यूपी की लोकप्रिय आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे क्रेसी, सियासत और आम जनता के बीच तमाम लोगों को हैरान कर दिया है। राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात आईएएस दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर देवरिया में भी खूब चर्चा हो रही है। दिव्या मित्तल देवरिया में करीब दो साल तक डीएम रहीं। उनके अचानक इस्तीफा देने को लेकर यहां हर कोई हैरान है। जिले में प्रशासनिक अमलों से लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ दो टूक बात और सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों तक उनकी कार्यशैली की चर्चा हो रही है। अचानक उनके इस्तीफे की घोषणा के बाद इंटरनेट मीडिया पर वह जिले में छा गई हैं। इसके पहले जब वह देवरिया की डीएम थीं तब उनके काम के अंदाज से आम लोग ही नहीं कर्मचारी और अफसर भी हैरान रहा करते थे। उनके इस्तीफे के बाद एक वाकये की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।
देवरिया की डीएम के रूप में कुछ महीने तक काम करने के बाद दिव्या मित्तल रुद्रपुर और बरहज क्षेत्र में बाढ़ के हालात का जायजा लेने पहुंची थीं। उस समय तेज धूप थी। वह अधिकारियों के साथ निरीक्षण कर रही थीं। इसी दौरान एडीएम ने उनसे तेज धूप की बात कहते हुए बैठकर बात करने को कहा। इस पर डीएम ने कहा कि ‘अरे यार धूप ही तो है, रुको पिघल थोड़े जाएंगे। ‘उनका ‘धूप ही तो है, पिघल थोड़े जाएंगे’ वाला अंदाज लोगों को खूब पसंद आया। सोशल मीडिया पर वीडियो को उनकी बेबाक और जमीन पर जाकर काम करने वाली शैली से जोड़कर देखा गया। इसके बाद सलेमपुर तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस में भी वह तेवर में दिखीं। जनता की फरियाद सुनने के बाद काम में लापरवाही की बात सामने आने पर उन्होंने एक लेखपाल को तत्काल सस्पेंड कर दिया। कानूनगो को भी नोटिस जारी किया गया। वह वीडियो भी सोशल मीडिया में छाया रहा।
2024 में अधिवक्ताओं के आंदोलन के चलते यहां तैनात रहे डीएम अखंड प्रताप सिंह का ट्रांसफर हो गया था। इसके बाद 14 जुलाई 2024 को देवरिया की डीएम के रूप में आईएएस दिव्या मित्तल ने कार्यभार संभाला। करीब दो साल बाद छह मई 2026 को उनका तबादला राजस्व विभाग कर दिया गया। उनकी जगह पर आईएएस मधुसूदन हुल्गी को देवरिया का डीएम बनाया गया। बरहज तहसील के अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह की मृत्यु के मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर प्रशासन पर सवाल उठे थे। बाद में उनके तबादले के पीछे की वजहों के रूप में इस प्रकरण की भी चर्चा रही। लेकिन शासन की तरफ से इसको लेकर कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
तीन जुलाई 2025 को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल का बयान काफी सुर्खियों में रहा। उस बैठक में बरहज के विधायक दीपक मिश्र शाका ने एक महिला शिक्षिका के वेतन से जुड़े मामले को उठाया था। तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने मामले को निराधार बताते हुए सदर बीआरसी में तैनात सहायक लेखाकार के तबादले को लेकर विधायक पर दबाव बनाने का आरोप लगाया था। मामला बढ़ता देख बैठक में मौजूद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने माहौल शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने बीएसए से कहा था कि यदि तबादले में कोई तकनीकी अड़चन नहीं है तो उसे निरस्त कर दिया जाए। इसी दौरान तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल ने शासनादेश का हवाला देते हुए सदन में कहा था कि किसी भी जनप्रतिनिधि को किसी अधिकारी पर तबादले के लिए दबाव बनाने का अधिकार नहीं है। जिसके बाद जिले में बड़ा राजनीतिक बखेड़ा हुआ था।
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