बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेता इमरान खान को बिना शर्त माफी मांगने के बाद एक स्पष्ट लिखित अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि वह OCI कार्डधारक हैं, इसलिए भारतीय नागरिक की तरह व्यवहार नहीं कर सकते और SIR (Stop India Repression) जैसे विदेशी विरोध में भाग नहीं ले सकते।
सत्र के वरिष्ठ न्यायाधीश एम.सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना ने यह रिमाइंडर किया कि अगर कोई भारतीय नागरिक विदेश में विरोध प्रदर्शन में भाग लेता, तो उसे तुरंत अगली फ्लाइट से देश वापस भेज दिया जाता। इस तुलना को कोर्ट ने इमरान के मामले में लागू किया।
इमरान खान के वकील वेंकटेश धोंड ने बताया कि उनका मुवक्किल का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसलिए उसे जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिली है, पर उसने अपना पूरा जीवन भारत में बिताया है। 2006 में उसे OCI कार्ड मिला, इससे पहले वह PIO कार्डधारक थे।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि OCI कार्डधारक को भारतीय नागरिकता नहीं दी जा सकती और इसलिए उन्हें देश के भीतर किसी भी विरोध‑प्रदर्शन में भाग लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इमरान से पूछा कि वह भारतीय नागरिकता क्यों नहीं ले लेते, जबकि वह यहाँ कई वर्षों से रह रहे हैं और बॉलीवुड में एक स्टार बन चुके हैं।
इमरान खान ने हलफनामा देते हुए कहा, “मैं भविष्य में किसी भी विरोध‑प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लूँगा और न ही किसी को ऐसा करने के लिए प्रेरित करूँगा। मेरा भारत और उसके संविधान के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान है।” उन्होंने दोहराया कि उनका जीवन, पेशा और जुड़ाव पूरी तरह से इस महान देश से है।
FRRO द्वारा जारी “लीव इंडिया” नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस अंडरटेकिंग को स्वीकार किया। पिछले हफ्ते मुख्य न्यायाधीश ने उस नोटिस पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
FRRO के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने इमरान के बयान को अस्वीकार करते हुए कहा कि उनके सोशल‑मीडिया पोस्ट और एक इंटरव्यू से स्पष्ट है कि उन्होंने पहले भी कई विरोधों में भाग लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी नागरिक का केवल माफी माँगना पर्याप्त नहीं है।
वकील धोंड ने तर्क दिया कि इमरान इस मामले में नए हैं और उन्हें विरोध‑प्रदर्शन के संभावित परिणामों की पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि भारतीय नागरिकता के संबंध में बेंच की टिप्पणी पर उनका क्लाइंट आगे निर्देश देगा।
बेंच ने ASG को बताया कि OCI कार्डधारक को देश में किसी भी विरोध‑प्रदर्शन में भाग लेने का अधिकार नहीं है और भारत की संप्रभुता के तहत विदेशी नागरिकों को बाहर निकालने की पूरी शक्ति है। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत का भी उल्लेख किया, यह रेखांकित करते हुए कि इमरान ने अब लिखित अंडरटेकिंग दे दी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एक सेलिब्रिटी के सार्वजनिक बयानों के नतीजे होते हैं और इमरान की पहचान भारत और महाराष्ट्र की ही देन है। इमरान खान को अभी भारत छोड़ने से मिली राहत कायम है और अगली सुनवाई 7 दिसंबर को निर्धारित है।
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