अमेरिका में इस साल मिडटर्म चुनाव हो रहे हैं, जो राष्ट्रपति पद के दो साल बाद आयोजित होते हैं। इन चुनावों से यह तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों – सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स – में किस पार्टी को बहुमत मिलेगा, और अगले दो साल में विधायिका कैसे काम करेगी।
इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रम्प की घटती लोकप्रियता का असर रिपब्लिकन पर पड़ेगा या नहीं। महंगाई, स्वास्थ्य‑सेवा की बढ़ती लागत और फ़रवरी में शुरू हुए ईरान‑संघर्ष को लेकर डेमोक्रेट्स लगातार रिपब्लिकन पर सवाल उठाते आ रहे हैं।
पहले ट्रम्प के लिए वोट करने से रिपब्लिकन को फायदा हुआ था, लेकिन अब उनकी जॉब अप्रूवल रेटिंग लगभग 39 % तक गिर गई है, जबकि 61 % लोगों ने उन्हें डिसअप्रूव किया है। महंगाई और ईरान‑संघर्ष को लोकप्रियता में गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है, जिससे कई मतदाता मानते हैं कि अमेरिका गलत दिशा में जा रहा है।
इन कारणों से अनुमान लगाया जा रहा है कि रिपब्लिकन हाउस में अपना बहुमत खो सकते हैं और सीनेट में भी उन्हें झटका लग सकता है। इसका सीधा असर ट्रम्प की पार्टी को पड़ेगा।
दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स दोनों सदनों पर कब्जा करने की कोशिश में हैं। कई भरोसेमंद पोल्स में डेमोक्रेट्स के लिए ब्लू वेव की संभावना दिख रही है। कुछ सर्वेक्षणों में उनके लिए हाउस में 250 तक सीटें और सीनेट में 53‑54 सीटें हासिल करने का अनुमान है।
हालाँकि, पोलिंग में रिपब्लिकन वोटर अक्सर जवाब नहीं देते, जबकि डेमोक्रेट्स के समर्थक सर्वे में अधिक सक्रिय होते हैं। इसलिए वास्तविक परिणाम चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा।
रिपब्लिकन पार्टी की मुख्य ताकत उसकी कंज़र्वेटिव विचारधारा और "अमेरिका फर्स्ट" नीति है, जो 2024 के चुनाव में उन्हें जीत दिलाई थी। लेकिन ट्रम्प के आर्थिक फैसलों के बाद महंगाई, गैस‑डीज़ल की कीमतों में उछाल और ईरान‑संघर्ष ने पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर की है।
फिर भी, पार्टी के MAGA समर्थकों का ट्रम्प के प्रति भरोसा अभी भी मजबूत है, जो उन्हें चुनाव में कुछ हद तक मदद कर सकता है।
डेमोक्रेट्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने वोटरों को मतदान केंद्र तक लाना और स्वतंत्र मतदाताओं का भरोसा जीतना है। 2016 में कई समर्थकों ने पोल्स पर भरोसा करके मतदान नहीं किया, जिससे परिणाम प्रभावित हुए। इस बार उन्हें इस गलती से बचना होगा।
यदि रिपब्लिकन दोनों सदनों में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प व्हाइट हाउस में बने रहेंगे, लेकिन कांग्रेस की निगरानी बढ़ेगी। विदेश नीति, टैरिफ और ट्रेड पॉलिसी जैसे मुद्दों पर उनका नियंत्रण अभी भी रहेगा, क्योंकि ये एग्जीक्यूटिव शाखा के अधिकार में आते हैं।
हालांकि, घरेलू नीति में उन्हें डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करना पड़ेगा। पिछले दो साल में ट्रम्प ने बड़े बिल कम पास कराए हैं; अब अगर वे बड़े सामाजिक सुधार या बजट‑रिकंसिलिएशन बिल लाना चाहते हैं, तो कांग्रेस की सहमति जरूरी होगी।
सारांश में, मिडटर्म चुनाव रिपब्लिकन की शक्ति को पुनः परिभाषित करेगा। यदि वे हाउस और सीनेट दोनों में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प की विदेश‑नीति पर असर कम होगा, पर घरेलू एजेंडा को आगे बढ़ाना कठिन हो जाएगा।
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