राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद त्यागपत्र दे चुके विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय की की एक कथित चिट्ठी गुरुवार को वायरल हुई थी। इसमें चंपत राय ने ट्रस्ट द्वारा लेन-देन की व्यवस्था के अलावा ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था की जानकारी दी थी। हालांकि वायरल हो रही चिट्ठी की सत्यता की पुष्टि ‘लाइव हिन्दुस्तान’ नहीं करता है। इस बीच राम मंदिर निर्माण समिति की मंदिर परिसर में आयोजित बैठक के तीसरे दिन समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर निर्माण के कामों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनना करोड़ों श्रद्धालुओं के सपने का साकार होना है। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण में केंद्र या राज्य सरकार का पैसा नहीं लगा, बल्कि ट्रस्ट द्वारा एकत्रित धन से निर्माण कराया गया है।
समिति के चेयरमैन ने बताया कि तय किए गए निर्माण के करीब 70 कामों में से लगभग 60 काम पूरे हो चुके हैं। विभिन्न एजेंसियों द्वारा पूरे किए गए निर्माण कार्य श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिए गए हैं। इनका रखरखाव अब ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिसर में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या दूर करने के लिए सीवेज और ड्रेनेज व्यवस्था को मुख्य नाले से जोड़ने का काम किया जाएगा। निर्माण चेयरमैन मिश्रा के मुताबिक संग्रहालय, ऑडिटोरियम और ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बताया गया कि संग्रहालय की गैलरी नंबर-सात पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां प्रवेश शुल्क लगाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला ट्रस्ट करेगा।
चंपत राय के कथित पत्र में अपना नाम होने के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि पत्र को हमने नहीं देखा है। विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। राम मंदिर के CEO की नियुक्ति के साक्षात्कार के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि वह इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। राम मंदिर के निर्माण कार्यों की समीक्षा का शुक्रवार को अंतिम दिन है। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव जगदीश आफले, सीबीआरआई के पूर्व चेयरमैन एके मित्तल व यश मित्तल समेत एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
वहीं, राम मंदिर में सफाई से सीवरेज-ड्रेनेज तक की व्यवस्थाओं में करीब एक दर्जन एजेंसियां कार्यरत हैं। इनमें कुछ मल्टीनेशनल हैं तो कुछ छोटी भी हैं। मेसर्स शंकर इलेक्ट्रिकल्स बंगलुरु के कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है। यह कंपनी अपने संसाधनों से कर्मचारियों को वेतन देकर ट्रस्ट से भुगतान लेती रहती है। कुछ कंपनियां सीआर फंड से धन जुटाकर कर्मचारियों का वेतन देती हैं और ट्रस्ट से लेट लतीफ भुगतान प्राप्त करती हैं। फिर भी सबकी अपनी निर्धारित सीमा है।
मिली जानकारी के अनुसार सफाई व्यवस्था में लगी कंपनी बीवीजी के कर्मचारियों को चार माह अप्रैल, मई, जून और जुलाई का वेतन नहीं मिला है। इसी तरह राम मंदिर के बाहर परिसर से लेकर तीर्थ यात्री सेवा केंद्र और अंगद टीला पर सफाई व्यवस्था का जिम्मा यूनी प्वाइंट व जिलाजीत के पास है। इन दोनों एजेंसियों के कर्मचारियों का तीन माह मई, जून, जुलाई का वेतन बकाया है। फिर भी ट्रस्ट से उनका भुगतान लंबित है। इसके कारण कंपनियों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होने लगी है।
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