बाब‑अल‑मंदेब खाड़ी लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ती है और यूरोप‑एशिया‑अफ्रीका के बीच तेल व माल के जहाजों का मुख्य मार्ग है। विश्व के लगभग 10 % समुद्री व्यापार और बड़ी मात्रा में तेल इसी संकरी जलमार्ग से गुजरता है।
खाड़ी का सबसे संकरी भाग दुबाब और पेरिम द्वीप के पास स्थित है, जहाँ से जहाज़ों को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। इस कारण कोई भी सैन्य‑सुरक्षा गतिविधि सीधे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
सितंबर 2025 के मध्य में सैटेलाइट चित्रों ने दिखाया कि यमन के हूती विद्रोही समूह ने बाब‑अल‑मंदेब के आसपास पहाड़ी इलाकों में लगभग 20 किमी लंबी खाइयाँ (ट्रेंच) और मिट्टी की किलेबंदी (खंगर) तैयार की हैं। ये संरचनाएँ दुबाब‑पेरिम द्वीप के निकट ऊँची जमीन पर बनी हैं और 8‑16 सितंबर के बीच सेंटिनल‑2 उपग्रह ने इन्हें स्पष्ट रूप से कैप्चर किया।
हूती ने कुछ दिन पहले मुराद तट पर एक बयान में कहा था कि वे खाड़ी के पास “मजबूत रक्षा व्यवस्था” तैयार करेंगे। केवल छह दिन बाद ही इन खाइयों की उपस्थिति सैटेलाइट पर दिखाई देने लगी, जिससे पता चलता है कि समूह संभावित हमले के लिए तेज़ी से तैयारी कर रहा है।
इन खाइयों के दो प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, सऊदी‑समर्थित यमन सरकार की सेनाओं के खिलाफ रक्षात्मक दीवार बनाना। हाल ही में हूती ने लाल सागर के कुछ तटों पर कब्जा कर लिया था और अब वे इन ऊँची जगहों से संभावित सऊदी‑समर्थित आक्रमण को रोकना चाहते हैं। दूसरा, समुद्री मार्गों की लगातार निगरानी करना। ऊँची जमीन से बाब‑अल‑मंदेब का संकरी भाग स्पष्ट दिखता है, जिससे हूती किसी भी संदिग्ध जहाज़ी गतिविधि पर नज़र रख सकते हैं।
ऊँची जमीन पर बनी खाइयाँ एंटी‑टैंक मिसाइलों के उपयोग के लिए आदर्श हैं। ऊँचे बिंदु से नीचे की ओर फायर करना आसान होता है, जिससे टैंक और बख्तरबंद वाहन को रोकना संभव हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी किलेबंदी रक्षात्मक युद्ध में टिकाऊ लाभ देती है, लेकिन बड़े पैमाने के हवाई या नौसैनिक हमलों के सामने इसकी सीमाएँ स्पष्ट हैं।
बाब‑अल‑मंदेब पर नियंत्रण का मतलब वैश्विक व्यापार मार्ग पर प्रभाव डालना भी है। इस क्षेत्र में हालिया जहाज़ी हमलों ने बीमा लागत बढ़ा दी है और कुछ कंपनियों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाना शुरू कर दिया है। नई किलेबंदी से यह चिंता और बढ़ सकती है कि तनाव लंबे समय तक बना रहेगा।
यदि हूती इन पदों से जहाज़ों की आवाज़ाही पर दबाव बनाए रखते हैं, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला में देरी हो सकती है। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले से ही इस खाड़ी की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। सऊदी‑समर्थित बलों की कोई जवाबी कार्रवाई संघर्ष को और व्यापक बना सकती है, जबकि हूती इसे अपनी रक्षात्मक जरूरत के रूप में पेश कर सकते हैं।
सारांश में, 20 किमी लंबी खाइयाँ सिर्फ मिट्टी का काम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश हैं। ऊँची जमीन, खाइयाँ और संभावित एंटी‑टैंक क्षमताओं का संयोजन हूती को बाब‑अल‑मंदेब के आसपास एक मजबूत रक्षा रेखा प्रदान करता है। आने वाले हफ्तों में सैटेलाइट तस्वीरें और जमीनी रिपोर्टें यह तय करेंगी कि यह तैयारी कितनी प्रभावी साबित होती है, लेकिन फिलहाल यह घटना यमन के संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है।
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