पटना में स्थिर हुई गंगा ने अब हाथीदह (मोकामा) से भागलपुर तक अपना रौद्र रूप दिखाया है। गंगा ने सोमवार को कहलगांव में 23 साल का रिकॉर्ड तोड़ा तो सुल्तानगंज में अबतक के उच्चतम स्तर को पार कर गई। एनएच-80 पर भवनाथपुर में करीब ढाई फीट पानी बहने के कारण प्रशासन ने भागलपुर-सुल्तानगंज के बीच वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है।पटना में गांधीघाट पर गंगा के जल स्तर का 10 साल का रिकार्ड टूट गया है। राज्य में 13 जिलों की 29 लाख से अधिक की आबादी संकट में है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार को गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 10 साल पहले के उच्चतम जलस्तर (एचएफएल) से 0.05 मीटर अधिक है। कहलगांव में गंगा का उच्चतम जलस्तर 2003 में 32.87 मीटर था, जो सोमवार को 35.69 मीटर जा पहुंचा। गंडक डुमरियाघाट और हाजीपुर, कोसी बलतारा और कुरसेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, गंगा नदी दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर, पुनपुन नदी श्रीपालपुर, बागमती नदी बेनीबाद, घाघरा नदी दरौली व गंगपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। भागलपुर के शहरी इलाकों में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। तिलकामांझी विश्वविद्यालय परिसर में नावें चलने लगी हैं। कार्यालय कक्ष में पानी घुस गया है। उधर, पुनपुन ने पटना जिले में आफत मचा रखी है। तेज धार से सोमवार को बड़हियाकोल में 10 फीट बांध टूट गया, जबकि नौबतपुर के छह गांवों में तटबंधों के ऊपर से पानी बह रहा है। सारण जिले के दरियापुर प्रखंड के मुजौना के पास मही नदी के बांध टूटने से 15 गांव जलमग्न हो गए हैं। एनएच-80 पर हाथीदह और नाथनगर के समीप भी पानी चढ़ गया है। साहिबगंज-भागलपुर-जमालपुर रेलखंड पर गंगा के पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार राज्य के 13 जिले पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल के 77 प्रखंडों की 438 पंचायतों की 29.13 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। राज्य सरकार की ओर से 238 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। 5.12 लाख लोगों को भोजन कराया गया है। 12 राहत शिविर और 7368 बाढ़ शरणार्थियों के लिए रहने व खाने-पीने के इंतजाम किए गए हैं। 1740 नावों का परिचालन किया जा रहा है।
साहिबगंज-भागलपुर-जमालपुर रेलखंड पर गंगा के पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है। पानी रेल पुलों के गर्डर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, अभी रेलवे वेट एंड वॉच की स्थिति में है और पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। ट्रेन सेवा कॉशन के साथ जारी है। मुख्य रूप से सुल्तानगंज-जमालपुर के बीच बरियारपुर में लोहा पुल के पास स्थिति ज्यादा खराब है। यहां बाढ़ का पानी गर्डर से लगातार करीब होता जा रहा है। इस सेक्शन के पीडब्ल्यूआई इंजीनियर के अनुसार रफ्तार धीमी हुई है लेकिन पानी बढ़ ही रहा है। अगर गर्डर को पानी छू गया तो वरीय अधिकारी ट्रेन सेवा को रोकने का आदेश दे सकते हैं।
इधर, पूर्व रेलवे के सेफ्टी अधिकारियों ने एक दिन पहले भी सुल्तानगंज और कल्याणपुर के बीच ब्रिज संख्या 181, 182, 184 व बरियारपुर और रतनपुर के बीच ब्रिज संख्या 195 का रविवार को जायजा लिया था। सुल्तानगंज, कल्याणपुर, बरियारपुर, सबौर, लैलख, घोघा, एकचारी और कहलगांव के पास अभी जलस्तर अधिक रहने की वजह से पूर्व रेलवे ने अलर्ट जारी किया है। इन जगहों में कॉशन लगाया गया है। इन जगहों पर अधिकतम 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाने का निर्देश दिया गया है।
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