दिवाली 2026 पर पूरे भारत में दीपों की रोशनी और रंगोली के साथ उत्सव मनाया जा रहा है। शाम होते ही परिवार मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा के लिए तैयार हो जाते हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार दीपावली की रात धन और समृद्धि की कामना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
पंचांग के अनुसार इस वर्ष दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम का समय सबसे अनुकूल माना गया है। कुल 1 घंटा 56 मिनट का शुभ मुहूर्त उपलब्ध है।
शुभ मुहूर्त: शाम 5:53 से 7:49 बजे तक।
पूजा की अवधि: 1 घंटा 56 मिनट।
प्रदोष काल: शाम 5:30 से रात 8:08 बजे तक।
वृषभ काल: शाम 5:53 से 7:49 बजे तक।
निशिता काल: रात 11:38 से 9 नवंबर की रात 12:30 बजे तक।
सिंह लग्न: रात 12:24 से 9 नवंबर की सुबह 2:41 बजे तक।
अमावस्या तिथि शुरू: 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे।
अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे।
शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री जुटा लें: मां लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ, चौकी, लाल या पीला कपड़ा, अक्षत, फूल, माला, चंदन, रोली, सिंदूर, धूप, दीपक, फल, मिठाई, पान, सुपारी और कलश।
पहले पूजा स्थल को साफ-सुथरा करें, चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और उसके ऊपर थोड़े चावल रखें। भगवान गणेश की मूर्ति को मां लक्ष्मी के बाईं ओर और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को सजा दें।
पूजा से पहले शुद्धिकरण करें: अपने ऊपर और आसन के आसपास जल छिड़कें, आम के पत्तों या कुशा का उपयोग कर सकते हैं। शुद्धिकरण मंत्र पढ़ें और हाथ धोकर केशव, माधव और नारायण का स्मरण करें।
पूजा का संकल्प लें: हाथ में फूल, अक्षत, सुपारी, पान, नारियल और सिक्का लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलें। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।
कलश की स्थापना में रोली या सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं, गले में मौली बाँधें और अंदर जल, गंगाजल, सुपारी, अक्षत, दूर्वा तथा एक सिक्का डालें। कलश के मुंह पर आम के पत्ते लगाएँ और ऊपर गेहूं या चावल से भरा ढक्कन रखें। लाल कपड़े में लपेटकर मौली बाँधा हुआ नारियल कलश के ऊपर रखें।
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें: उन्हें फूल, दूर्वा, चंदन, सिंदूर और अक्षत चढ़ाएँ, फिर वस्त्र, आभूषण और मिठाई का भोग लगाएँ। मंत्र जाप करते हुए धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।
इसके बाद मां लक्ष्मी का पूजन करें: कमल का फूल और अन्य सुगंधित पुष्प चढ़ाएँ, लाल चंदन, रोली और सिंदूर लगाएँ। लाल वस्त्र और फूलों की माला पहनाएँ, अक्षत अर्पित करें और अष्टसिद्धियों तथा अष्टलक्ष्मी का ध्यान करें।
मां लक्ष्मी को फल, मिठाई, खीर और अन्य सात्विक पकवान अर्पित करें, फिर पान, सुपारी और फूल चढ़ाएँ। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएँ और 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र जाप करें।
कुबेर देव की पूजा भी करें: दीपक जलाएँ, फूल, अक्षत तथा मिठाई अर्पित करें और परिवार की आर्थिक उन्नति की कामना करें।
पूजा समाप्ति पर सभी देवी-देवताओं की आरती करें, मिठाई का भोग लगाएँ और प्रसाद बाँटें। किसी भी गलती के लिए क्षमा माँगें और परिवार में सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
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