अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के एविएशन सेक्टर को लक्षित करते हुए 36 नई पाबंदियों की घोषणा की। इन पाबंदियों में ईरान की 27 एयरलाइंस को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है, साथ ही उन विदेशी कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया गया है जो इन एयरलाइंस को विमान, पार्ट्स या अन्य सेवाएँ प्रदान करती हैं।
अमेरिका का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ईरानी एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली वित्तीय और तकनीकी मदद को रोकना है। तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया और कजाकिस्तान में कार्यरत कुछ कंपनियों को भी इस सूची में शामिल किया गया है, क्योंकि वे ईरान की एयरलाइंस के लिए विमान और सप्लाई का इंतजाम करती थीं।
अमेरिकी अधिकारियों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ईरानी एविएशन नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है, जिससे ईरानी एयरलाइंस को फंड ट्रांसफर, आवश्यक सामान की खरीद और विदेशी सेवाओं तक पहुँचना कठिन हो सके।
Mahan Air पर भी अतिरिक्त दबाव डाला गया है। इस एयरलाइन पर पहले से ही प्रतिबंध हैं, और अमेरिकी आरोप हैं कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को मदद पहुंचाई है। तुर्की और मलेशिया की कुछ कंपनियों को भी इस कारण से कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, कुछ कंपनियों ने Mahan Air को कम से कम तीन Boeing 777 विमान उपलब्ध कराने में मदद की, जो पहले अन्य देशों में उपयोग से हटा दिए गए थे। इन्हें अब ईरानी एयरलाइंस के संचालन के लिए उपलब्ध कराया गया।
नयी पाबंदियाँ सिर्फ ईरानी एयरलाइंस तक सीमित नहीं हैं; उन सभी विदेशी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लग सकता है जो ईरानी एयरलाइंस को विमान, पुर्जे, सामान या टिकट‑सेल्स सेवाएँ प्रदान करती हैं। इससे इन कंपनियों के लिए ईरान के साथ व्यापार जोखिमपूर्ण हो गया है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान को आर्थिक मदद देने वालों को कड़ी सजा मिलेगी और अन्य देशों की कंपनियों को चेतावनी दी कि वे ईरानी एयरलाइंस के साथ काम करने पर वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर हो सकती हैं।
ईरान का एविएशन सेक्टर पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा था; नए नियमों से नई विमान और आवश्यक पुर्जे हासिल करना और भी कठिन हो जाएगा। कुछ मौजूदा छूटें और अनुमति भी रद्द कर दी गई हैं, जिससे अमेरिकी निर्मित विमानों की ईरान में संचालन भी सीमित हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का असर ईरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्शन पर पड़ेगा, विशेषकर दुबई, दोहा और इस्तांबुल जैसे प्रमुख हब पर। इससे ईरानी व्यापार और यात्रियों दोनों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
यह कार्रवाई राष्ट्रपति ट्रम्प के ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसमें तेल के साथ-साथ एविएशन सेक्टर को भी लक्षित किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ईरान से जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगते रहेंगे।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!