उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग 15 सितंबर से बड़ा अभियान चलाने वाला है। प्रदेश के सभी बिजली निगमों में यह अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का मकसद होगा बिजली सप्लाई के ढांचे को दुरुस्त करना। इसके लिए 15 सितंबर से एक महीने का यह विशेष अभियान चलेगा। 14 अक्तूबर तक चलने वाले इस अभियान में टीमें गली-मोहल्लों में निकलेंगी। बार-बार बिजली सप्लाई ब्रेक होने के कारणों की पड़ताल करके उनकी दिक्कतें दूर की जाएंगी। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने इस मामले में विस्तार से आदेश जारी किए हैं।
डॉ. गोयल ने कहा कि गर्मी ज्यादा तापमान, बारिश की वजह से बार-बार आ रहीं फॉल्ट, बढ़े बिजली भार, आंधी आदि वजहों से वितरण तंत्र के विभिन्न उपकरणों पर दबाव पड़ा है। कई क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर, फीडरों, 33केवी और 11 केवी लाइनों, एलटी लाइनों और अन्य उपकरणों में खराबियां हुई हैं। आपूर्ति में बार-बार व्यवधान हो रहा है। त्योहारों में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिले, इसके लिए विशेष मरम्मत अभियान चला कर कमियों को दूर किया जाए। 15 सितंबर से 14 अक्तूबर तक विशेष अनुरक्षण माह में इन दिक्कतों को दूर किया जाएगा। इस दरम्यान वितरण तंत्र में मौजूद वास्तवित कमियों को दूर करके बिजली व्यवधान, फीडर ट्रिपिंग और बार-बार ट्रांसफॉर्मर फुंकने की घटनाओं में वास्तविक कमी लाई जाएगी। जर्जर तारों, ढीले कनेक्शनों और क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदला जाएगा। प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों में जाकर इस दौरान औचक निरीक्षण के भी निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, मध्यांचल विद्युत निगम के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर मिले उपभोक्ता फीडबैक की समीक्षा बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जनसमस्याओं के निस्तारण में घोर लापरवाही बरती जा रही है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों ने कुल 18,957 शिकायतों का बिना किसी जमीनी समाधान के ही फर्जी निस्तारण दर्ज कर दिया। कागजी खानापूरी के इस खेल में अमौसी जोन के उपभोक्ता सबसे अधिक परेशान और खफा नजर आए।
ज्यादातर मामलों में विभागीय कर्मियों ने उपभोक्ताओं से बिना कोई संपर्क किए और बिना तकनीकी खराबी दूर किए ही शिकायतों को पोर्टल पर क्लोज (बंद) दिखा दिया। इस फर्जीवाड़े से नाराज उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मजबूरी में शिकायतें दोबारा ‘रि-ओपन’ करानी पड़ीं। आंकड़ों के मुताबिक, अमौसी जोन में सबसे ज्यादा 6,892 मामले रि-ओपन हुए हैं, जो यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में शिकायतों को लेकर लीपापोती की गई है। जानकीपुरम जोन में 6,014 और गोमतीनगर जोन में 5,927 मामले दोबारा दर्ज किए गए। लखनऊ सेंट्रल जोन की स्थिति बेहतर रही, 124 शिकायतें ही रि-ओपन हुई हैं।
उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों में मुख्य रूप से अनियोजित बिजली कटौती, सप्लाई में खराबी, गलत और बढ़े हुए बिजली बिल, मीटर से जुड़ी तकनीकी कमियां तथा नए स्मार्ट मीटरों से उत्पन्न आ रही परेशानियां शामिल हैं। निगम स्तर पर हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद जब उपभोक्ता से फीडबैक लिया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना निस्तारण के ही केस क्लोज दिखाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों ने लापरवाही बरतने वाले अफसरों और कर्मियों को चेतावनी देते हुए सभी रि-ओपन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शी समाधान करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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