इज़राइल में रहने वाले अरब नागरिकों की पहचान अरब की है, जबकि उनका पासपोर्ट इज़राइल का है। अब तक वे अक्सर चुनावों से दूर रहे, लेकिन 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव में उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी। दो अरब‑नेतृत्व वाली गठबंधन मिलकर नेसेट (120 सदस्यीय संसद) में 19 सीटें जीतकर किंगमेकर बन गए।
नेसेट में सरकार बनाने के लिये 61 सीटों की जरूरत होती है। बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के पास अब 53 सीटें हैं, जबकि विपक्षी गादी आइजेनकोट के गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। अब अरब पार्टियों का समर्थन किसे मिलेगा, यही तय करेगा कि कौन प्रधानमंत्री बनेगा।
राआम (Ra'am) पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने चुनावी परिणाम देखते ही कहा, "हम यहाँ हैं, हम हाशिये पर नहीं बैठे।" उन्होंने बताया कि अरब समुदाय ने इस बार थोक में मतदान किया, जिससे उनका वोट शेयर पहले की तुलना में 60 % से अधिक बढ़ गया।
इज़राइल के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चुनाव में 8 लाख से अधिक मतदाताओं ने राआम और जॉइंट लिस्ट (Joint List) को वोट दिया। नेगेव रेगिस्तान के बेदौइन गांव से लेकर उत्तरी गैलिली के शहरों तक अरब मतदाता भारी संख्या में पहुंचे। नेगेव के ताराबिन में राआम को 93 % वोट मिले, जबकि सखनिन में 87 % मतदान दर्ज हुआ।
जॉइंट लिस्ट, जिसका नेतृत्व यूसुफ जबरीन कर रहे हैं, को 11 सीटें मिलीं। इस गठबंधन में हदाश (वामपंथी, कम्युनिस्ट जड़ें), ताआल (अरब राष्ट्रवादी) और बलाद (फ़िलिस्तीनी राष्ट्रीय पहचान) शामिल हैं। राआम को 8 सीटें मिलीं; यह पार्टी इज़राइल में सक्रिय इस्लामिक मूवमेंट की दक्षिणी शाखा से जुड़ी है, लेकिन उसकी प्राथमिकताएँ जॉइंट लिस्ट से अलग हैं। राआम फ़िलिस्तीन के मुद्दे के साथ-साथ इज़राइल के अरब नागरिकों की रोज़मर्रा की समस्याओं—अपराध, पुलिस व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, आवास और विकास—पर भी केंद्रित है।
इज़राइली अरब नागरिकों की जनसंख्या लगभग 21 % है। वे इज़राइल की नागरिकता के साथ वोट देने का अधिकार रखते हैं, लेकिन सामाजिक‑आर्थिक भेदभाव, जमीन, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से संघर्ष करते आ रहे हैं। 2018 के नेशन‑स्टेट कानून ने इज़राइल को यहूदी राष्ट्र‑राज्य घोषित किया, जिससे अरब नागरिकों के राष्ट्रीय पहचान और समान अधिकारों पर सवाल उठे।
अभी तक नेतन्याहू ने इन पार्टियों पर वोट‑चोरी और आतंकवाद समर्थन के आरोप लगाए हैं, जिससे उनका गठबंधन बनाना कठिन हो रहा है। विपक्षी नेताओं नफ्ताली बेनेट, यायर लैपिड और अविग्दोर लिबरमैन ने भी अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया है, जबकि डेमोक्रेट्स पार्टी के यायर गोलान सहयोग के पक्ष में हैं।
2021 में राआम ने बेनेट‑लैपिड सरकार को समर्थन दिया था, जिससे इज़राइल की राजनीति में एक नया precedent स्थापित हुआ था। उस समय राआम ने अरब समुदाय के लिए विकास बजट और अपराध नियंत्रण का वादा किया था।
आज, अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं, लेकिन सत्ता में शामिल होने की राह अभी भी जटिल है। यह स्पष्ट है कि इज़राइल के लंबे समय तक हाशिये पर रहने वाले अरब नागरिक अब अपनी राजनीतिक ताकत का प्रयोग करके सत्ता की दिशा निर्धारित करने की कोशिश में हैं।
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