उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की चर्चित आईएएस और देवरिया की पूर्व डीएम दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया हैं। मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। अब भाजपा नेता प्रशांत उमराव ने उनके इस्तीफे को लेकर पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा है कि रात में राहुल गांधी के मिलने के बाद इस्तीफा दिया है। ताकि एजेंडा फैलाया जा सके।
भाजपा नेता प्रशांत उमराव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘एक IAS का खूब PR हो रहा है कि इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह नहीं बताया जा कि रात के अंधेरे में राहुल गांधी से मिलने के बाद इस्तीफ़ा दिया है। ताकि यूपी चुनाव में पप्पू का एजेंडा फैलाया जा सके। सदैव राजा रहने की इच्छा थी इसलिए संयुक्त सचिव का पद रास नहीं आया। क्योंकि DM के बाद सीधा कमिश्नर बनना था।'
भाजपा नेता ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, 'आत्ममुग्धता और PR की ललक इतनी अधिक कि मोदी सरकार की हर घर जल योजना को अपना प्रयास बताकर उद्घाटन कर दिया जाता था और स्थानीय सांसद को नहीं बुलाया जाता था। क्या कारण था कि जिन जिलों में रही। वहां के किसी जनप्रतिनिधि से नहीं बनी और हर जगह राजा की तरह व्यवहार किया? अब सारे जनप्रतिनिधि तो खराब नहीं हो सकते, जिन्हें जनता ने 2-3 बार चुना हो। इनके पति प्राइवेट नौकरी करते थे, इनके राजा बनने के बाद दलाली के धंधे में आ गए। करोड़ों रुपये इकट्ठा किए, जिसमें कुछ हिस्सा इनका पीआर करने वालों को जाता रहा, इसलिए उत्तर प्रदेश के सैकड़ों IAS में से केवल एक नाम काम करता हुआ सुनाई देता था।’
दिव्या मित्तल ने इस्तीफा देने के बाद एक्स पर एक पोस्ट कर अपनी फिलिंग शेयर की। वह संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी पद पर रहने के बाद देवरिया से वर्तमान में वह यूपी सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। एक्स पर उन्होंने लिखा कि आज 13 साल की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए आईएएस से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ने के बाद लंदन में नौकरी लग गयी पर सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था।
गौरतलब है कि दिव्या मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए किया है। एमबीए के बाद लंदन में लाखों के पैकेज पर नौकरी की और फिर उसे छोड़कर देश सेवा के लिए यूपीएससी की तैयारी की। 2012 में पहले प्रयास में आईपीएस बनीं और 2013 में दूसरे प्रयास में 68वीं रैंक के साथ आईएएस बनीं। मिर्जापुर में डीएम रहते हुए उन्होंने हलिया ब्लॉक के सुदूर पहाड़ी गांव लहुरियादह में आजादी के 75 साल बाद पहली बार नल से पानी पहुंचाकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
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