स्वस्थ भोजन वातावरण के लिए नीतिगत सिफारिशें
आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के नेतृत्व में 'लेट्स फिक्स आवर फूड' (LFOF) कंसोर्टियम ने बच्चों और किशोरों में मोटापे और आहार-संबंधी गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए स्वस्थ स्कूल भोजन वातावरण, अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन पर सख्त नियमन और पैकेज के सामने पोषण लेबलिंग की सिफारिश की है। सिफारिशों में उच्च वसा, चीनी और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर कर लगाना भी शामिल है।
तीन वर्षों के बहु-विषयक अनुसंधान का परिणाम
ये सिफारिशें कंसोर्टियम द्वारा लगभग तीन वर्षों के बहु-विषयक अनुसंधान, हितधारक परामर्श और नीति संवाद का परिणाम हैं। नीति दस्तावेज, 'भारत में बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और भोजन वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता नीति कार्रवाई', को नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) एम श्रीनिवास ने यहां आयोजित LFOF प्रसार और परामर्श कार्यशाला में जारी किया।
दस्तावेज की मुख्य बातें
दस्तावेज बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ भोजन वातावरण बनाने और आहार व्यवहार में सुधार के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करता है। इसकी प्राथमिकताओं में स्वस्थ स्कूल भोजन वातावरण, पोषण साक्षरता, पैकेज के सामने पोषण लेबलिंग, बच्चों को HFSS खाद्य पदार्थों के विपणन का नियमन, HFSS खाद्य पदार्थों पर कर, नमक में कमी, स्वस्थ आहार वसा को बढ़ावा देना, कम सोडियम नमक के विकल्प, व्यवहार परिवर्तन संचार, युवा जुड़ाव और स्वस्थ आहार को प्रोत्साहित करने के लिए राजकोषीय उपाय शामिल हैं।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ भोजन वातावरण बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित, बहु-क्षेत्रीय नीतिगत कार्रवाई आवश्यक है। आईसीएमआर-एनआईएन निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा कि संस्थान उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य उत्पन्न करने और अनुसंधान को सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई में बदलने वाली साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी ने अस्वास्थ्यकर आहार के वाणिज्यिक, सामाजिक और पर्यावरणीय निर्धारकों को संबोधित करने वाले व्यापक नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया।
कंसोर्टियम के सदस्य
कंसोर्टियम में आईसीएमआर-एनआईएन, रिजॉल्व टू सेव लाइव्स इंडिया, यूनिसेफ इंडिया, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), आर्थिक विकास संस्थान, विश्व खाद्य कार्यक्रम, लेडी इरविन कॉलेज, IFPRI, डीकिन विश्वविद्यालय और कई अन्य राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय भागीदार शामिल हैं।
ज्ञान उत्पादों का शुभारंभ
कार्यशाला में कंसोर्टियम द्वारा विकसित कई ज्ञान उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया, जिनमें LFOF वेबसाइट, स्कूलों के लिए पोषण वातावरण मूल्यांकन टूलकिट (NEAT-S) और इसकी रिपोर्ट, खाद्य लेबल समझने पर ई-लर्निंग मॉड्यूल और बच्चों एवं किशोरों में पोषण साक्षरता मजबूत करने के उद्देश्य से वसा, शर्करा और नमक पर शैक्षिक संसाधन शामिल हैं।
बढ़ता मोटापा संकट
कंसोर्टियम ने कहा कि भारत आहार-संबंधी रोगों के तेजी से बढ़ते बोझ का सामना कर रहा है, जिसमें आईसीएमआर-इंडिया डायबिटीज (ICMR-INDIAB) अध्ययन के अनुसार 10 करोड़ से अधिक वयस्क मधुमेह, लगभग 31.5 करोड़ उच्च रक्तचाप और 25.4 करोड़ मोटापे से ग्रस्त हैं। लगभग 6.1 करोड़ बच्चे (5-19 वर्ष) अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जो इस आयु वर्ग की आबादी का लगभग 28.5% है। यदि वर्तमान रुझान जारी रहा, तो 2030 तक भारत में वैश्विक बाल मोटापे का 11% से अधिक हिस्सा होने का अनुमान है।
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