पटना उच्च न्यायालय ने तख्त श्री हरिमंदिर जी, पटना साहिब प्रबंधक कमेटी के वर्ष 2023 से लंबित चुनाव को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजीव राय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रबंधक कमेटी को 24 नवंबर 2026 तक हर हाल में अंतिम मतदाता सूची बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकरण को सौंपने का कड़ा निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि निर्धारित समयसीमा का अनुपालन नहीं होने पर वर्तमान प्रबंधक कमेटी स्वतः ही काम करना बंद कर देगी। ऐसी स्थिति में पटना के जिला जज स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे।
अदालत ने महेंद्र पाल सिंह धिल्लों बनाम इंद्रजीत सिंह जी मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने के लिए एक पारदर्शी समय-सारणी निर्धारित की है। उच्च न्यायालय के इस कड़े निर्देश के बाद अब प्रबंधक कमेटी के सामने तय समय के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
समयसीमा और निर्वाचन प्रक्रिया का निर्धारण उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक, प्रबंधक कमेटी को 20 नवंबर तक मतदाता सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद 21 नवंबर से 24 नवंबर के बीच यह सूची बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकरण को सौंपना अनिवार्य होगा। इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकरण की ओर से भी अदालत में अपना पक्ष रखा गया।
निर्वाचन प्राधिकरण ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि प्रबंधक कमेटी से मतदाता सूची प्राप्त होने के 90 से 120 दिनों के भीतर पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। अदालत ने निर्वाचन प्राधिकरण के इस आश्वासन को अपने रिकॉर्ड पर लेते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी ढंग से और तय समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया है।
आपत्तियों का निस्तारण और समयबद्ध प्रक्रिया मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियों के समयबद्ध निपटारे के लिए भी अदालत ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सुनवाई के दौरान प्रबंधक कमेटी के अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि 4 नवंबर तक मतदाता सूची की प्रति संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी जाएगी।इसके बाद संबंधित पक्ष 6 नवंबर तक मतदाता सूची के संबंध में अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। अदालत ने सख्त हिदायत दी है कि प्राप्त आपत्तियों पर प्रबंधक कमेटी को एक सप्ताह के भीतर विधिवत आदेश पारित करना होगा अथवा आपत्तिकर्ता को निर्णय की लिखित सूचना देनी होगी। इस व्यवस्था से मतदाता सूची से जुड़ी आपत्तियों का समय पर निस्तारण संभव हो सकेगा। ये भी पढ़ें- बिहार: सीएम सम्राट पर तेजस्वी की टिप्पणी से गरमाई सियासत, मंत्री संतोष सुमन ने याद दिलाया राजद का कार्यकाल
अदालत की सख्त चेतावनी और अगली सुनवाई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान प्रबंधक कमेटी का कार्यकाल वर्ष 2023 में ही समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद पुरानी कमेटी लगातार कामकाज का संचालन कर रही है। अदालत ने ध्यान दिलाया कि पूर्व में भी चुनाव कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय समयसीमा का अनुपालन नहीं होता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को भी चुनाव में अनावश्यक बाधा नहीं डालने की नसीहत दी है।
अदालत ने सभी पक्षों को 2 नवंबर के आदेश के अनुपालन का शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख एक दिसंबर तय की है।
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