अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के आरोप में पुलिस ने 23 सितंबर 2026 को विशेष एंटी‑करप्शन कोर्ट में 74‑पृष्ठ चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला (उर्फ शनि), करुणेश पाण्डेय, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव (उर्फ टिन्नू) और सुभाष श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है।
जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों, संपत्ति और वाहनों की बरामदगी तथा गवाहों के बयान को प्रमुख सबूत माना गया। पुलिस का दावा है कि चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी बैंक तक पहुँचने से पहले गणना कक्ष में ही हुई। सीसीटीवी के अनुसार रकम हटाने या छिपाने की 105 घटनाएँ सामने आईं।
चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि 4 जून 2026 को गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद हुए। वीडियो में ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को भेजे जाने के बाद उन्हें वीडियो और संदेश मिलते हुए दिखाया गया है।
मोबाइल चैट और CDR से भी आरोपियों के बीच कैश के बंडलों को रखने, छिपाने, बदलने और स्थानांतरित करने की बातचीत मिली। अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला और लवकुश मिश्रा के बीच ऐसे संदेशों के रिकवरी हुए।
जांच के दौरान 79.85 लाख रुपये नकद, चांदी, सोने के आभूषण और अमेरिकी डॉलर बरामद हुए। अनुकल्प मिश्रा के नाम पर 16.82 लाख रुपये, करुणेश पाण्डेय से 18.07 लाख रुपये, मनीष कुमार यादव से 2 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख रुपये, रमाशंकर मिश्रा से 7.32 लाख रुपये तथा अविनाश शुक्ला से 20.39 लाख रुपये बरामद हुए।
चार्जशीट में आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई जमीन, मकान, कार, मोटरसाइकिल, आभूषण और अन्य संपत्तियों का भी विस्तृत विवरण है। उदाहरण के तौर पर, अनुकल्प मिश्रा के पिता के नाम पर 55 लाख रुपये का मकान, डिजायर कार और धार्मिक आयोजनों में लाखों रुपये खर्च किए गए। लवकुश मिश्रा की पत्नी के नाम पर 22.52 लाख रुपये की जमीन और 20.91 लाख रुपये का मकान निर्माण हुआ।
गणना कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव पर भी लापरवाही का आरोप है। पुलिस का कहना है कि SOP के बावजूद गणना कर्मियों की चेकिंग और फ्रिस्किंग नहीं कराई गई और कुछ कर्मचारियों को रकम हटाने की अनुमति मिली।
रामशंकर यादव (उर्फ टिन्नू) की भूमिका भी दर्ज है। 2020 से ट्रस्ट से जुड़ा यह व्यक्ति दान व चढ़ावे की रकम बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में शामिल था, पर बाद में आरोपियों के साथ मिलकर कथित आपराधिक षड्यंत्र में भूमिका निभाई।
चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि 2025 में अनुकल्प मिश्रा के माध्यम से लवकुश मिश्रा, करुणेश पाण्डेय और अविनाश शुक्ला को गणना कर्मियों के रूप में नियुक्त किया गया। इन लोगों के साथ पूर्व से कार्यरत रमाशंकर मिश्रा और रामशंकर यादव तथा सुभाष श्रीवास्तव के सहयोग से चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग की बात स्पष्ट की गई है।
इस पूरी जांच में ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल जी के बयान गवाह के रूप में दर्ज किए गए, जबकि उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया।
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