उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद अब उनकी पोस्टिंग को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है. दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के साथ सोशल मीडिया पर एक लंबा और भावुक संदेश लिखा. इस संदेश में उन्होंने अपनी पूरी प्रशासनिक यात्रा को याद किया, लेकिन कई जिलों में काम करने के बावजूद दो जगहों का नाम विशेष रूप से लिया देवरिया और मिर्जापुर.
मेरठ से शुरू हुई प्रशासनिक जिम्मेदारियां
पोस्टिंग रिकॉर्ड के मुताबिक दिव्या मित्तल की शुरुआती तैनाती मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हुईं. मेरठ में उन्होंने 27 नवंबर 2015 को ज्वाइन किया और 2 मई 2017 तक इस जिम्मेदारी में रहीं. इसके बाद 3 मई 2017 को उन्हें गोंडा में CDO की जिम्मेदारी मिली. गोंडा में उनका कार्यकाल करीब एक साल रहा. 17 अप्रैल 2018 को उनकी अगली पोस्टिंग कानपुर नगर में हुई, जहां उन्हें UPSIDC की जिम्मेदारी दी गई. यानी शुरुआती दौर में ही दिव्या मित्तल की पोस्टिंग केवल जिला प्रशासन तक सीमित नहीं रही. उन्हें विकास और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिलीं.
कानपुर से बरेली विकास प्राधिकरण तक
कानपुर नगर के बाद 15 फरवरी 2019 को दिव्या मित्तल ने बरेली विकास प्राधिकरण का वाइस चेयरमैन की कुर्सी मिली. यहां करीब डेढ़ साल बाद उनकी पोस्टिंग एक बार फिर जिला प्रशासन की ओर हुई. 11 सितंबर 2020 को दिव्या मित्तल ने संत कबीर नगर की डीएम के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. यह पोस्टिंग उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रही. यहां से उनकी पहचान जिला स्तर पर प्रशासन की कमान संभालने वाली अधिकारी के रूप में और मजबूत हुई. करीब दो साल बाद 17 सितंबर 2022 को उनका तबादला मिर्जापुर कर दिया गया. और यही वह जगह है जिसका जिक्र उन्होंने बाद में अपने इस्तीफे के संदेश में बेहद खास अंदाज में किया.
मिर्जापुर को लेकर क्यों भावुक हुईं दिव्या मित्तल
मिर्जापुर में दिव्या मित्तल की पोस्टिंग करीब एक साल रही. 17 सितंबर 2022 से 1 सितंबर 2023 तक वह मिर्जापुर की DM रहीं. इस्तीफा देते समय उन्होंने अपने अनुभवों को याद करते हुए लिखा कि “मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है. उन्होंने इसी संदेश में मां विंध्यवासिनी का भी जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर उन्होंने सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है. अपने इस्तीफे में उन्होंने लहुरियादह की पहाड़ी की एक वृद्ध महिला का भी जिक्र किया. दिव्या मित्तल के मुताबिक उस गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर वह बुजुर्ग महिला कुछ नहीं बोलीं, बल्कि कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दिया. दिव्या मित्तल के लिए वह क्षण किसी सरकारी पद या उपलब्धि से बड़ा बन गया. उन्होंने साफ लिखा कि पद भले ही छूट गया, लेकिन वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा. यही वजह है कि इस्तीफे की पोस्ट में मिर्जापुर का नाम आते ही उनके इस कार्यकाल की यादें फिर चर्चा में आ गईं.
मिर्जापुर के बाद लखनऊ और देवरिया
मिर्जापुर के बाद 4 सितंबर 2023 को दिव्या मित्तल को प्रतीक्षारत किया गया. इसके बाद 1 फरवरी 2024 को उन्हें लखनऊ में CEO, UPRRDA की जिम्मेदारी दी गई. लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनकी फिर जिला स्तर पर वापसी हुई. 13 जुलाई 2024 को दिव्या मित्तल को देवरिया का DM बनाया गया. देवरिया में उन्होंने करीब पौने दो साल तक जिलाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 6 मई 2026 को उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के Revenue Department में Special Secretary बनाया गया और उनकी पोस्टिंग लखनऊ हो गई. यही उनकी आखिरी दर्ज तैनाती रही.
देवरिया का नाम भी इस्तीफे में क्यों आया
दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के संदेश में मिर्जापुर के साथ देवरिया को भी विशेष तौर पर याद किया. उन्होंने लिखा कि देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है. यह सिर्फ एक जिले का नाम लेने भर की बात नहीं थी. उन्होंने अपनी पूरी प्रशासनिक सेवा के दौरान मिले अनुभवों को लोगों से जोड़कर देखा. उन्होंने लिखा कि उनके लिए सबसे बड़ी सीख यह रही कि अपने लिए देखे गए सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे गए सपनों को जीना था. उनके मुताबिक इस जीवन का असली सुकून उन लोगों की आंखों में दिखा, जिनके परिवार को पहली बार जमीन का हक मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत तक पानी पहुंचा. यही सोच उनके इस्तीफे के संदेश में बार-बार दिखाई देती है.
दिव्या मित्तल ने तोड़ी चुप्पी
खुद दिव्या मित्तल ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया है कि उनका यह कदम किसी दबाव या ट्रिगर मोमेंट का नतीजा नहीं, बल्कि बेहद सोच-समझकर लिया गया फैसला है. इस्तीफे की वजहों पर बात करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि यह कोई जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है. उन्होंने कहा, आईएएस की नौकरी मेरे जीवन का केवल एक चैप्टर मात्र है, न कि मेरी पूरी जिंदगी.दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं, रुचियों और परिवार को ध्यान में रखकर यह राह चुनी है. भविष्य के प्लान को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि वह लेखन, शिक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे कदम बढ़ा सकती हैं. उन्होंने कहा कि उनकी दो बेटियां और परिवार है, जिनकी जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह अपने पुराने पैशन को आगे बढ़ाना चाहती हैं. हालांकि, अगले कदम को लेकर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है.
दिव्या मित्तल के इस फैसले के बाद उनके पति और पूर्व IAS अधिकारी गगनदीप सिंह ढिल्लों भी चर्चा में आ गए हैं. गगनदीप ने भी साल 2022 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में संयुक्त महानिदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था. दोनों का सफर बेहद दिलचस्प रहा है. IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़े गगनदीप और दिव्या दोनों पहले लंदन में लाखों के पैकेज वाली मल्टीनेशनल कंपनियों में कार्यरत थे. दिव्या जेपी मॉर्गन में और गगन सिटी ग्रुप में. विदेश में मन न लगने पर दोनों भारत लौटे और सिविल सेवा की राह चुनी. दिव्या ने जहां अपने दूसरे प्रयास (2012) में 68वीं रैंक हासिल कर IAS का सफर तय किया, वहीं उनके पति पहले ही प्रयास में सफल रहे थे.
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