अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने आज भारत‑अमेरिका संबंधों पर विस्तृत बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से पूछा जाए कि 35 प्रमुख विश्व नेताओं में से वह किससे मिलना चाहेंगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम उनकी लिस्ट में सबसे ऊपर होगा.
गोर ने बताया कि पिछले पाँच सालों में दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है. व्यापार, टेक्नोलॉजी, फ़ार्मा, स्पेस, डिफेंस और सैन्य अभ्यास जैसे सभी क्षेत्रों में साझेदारी गहरी हो रही है.
दिल्ली में आयोजित क्वाड शेरपा बैठक को उन्होंने "बहुत महत्वपूर्ण" कहा. अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों के लिए एक साथ बैठना आवश्यक था, और इस बैठक में क्वाड के अगले लक्ष्य और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई.
गोर के अनुसार, क्वाड का अगला मंत्रीस्तरीय मीटिंग अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में होगी, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी भाग लेंगे. इस साल के अंत में क्वाड शिखर सम्मेलन भी आयोजित हो सकता है, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है.
क्वाड मानवीय सहायता, आपदा राहत, संयुक्त प्रशिक्षण और चारों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है. नई और उभरती तकनीकें जैसे AI, डेटा सेंटर और रणनीतिक खनिज भी एजेंडा में शामिल हैं.
गोर ने कहा कि भारत को उच्चस्तरीय बैठकों की आदत डालनी चाहिए. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस अक्टूबर में फिर से भारत आएंगे, और इस तरह की बार‑बार यात्राएँ अब सामान्य बननी चाहिए.
आगामी समय में केवल विदेश मंत्री ही नहीं, बल्कि कई अन्य अमेरिकी कैबिनेट अधिकारियों और तीन अमेरिकी राज्य गवर्नरों की भारत यात्रा की संभावना है, जिससे व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा.
भारत की आर्थिक स्थिरता को लेकर गोर ने कहा, "आपके प्रधानमंत्री भारत में ऐसी स्थिरता लाते हैं, जो दुनिया के कई हिस्सों में नहीं दिखती". उन्होंने मोदी के लंबे कार्यकाल को लोकतांत्रिक स्थिरता की बड़ी उपलब्धि बताया.
वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 240 अरब डॉलर है, और इसे अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
रक्षा सहयोग के बारे में गोर ने कहा कि भारत पर अमेरिका का भरोसा "अविश्वसनीय" है. भारत को वह देशों में गिना जाता है, जिनके साथ अमेरिका अपनी उन्नत तकनीक साझा करता है. जेवलिन मिसाइल का सह‑निर्माण, अपाचे हेलीकॉप्टर की आपूर्ति और कई अन्य रक्षा परियोजनाएँ इस भरोसे का प्रमाण हैं.
भारत और अमेरिका के बीच नियमित सैन्य अभ्यास होते हैं, और राजस्थान में होने वाला बड़ा अभ्यास दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और गहरा करेगा.
गोर ने यह भी बताया कि भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है. हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद कुछ हिस्सों को फिर से तैयार करना पड़ा, लेकिन दोनों पक्षों को भरोसा है कि समझौता जल्द ही अंतिम रूप लेगा.
जैसा कि उन्होंने कहा, "जब आंकड़े देखते हैं तो दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा खरीद और सैन्य अभ्यास लगातार बढ़ रहे हैं". इस तेज़ी से विकसित हो रहे संबंध को अन्य देशों में ईर्ष्या भी हो सकती है, क्योंकि दोनों नेताओं की तेज़ निर्णय‑लेने की शैली इस गति को बनाए रखती है.
अंत में, गोर ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प को भारत की यात्रा की बहुत अच्छी यादें हैं और वह अगले साल फिर से भारत आने की संभावना को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.
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