धनतेरस और दिवाली के पावन पर्व से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई हालिया नरमी ने भारतीय सर्राफा और आभूषण बाजार में नई जान फूंक दी है। 6 नवंबर को पड़ने वाले धनतेरस के दिन महीने की शुरुआत होने के कारण ग्राहकों के हाथ में सैलरी मौजूद रहेगी, जिससे खरीदारी का रुझान मजबूत होने का अनुमान है। हालांकि, पिछले छह महीनों के उच्च स्तर से भाव में आई गिरावट के बावजूद कुल बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) पिछले साल के स्तर पर ही स्थिर रहने की संभावना है, लेकिन बेस प्राइस अधिक रहने की वजह से मूल्य (वैल्यू) के संदर्भ में ज्वेलरी कारोबार में 20 से 30 प्रतिशत तक की मजबूत बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
पिछले कुछ महीनों के दौरान सोने की कीमतों में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि 29 मई को सोना ₹1,62,900 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो 31 अक्टूबर तक 12.8 प्रतिशत (₹20,900) टूटकर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। वहीं, बीते बुधवार को घरेलू बाजार में रिकवरी देखी गई और सोना पिछले सत्र के बंद स्तर से ₹4,800 उछलकर ₹1,46,600 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले साल इसी अवधि के दौरान सोने के भाव लगभग ₹1.10 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास थे।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) भारत के क्षेत्रीय सीईओ सचिन जैन के अनुसार, कीमतों में आई इस बड़ी नरमी ने आभूषणों की मांग को दोबारा गति दी है। अगले 3 से 6 महीनों में शादी की योजना बना रहे परिवार इस आकर्षक मूल्य स्तर का लाभ उठाकर अग्रिम खरीदारी कर रहे हैं, जिससे प्रीमियम ज्वेलरी से लेकर निवेश के उद्देश्य वाले सोने के सिक्कों और बार्स तक की मांग में तेजी है। .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;}
जीजेसी के अध्यक्ष राजेश रोकड़े के अनुसार, भले ही बिक्री की कुल मात्रा पिछले साल के बराबर रहे, लेकिन वैल्यू के आधार पर कारोबार में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि होगी। वहीं, जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता का मानना है कि पिछले छह महीनों में कीमतों में तेजी और प्रधानमंत्री की सोने की खरीद से परहेज करने की अपील के कारण बाजार में सुस्ती थी, लेकिन अब वैल्यू में 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
उद्योग जगत के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, उच्च मुद्रास्फीति और महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति जैसे कारक उपभोक्ता भावना को आंशिक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, राजेश रोकड़े का कहना है कि भारत में सोने-चांदी की खरीदारी मुख्य रूप से व्यक्तिगत बचत से की जाती है, इसलिए महंगाई का असर इस त्योहारी खरीदारी पर काफी सीमित रहने की संभावना है। इसके अलावा खुदरा विक्रेताओं ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न छूट और आकर्षक योजनाओं की पेशकश भी शुरू कर दी है।
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