दिल्ली सरकार ने 1 नवम्बर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक पर्सनल और कमर्शियल व्हीकल्स पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है ताकि वायु प्रदूषण नियंत्रित किया जा सके।
इस कदम पर ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMGTA) ने सरकार से पहले 15 दिन का पायलट प्रोजेक्ट चलाने की माँग की है, ताकि प्रतिबंध के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।
AIMGTA के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री सरदार मंजिंदर सिंह सिरसा को पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने पाबंदी को लंबी अवधि तक लागू करने से पहले उसके वास्तविक प्रभाव का मापन करने का अनुरोध किया।
संघ ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण अत्यावश्यक है, पर बड़े निर्णय लेने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि वायु गुणवत्ता में कितना वास्तविक सुधार होगा।
इसलिए 1 नवम्बर से 15 दिनों तक प्रस्तावित प्रतिबंधों का परीक्षण करके वायु गुणवत्ता के आंकड़ों का अध्ययन किया जाए और परिणाम सार्वजनिक करके आगे का निर्णय लिया जाए।
राजेन्द्र कपूर ने चेतावनी दी कि दिल्ली की जरूरी वस्तुओं और उद्योगों के लिए कच्चे माल की सप्लाई मुख्यतः दूसरे राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों पर निर्भर है। 20‑25 टन तक के भारी ट्रकों पर प्रतिबंध से माल को छोटे वाहनों में स्थानांतरित करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय बढ़ेगा।
इस बदलाव से दिल्ली की सीमाओं और आसपास की सड़कों पर जाम की समस्या बढ़ सकती है और फल‑सब्जी तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होकर उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
संघ ने उद्योग, रोजगार और राजस्व पर भी असर की चिंता जताई। परिवहन लागत बढ़ने और कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से दिल्ली के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता घटेगी, जिससे उत्पादन, व्यापारिक गतिविधियाँ और रोजगार पर असर पड़ेगा। साथ ही डीजल बिक्री और GST राजस्व में कमी का भी आकलन माँगा गया।
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान PM2.5 और PM10 सहित प्रमुख वायु गुणवत्ता संकेतकों की निगरानी, मौसम, हवा की दिशा और क्षेत्रीय प्रदूषण को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। यदि प्रतिबंधों से प्रदूषण में उल्लेखनीय सुधार होता है, तो आर्थिक और परिचालन प्रभावों की समीक्षा के बाद इन्हें जारी रखने पर विचार किया जा सकता है।
परंतु यदि अपेक्षित सुधार नहीं होता, तो सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरा जलाने जैसे अन्य प्रदूषण स्रोतों पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राजेन्द्र कपूर ने कहा कि दिल्ली को स्वच्छ हवा के साथ-साथ जरूरी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, उद्योगों की निरंतरता और रोजगार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। संघ ने सरकार से आग्रह किया कि प्रतिबंधों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी हितधारकों के हितों और उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों पर विचार किया जाए।
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