यूपी के अलीगढ़ जिला प्रशासन और नगर निगम ने गुरुवार को बड़ी कार्यवाही करते हुए एएमयू के कब्जे से करीब 500 करोड़ की जमीन कब्जामुक्त कराई। निगम के इतिहास में इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही बताया जा रहा है। ग्राम भमोला माफी स्थित नगला पटवारी में 10 गाटा संख्या से लगभग 3.863 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा प्राप्त कर नगर निगम संपत्ति का बोर्ड लगाते हुए कब्जा ली गई संपति की तार फेंसिंग भी करा दी गयी।
नगर निगम संपत्ति विभाग की ओर से 14 अगस्त को डीएम व एसएसपी को भेजे पत्र में इस भूमि की पैमाइश एवं वायर फेंसिंग के लिए गुरुवार का दिन निर्धारित किया गया था। दोपहर करीब 12 बजे नगरायुक्त प्रेम प्रकाश मीणा की अगुवाई में एसडीएम कोल गजेन्द्र सिंह, सहायक नगर आयुक्त तपस्या यादव, एसीएम द्वितीय परितोष मिश्रा, सीओ सर्वम सिंह मय फोर्स के मौके पर पहुंचे। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार ग्राम भमौला माफी के विभिन्न गाटों में कुल 3.863 हेक्टेयर भूमि ऊसर व अन्य बंजर के रूप में दर्ज है। यह भूमि नगर निगम की निहित संपत्ति है।
नगर निगम व जिला प्रशासन द्वारा ग्राम भमोला माफी स्थित जमीन को एएमयू के कब्जे से मुक्त कराने के मामले में एएमयू इंतजामिया ने अपना पक्ष स्पष्ट किया। इंतजामिया का दावा है कि 1925 से एएमयू के स्वामित्वाधीन यह जमीन चली आ रही है। नगर निगम का दावा भ्रामक है। एएमयू के अनुसार सम्बन्धित भूमि के सभी दस्तावेज, अभिलेखीय और विधिक साक्ष्य विश्वविद्यालय के पास मौजूद हैं। 13 जून 1925 से यह भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के अन्तर्गत विश्वविद्यालय के अधिग्रहीण है और 19 नवम्बर 1940 को यूनाइटिड प्रोविन्स (उप्र का पुराना नाम) के गवर्नर ने यह भूमि एएमयू के लिए अग्रहीत की। इस प्रकार यह भूमि 1925 से विश्वविद्यालय के स्वामित्वाधीन है।
एएमयू केन्द्र सरकार के अधीन एक स्वायत शिक्षण संस्थान है। अतः इसकी सम्पत्ति केन्द्र सरकार के अधीन होती है। नगर निगम द्वारा यह भ्रामक दावा किया जा रहा है कि इस भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया। जबकि तथ्य यह है कि यह भूमि विश्वविद्यालय की सम्पत्ति है जिस पर नगर निगम द्वारा अवैध दावा किया जा रहा है। एएमयू इंतजामिया के अनुसार वर्ष 1992 में विश्वविद्यालय के राजस्व अभिलेखों में गुपचुप तरीके से हेराफेरी (छेड़छाड़) की गई थी, जो किसी भी सक्षम अधिकारी के आदेश व अनुमोदन के बिना की गई थी। ऐसे दस्तावेजों के आधार पर की गई कार्यवाही से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि नगर निगम द्वारा समस्त कार्यवाही दुराशय से की जा रही है।
एएमयू इंतजामिया के अनुसार वर्ष 2003 में इस हेराफेरी के संज्ञान में आने के बाद एएमयू द्वारा इसके दुरूस्तीकरण के लिये निरंतर प्रयास किया जा रहा है। सबसे नवीनतम प्रयास में एएमयू ने अपने राजस्व अभिलेखों में सुधार के लिए 29.03.2025 को सक्षम स्तर पर विधिवत रूप से अपना दावा प्रस्तुत किया था, जो आज भी एसडीएम कोल के यहां विचाराधीन है। चैकाने वाली बात यह है कि उन्हीं एसडीएम कोल की मौजूदगी में नगर निगम द्वारा बिना किसी वैधानिक आधार के जल्दबाजी में कार्यवाही करते हुए विश्वविद्यालय की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूर्णतः अवैध है।
संबंधित भूमि में से कुछ गाटों की करीब 2.868 हेक्टेयर भूमि को पूर्व में एएमयू के कब्जे से मुक्त कराया जा चुका है। नगर निगम की संयुक्त टीम ने 30 अप्रैल 2025 को मौके पर कार्रवाई की थी। अब शेष भूमि के साथ आसपास के उन गाटों की भी पैमाइश कराई गई, जो राजस्व अभिलेखों में ऊसर-बंजर दर्ज होने के कारण नगर निगम की निहित संपत्ति हैं। ऊसर एवं बंजर सरकारी भूमि पर नगर निगम द्वारा अपनी संपत्ति का बोर्ड व तार फेंसिंग कराकर कब्ज़ा लिया गया है।
गाटा संख्या 90/1 0.500 हे.
