मोतिहारी के रघुनाथपुर में दो युवक 100 से 200 रुपये में चादरें बेचते मिले। एक चादर पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा था। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले दोनों युवक मौके से फरार हो गए।
असम में सेना की खुफिया सूचना के आधार पर पाकिस्तानी एजेंट के आरोप में मोतिहारी निवासी अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी की चर्चा के बीच शहर में ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखी चादरें बेचने का मामला सामने आया है। रघुनाथपुर इलाके में दो संदिग्ध युवक बेहद कम कीमत पर चादरें बेचते देखे गए। चादरों पर पाकिस्तान में निर्मित होने का निशान मिलने के बाद स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद दोनों युवक मौके से फरार हो गए।
बताया जाता है कि मंगलवार को रघुनाथपुर इलाके में दो युवक घूम-घूमकर चादरें बेच रहे थे। दोनों महंगी और अच्छी गुणवत्ता वाली बताई जा रही चादरों को महज 100 से 200 रुपये में बेच रहे थे। सस्ती कीमत देखकर कई लोगों ने चादरें खरीद लीं। इसी दौरान एक स्थानीय युवक को दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं।
चादरों की जांच करने पर एक पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा मिला। कुछ अन्य चादरों पर भी इसी तरह का निशान दिखाई दिया, जबकि कुछ चादरों पर पाकिस्तान में निर्मित होने की लिखावट मिटाई गई प्रतीत हुई। इसके बाद लोगों का संदेह और गहरा गया। चादरों की कीमत, बेचने के तरीके और युवकों की गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
बताया गया कि पुलिस को सूचना मिलने के बाद लोगों से दोनों युवकों को मौके पर रोककर रखने को कहा गया था। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही दोनों युवक वहां से निकल गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों इतनी तेजी से गलियों में गायब हुए कि किसी को उन्हें पकड़ने का मौका तक नहीं मिला।
अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी बेचैनी असम में सेना की इंटेलिजेंस यूनिट से मिले इनपुट के आधार पर अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद से पूर्वी चंपारण में पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अभिषेक राजेपुर थाना क्षेत्र के सेमरहां गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। ऐसे में मोतिहारी शहर में पाकिस्तान निर्मित चादरों की बिक्री का मामला सामने आने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
हालांकि, चादर बेचने वाले दोनों युवकों और किसी संदिग्ध नेटवर्क के बीच संबंध होने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि चादरें वास्तव में पाकिस्तान में निर्मित हैं या उन पर किसी स्तर पर ऐसा लेबल लगाया गया है। पुलिस जांच के बाद ही इसकी सच्चाई सामने आएगी।
फिलहाल कई सवाल पाकिस्तान में निर्मित बताई जा रही चादरें मोतिहारी कैसे पहुंचीं? उन्हें बाजार से बेहद कम कीमत पर क्यों बेचा जा रहा था? चादरों पर पाकिस्तान का निशान क्यों था और पुलिस को सूचना मिलते ही दोनों युवक कहां गायब हो गए? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, एक चादर पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा था और इसके लिए 200 रुपये का भुगतान किया गया था।
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