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प्रयागराज शहर में बारिश के बाद जलभराव से बिगड़े हालात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या का स्वत: संज्ञान लेकर कायम जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। इसी दौरान 18 अगस्त को दाखिल एक अन्य जनहित याचिका को भी इसी मामले से जोड़ दिया गया। अब दोनों मामलों की सुनवाई साथ होगी।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष प्रयागराज के नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उन्होंने अदालत में हलफनामा दाखिल कर नगर निगम की ओर से तैयार कार्ययोजना पेश की। हालांकि, अदालत ने केवल कागजी कार्ययोजना तक सीमित रहने के बजाय प्रभावित क्षेत्रों में ठोस और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि जलभराव से प्रभावित सभी क्षेत्रों की एरिया वाइज जल निकासी व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए। साथ ही जलभराव वाले इलाकों में जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए तत्काल सैनिटाइजेशन और स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
चार दिन की बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल
प्रयागराज में चार दिन तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, अलोपीबाग, बैरहना, प्रीतम नगर समेत शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया। पॉश इलाकों में भी घरों और सड़कों पर पानी भरने के बाद प्रशासन की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इसी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जनहित याचिका कायम की। बुधवार को प्रयागराज के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त अदालत में पेश हुए थे। गुरुवार को भी नगर आयुक्त ने अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जलभराव से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी दी।
तत्काल नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया कि समस्या का समाधान केवल बारिश के दौरान पंप लगाकर पानी निकालने तक सीमित नहीं रह सकता। अदालत ने स्थायी जलनिकासी व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान पर जोर देते हुए राज्य सरकार को ठोस और व्यापक योजना तैयार कर अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। मामले में अदालत की सहायता के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। वह मामले से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं में अदालत की सहायता करेंगे।
2014 के आदेशों का भी उठा मुद्दा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह भी अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में जलभराव की मौजूदा स्थिति अभूतपूर्व है। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 2014 में भी जलभराव की समस्या को लेकर जनहित याचिका दाखिल हुई थी और उस समय हाईकोर्ट ने प्रशासन को समस्या के समाधान के लिए सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन उन आदेशों पर अपेक्षित अमल नहीं हुआ।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस बार भारी बारिश के बाद शहर में हजारों घर पानी से घिर गए। उन्होंने वर्ष 2006 में जलसंचयन के लिए चिह्नित तालाबों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कई तालाबों को पाट दिया गया, जिसका खामियाजा अब शहर को जलभराव के रूप में भुगतना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
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