गाटा संख्या 92 1.094 हे.
गाटा संख्या 94 0.749 हे.
गाटा संख्या 95 0.449 हे.
गाटा संख्या 96 0.495 हे.
गाटा संख्या 98 0.081 हे.
गाटा संख्या 100 0.173 हे.
गाटा संख्या 108 0.046 हे.
गाटा संख्या 109 0.127 हे.
गाटा संख्या 106 0.149 हे.
कुल क्षेत्रफल: 3.863 हेक्टेयर।
नगर निगम की इस कार्यवाही को लेकर एएमयू के शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्रों एवं पूर्व छात्रों में गहरा रोष व्याप्त है। कुलपति प्रो. नइमा खातून ने इस घटनाक्रम को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए हर स्तर पर यथासंभव प्रयास शुरू कर दिये हैं। एएमयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वह अपनी संपत्ति एवं अभिलेखों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक वैधानिक कदम उठाएगा।
एएमयू इंतजामिया को जैसे ही गुरूवार को नगर निगम द्वारा की जा रही कार्यवाही की जानकारी मिली तो प्रोक्टर प्रो. एम नवेद खान अपनी टीम के साथ, एमआईसी प्रोपर्टी प्रो. मोहम्मद आसिफ, प्रोपर्टी आफिसर मौहम्मद आरिफ अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अपना पक्ष रखते हुए इस अनुचित कार्यवाही के लिये अपना विरोध दर्ज कराया। अमुटा के अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद एवं सचिव डा. अशरफ मतीन भी मौजूद थे।
एएमयू के अनुसार तीन जनवरी 2022 को पैमाइश के बाद छह जनवरी 2022 को तहसीलदार, कानूनगो एवं लेखपाल की संयुक्त रिपोर्ट में यह भूमि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के घुड़सवार फील्ड के नाम से दर्ज है। एएमयू प्रशासन ने नगर निगम से तत्काल इस अवैध कार्यवाही को रोकने और लंबित मामले के न्यायोचित एवं विधिसम्मत निस्तारण तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है।
एडीएम सिटी, किंशुक श्रीवास्तव ने कहा कि नगला पटवारी में भूमि से संबंधित मामले में एएमयू प्रशासन द्वारा यह संज्ञान में लाया गया है कि इस भूमि के अभिलेखों में सुधार से संबंधित एक वाद एसडीएम न्यायालय में लंबित है। इस तथ्य को संज्ञान में लेते हुए यह निर्णय लिया गया है कि एसडीएम द्वारा सभी संबंधित दस्तावेजों व अभिलेखों का अवलोकन कर गुण-दोष के आधार पर पहले इस वाद का निस्तारण किया जाएगा। जिसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
पूर्व महापौर प्रत्याशी बसपा अलीगढ़, सलमान शाहिद ने कहा कि नगर निगम अलीगढ़ द्वारा आज जिस प्रकार से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी राइडिंग क्लब की देश कीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया गया बहुत ही निंदनीय है लगता है एएमयू प्रशासन का भी नगर निगम को अवैध कब्ज़ा कराने के प्रयास मै पूर्ण समर्थन है जिसका प्रमाण है कि किसी प्रकार का कोई विरोध एएमयू प्रशासन द्वारा नहीं किया गया जो कि बहुत ही निंदनीय है एएमयू का पूर्व छात्र होने के नाते अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के साथ हूँ छात्रों एवं पूर्व छात्रों और एएमयू के शुभचिंतकों के साथ बैठक कर हर स्तर पर नगर निगम का विरोध किया जाएगा जहां भी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए जाना पड़ेगा हर तरह से तैयार हूं।
एसडीएम कोल, डॉ. गजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि जमीन कब्जा मुक्त कराकर, नगर निगम को हस्तांतरित कर दी गई है। नया पुलिस थाना उसी जगह पर प्रस्तावित है। डीएम के निर्देश पर, अन्य जमीनों को भी कब्जा मुक्त कराने का अभियान लगातार चलेगा।
नगरायुक्त, प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में कब्जा ली गई इस बेशक़ीमती ज़मीन का सदुपयोग नगर निगम द्वारा जनहित व शहरहित में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। भूमि की उपयोगिता को देखते हुए नगरीय क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस थाने की स्थापना, बच्चों के विद्यालय, इंटर कालेज, हॉस्पिटल, स्पोर्ट्स कंपलेक्स जैसे महत्वपूर्ण और जन उपयोगी प्रोजेक्ट को प्रभावी रूप देने के लिए इस संपत्ति का भविष्य में इस्तेमाल किया जाएगा। इस भूमि की अनुमानित लागत लगभग 500 करोड़ आकी गयी है।
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