उत्तर प्रदेश में गुरुवार रात के बाद से लगातार 72 घंटे तक भारी बारिश चल रही है, जिसके कारण 58 लोगों की मौत हो गई और 13 जिलों में रेड अलर्ट जारी है।
बारिश का सिलसिला गुरुवार रात के बाद शुरू हुआ और शनिवार शाम तक भी नहीं रुका। इतनी तेज बारिश ने कई कच्चे मकानों को ढहा दिया, पेड़ और बिजली के पोल गिर कर रास्ते अवरुद्ध कर दिए। बिजली की लाइनें टूटने से विद्युत आपूर्ति में भी बाधा आई।
इस लगातार बारिश के कारण प्रदेश भर में 58 लोगों की जान चली गई। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी 13 जिलों में भारी बारिश के संकेत हैं।
मुरादाबाद, रामपुर, पीलीभीत और बरेली में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी है, जबकि तराई के नौ अन्य जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
लखीमपुर खीरी में सर्वाधिक 342 मिमी बारिश हुई, सीतापुर में 273.2 मिमी, बांदा में 245.6 मिमी और बहराइच में 239 मिमी दर्ज किए गए। बांदा और हमीरपुर में एक दिन की बारिश का अब तक का रिकॉर्ड टूट गया – हमीरपुर में 210 मिमी और बांदा में 245.6 मिमी। कानपुर में 45‑साल का रिकॉर्ड 175.4 मिमी से टूट गया।
बारिश के कारण हुए हादसों में सबसे ज्यादा 26 मौतें अवध के जिलों में हुईं। सीतापुर में 6, बहराइच में 5, बलरामपुर और अयोध्या में 4‑4, बाराबंकी में 3, गोंडा में 2, अमेठी व श्रावस्ती में 1‑1। मैनपुरी में 2 और एटा में 1 की जान गई। लखीमपुर खीरी में 6, गोरखपुर में 5, हरदोई में 4, हमीरपुर में 3 और महोबा, बांदा, जौनपुर, संतकबीरनगर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ में 1‑1। कानपुर में 2, फर्रुखाबाद में 1 और फतेहपुर में 1 मौत हुई।
बारिश से चारबाग रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में जलभराव हो गया। यात्रियों को पानी के बीच से प्लेटफॉर्म तक जाना पड़ा, जिससे लखनऊ मंडल के कई रेलखंडों पर ट्रेनों की गति घट गई।
भारी बारिश और कम दृश्यता के कारण शुक्रवार रात लखनऊ एयरपोर्ट आने वाली छह उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा। इनमें गोवा से 6ई‑6811, बंगलूरू से 6ई‑903 व आईएक्स‑1541, हैदराबाद से 6ई‑6167, दिल्ली से 6ई‑6479 और इंदौर से 6ई‑7422 शामिल हैं। इंदौर की फ्लाइट को नोएडा डायवर्ट किया गया, जबकि अन्य को दिल्ली। शनिवार सुबह सभी विमान लखनऊ लौट आए।
पिछले दो दिनों से जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम से जनजीवन प्रभावित हो गया है। राहत एवं बचाव व्यवस्था के अधिकारियों को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है और प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है।
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शनिवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नेपाल में हो रही भारी बारिश के मद्देनजर सीमावर्ती जिलों, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है। संबंधित जिलाधिकारियों को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मौसम सामान्य होने में 24 घंटे से अधिक समय लगने की संभावना है। किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।
राहत आयुक्त ने बताया कि प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई। फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना, कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य वर्षा हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में वर्षा नहीं हुई।
पिछले 48 घंटों में अतिवृष्टि और आंधी‑तूफान के कारण प्रदेश में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। सरकार ने भारी बारिश से हुई क्षति का तत्काल सर्वेक्षण एवं आकलन कराने और प्रभावित लोगों को नियमानुसार राहत सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है। आवश्यकता के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं ली जाएं। लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों के माध्यम से कच्चे मकानों के आस‑पास जलभराव की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेने के निर्देश दिए गए हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था के साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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