने की शुरुआत भी कर चुके हैं।
आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल के अनुसार मैं समय-समय पर स्कूलों में जाकर बच्चों से संवाद करता रहता हूं। ऐसा करने से बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। साथ ही उनसे संवाद कर उन्हें भी नई जानकारी देता रहता हूं। जिससे उनका बौद्धिक विकास हो सके। शासन स्तर से निर्देश प्राप्त हुए थे। जेन अल्फा के बारे में जानकारी की। उनसे संवाद किया। जो जानकारियां प्राप्त करनी थीं। उनके बारे में उनसे संवाद कर जाना। भविष्य में अन्य अधिकारियों को भी जेन अल्फा की समस्याओं को जानने और समझने के लिए भेजा जाएगा।
उधर, समाज कल्याण विभाग के आधीन संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के अंशकालिक शिक्षकों के बहाली के आदेश जारी कर दिए गए हैं।सर्वोदय विद्यालय में शिक्षकों की कमी तथा अन्य समस्याओं को लेकर पिछले दिनों मोहान रोड के बच्चों ने रोड जाम कर दिया था। पहले बालक वर्ग के स्कूल के बच्चे सड़क पर उतरे फिर छात्राएं भी सड़क पर आ गईं। पहले दिन जब छात्रों ने मोहान रोड जाम किया तो समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण भी फंस गए। वह उसी रास्ते से कन्नौज जा रहे थे। समाज कल्याण मंत्री ने छात्रों को समझा कर शांत कराया और वापस विद्यालय भेजा। इसके बाद छात्राएं भी सड़क पर उतर आईं तो मामला गंभीर हो गया। गूंज शासन स्तर तक पहुंची।
लंबी मंत्रणा के बाद तय किया गया कि पहले तैनात रहे अंशकालिक बुलाकर दोबारा ज्वाइन करा लिया जाए। रात में ही यह मौखिक सूचना विद्यालयों तक पहुंच गई थी लेकिन लिखित आदेश जारी नहीं हुआ था। देर रात समाज कल्याण मंत्री के हस्तक्षेप के बाद दोबारा निदेशालय खोला गया और लिखित आदेश जारी किया गया। जिलों तक आदेश पहुंचने के बाद कई जगह अंशकालिक शिक्षकों ने ज्वाइन कर लिया तथा कई जगह यह प्रक्रिया अगले दिन तक जारी रहेगी। प्रधानाचार्य स्तर पर पूर्व में तैनात रहे अंशकालिक शिक्षकों को सूचना दे दी गई है। शिक्षक अपनी सुविधा के मुताबिक पदभार ग्रहण करेंगे।
यूपी में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के सरकारी और निजी स्कूलों से संबंधित भ्रामक सूचनाएं सोशल मीडिया पर जानबूझकर पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया हैंडलर्स पर पैनी नजर रखी जाएगी। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से सभी मंडलायुक्तों व डीएम को निर्देश दिए हैं कि जिलों में डीएम के सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से तथ्यात्मक जवाब दिया जाए।
मुख्य सचिव की ओर से बुधवार को बेसिक व माध्यमिक स्कूलों में अवस्थापना सुविधाएं सुदृढ़ करने, साफ-सफाई करने और विद्यार्थियों व अभिभावकों के साथ नियमित संवाद किए जाने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों में स्षष्ट रूप से लिखा गया है कि सोशल मीडिया, मास मीडिया व अन्य किसी माध्यम से प्राप्त किसी भी तरह की शिकायत की तत्काल जांच कर प्रमाणिक व तथ्यात्मक स्थिति डीएम के सोशल मीडिया के माध्यम से प्रस्तुत की जाए।
जानबूझकर भ्रामक सूचनाएं डालने वाले सोशल मीडिया हैंडलर्स पर नजर रखी जाए और उनका खंडन किया जाए। सरकारी स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए। सरकारी माध्यमिक स्कूलों में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से सुविधाओं में वृद्धि हुई है। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में छात्रों को पाठ्य-पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूता-मोजा व स्कूली बैग इत्यादि की शत-प्रतिशत धनराशि अभिभावकों के खाते में पहुंचे और इसका खरीदा जाना भी सुनिश्चित किया जाए। दूसरे विभागों से समन्वय कर सुविधाओं को बढ़ाया जाए। शिक्षकों व विद्यार्थियों की उपस्थिति पर सख्ती की जाए। फिलहाल स्कूलों में व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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