9 सितंबर को निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद राजस्थान में 305 नगर निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। आज 273 नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा, जबकि 32 निकायों में यह पद पहले ही निर्विरोध चुना जा चुका है। जोधपुर, जयपुर और कोटा के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान की वजह से अध्यक्ष चुनाव 25 सितंबर को निर्धारित है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस बार अपनी पूरी ताकत लगाई है। भाजपा सत्ता का इस्तेमाल कर रही है, जबकि कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगा रही है। उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए मतदान होगा, साथ ही 41 नगर परिषदों में सभापति और 262 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष चुने जाएंगे।
पार्षदों की बाड़ेबंदी के दौरान कई बार निर्दलीयों को अपने पक्ष में लाने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाए गए। राज्य निर्वाचन विभाग के अनुसार, 32 निकायों में अध्यक्ष पद भाजपा ने जीत लिया है, दो निकायों में कांग्रेस और दो में भाजपा‑समर्थित निर्दलीय निर्विरोध चुने गए हैं। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा की महिला मेयर भी निर्विरोध चुनी गई हैं।
तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव से पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हरियाणा के पंचकूला में पुलिस ने 18 लौटते पार्षदों को रोककर डिटेन कर लिया। इस कदम के विरोध में कांग्रेस के नेताओं और पार्षदों ने धरना दिया और चुनाव रद्द करने की मांग की। इस दौरान तिजारा के बाजार का बंद होना भी रिपोर्ट किया गया, जबकि प्रशासन की आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
निचले स्तर पर चुनावी समय‑सारणी भी जारी है। उप‑अध्यक्ष पद के लिए मतदान 22 सितंबर को होगा, जिसमें नामांकन सुबह 11 बजे तक और अभ्यर्थी वापसी दोपहर 2 बजे तक होगी। मतदान दोपहर 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक और तत्पश्चात तुरंत मतगणना शुरू होगी।
अजमेर नगर निगम में आज मेयर पद के लिए मतदान हुआ, जहाँ कांग्रेस और भाजपा दोनों के पार्षद अलग‑अलग शहरों से आए। 11 निर्दलीय पार्षदों के वोटों से अंतिम परिणाम तय होगा। मतदान नई नगर निगम बिल्डिंग में हुआ और मतगणना तुरंत हुई।
बीकानेर में भी मेयर पद के लिए मतदान निर्धारित है। भाजपा के कई पार्षद जोधपुर से बीकानेर के लिए रवाना हुए, इसका वीडियो भी वायरल हुआ। दोनों पार्टियों की नजरें अब मेयर कुर्सी पर टिकी हैं, और मतदान के बाद परिणाम स्पष्ट होगा।
राजस्थान हाईकोर्ट ने बीकानेर और हनुमानगढ़ में निर्वाचित पार्षदों की गिरफ्तारी पर रात 12 बजे विशेष सुनवाई कर रोक लगा दी। इससे पहले नागौर और श्री गंगानगर में भी हाईकोर्ट ने समान आदेश दिया था। बीकानेर के वार्ड‑18 के नव‑निर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद की याचिका पर जस्टिस सुनील बेनीवाल ने दो‑महीने पुरानी FIR से जुड़ी गिरफ्तारी पर रोक लगाई।
मकसूद अहमद को 15 सितंबर को कोटगेट थाने से गवाह के रूप में नोटिस मिला था, जिससे गिरफ्तारी की आशंका पैदा हुई। इस कारण वह हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कराए, जिसके बाद तत्काल राहत दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन आचार्य और कौशल गौतम ने इस प्रक्रिया में पैरवी की।
राजस्थान में निकाय चुनाव से जुड़े ताज़ा अपडेट के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें।
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