सात बार प्रतिनियुक्ति का अभूतपूर्व विस्तार, लगातार साढ़े पांच वर्षों तक मुरादाबाद मंडल के शीर्ष प्रशासनिक पद पर एकाधिकार और रामपुर की सियासत का भूगोल बदलने वाली छवि...। मूल कैडर सिक्किम लौटने से पहले आईएएस आंजनेय कुमार सिंह का एक्स पर एक संदेश अब उनके अगले पड़ाव को लेकर प्रशासनिक और सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ रहा है। ‘यात्रा को विराम देने’ लेकिन ‘अंत न होने’ और ‘समय के किसी क्षण में फिर शुरू होने’ की बात कहने वाले इस संदेश के अपने-अपने मायने निकाले जा रहे हैं। समर्थक इसे महज विदाई नहीं, बल्कि भविष्य की नई भूमिका का संकेत मान रहे हैं, जबकि विरोधी खेमा इसे प्रशासनिक अध्याय के समापन के तौर पर देख रहा है। आन्जनेय के करीब 11 साल के यूपी प्रवास और खासकर रामपुर में आजम खां से सीधे टकराव वाली प्रशासनिक छवि के बीच उनके एक्स संदेश ने इस सवाल को और हवा दे दी है कि सिक्किम वापसी के बाद उनकी ‘यात्रा’ किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
मुरादाबाद के निवर्तमान मंडलायुक्त के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी संदेश में आन्जनेय ने लिखा कि मार्च 2021 में यह यात्रा शुरू हुई थी और अब इसे विराम देने का समय है। इसके साथ उन्होंने साफ किया कि यह यात्रा का अंत नहीं है और समय के किसी क्षण में यह फिर शुरू होगी। अंत में उन्होंने लिखा-‘अलविदा!! जिंदगी का स्वागत करते रहिए, और... किताबें पढ़ते रहिए।’ विदाई के इस संदेश को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
आन्जनेय के समर्थक उनकी वापसी को किसी नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जोड़कर चर्चा हो रही है। प्रशासनिक विशेषज्ञ इसे केंद्र में पावर कॉरिडोर्स जैसे प्रवर्तन निदेशालय, पीएमओ अथवा निर्वाचन आयोग में मिलने वाली किसी संभावित बड़ी जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके प्रशासनिक सेवा से इतर सीधे सियासी मैदान में उतरने की संभावनाओं से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि इन कयासों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। दूसरी तरफ, रामपुर का सपा खेमा आजम खां का राजनीतिक किला ढहाने वाले कड़क अफसर की रवानगी से भले फौरी राहत महसूस कर रहा हो, लेकिन ‘फिर वापसी’ के इस संकेत से उनके मन का संशय अभी मिटा नहीं है।
आन्जनेय कुमार सिंह मूल रूप से मऊ के रहने वाले और सिक्किम कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह 16 फरवरी 2015 को तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार में अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर सिक्किम से यूपी आए थे। सपा सरकार में विशेष सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन और बुलंदशहर के डीएम रहे। सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें अपर आयुक्त वाणिज्य कर और फिर जून 2018 में फतेहपुर का डीएम बनाया गया। इसके बाद फरवरी 2019 में उन्हें रामपुर का जिलाधिकारी बनाया गया।
रामपुर में उनके कार्यकाल के दौरान आजम खां से प्रशासनिक टकराव लगातार सुर्खियों में रहा। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों, सरकारी जमीन और चकरोडों पर कब्जे के आरोपों, अवैध निर्माण और अन्य मामलों में हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने इस टकराव को और गहरा किया। आजम खां को भू-माफिया की सूची में शामिल किए जाने समेत कई कार्रवाई उनके कार्यकाल में हुईं। आन्जनेय हमेशा इन कार्रवाइयों को कानून के मुताबिक बताते रहे और व्यक्तिगत दुर्भावना के आरोपों से इनकार करते रहे।
फरवरी 2019 में रामपुर के डीएम बने आन्जनेय कुमार सिंह मार्च 2021 में मुरादाबाद के मंडलायुक्त बनाए गए। इसके बाद वह लगातार साढ़े पांच साल से अधिक समय तक मंडलायुक्त पद पर रहे। उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि 14 अगस्त को समाप्त हो गई, जिसके बाद उन्हें मूल कैडर सिक्किम के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया।
आन्जनेय की यूपी में प्रतिनियुक्ति सामान्य अवधि से कहीं अधिक चली। राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्र की मंजूरी से उनकी प्रतिनियुक्ति में सात बार विस्तार हुआ और करीब 11 साल तक वह यूपी में तैनात रहे। अब प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद वह सिक्किम लौट रहे हैं। ऐसे में उनके विदाई संदेश में लिखे ‘यात्रा का अंत नहीं’ और ‘फिर शुरू होगी’ जैसे शब्दों ने उनकी अगली भूमिका को लेकर चर्चाओं को एक बार फिर हवा दे दी है।
आन्जनेय की यूपी में तैनाती को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का 2019 का बयान भी अब फिर चर्चा में है। 13 सितंबर 2019 को रामपुर में अखिलेश ने कहा था कि जिस अधिकारी पर भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया जा रहा है, उसे सपा सरकार ही सिक्किम से लेकर आई थी। वहीं आजम खां ने भी अपने राजनीतिक भाषणों में आन्जनेय पर निशाना साधा था। उनके बयानों को लेकर मुकदमे भी हुए और एक मामले में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है, जिसकी अपील न्यायालय में विचाराधीन है
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