डोनाल्ड ट्रंप के लिए 2026 का मिडटर्म चुनाव एक बड़ा झटका साबित हुआ। रिपब्लिकन पार्टी पर निर्भर रहते हुए ट्रंप ने अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने की कोशिश की, पर इस बार मतदाताओं ने उसे बड़े पैमाने पर पीछे धकेल दिया। डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों—सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स—में बहुमत हासिल कर लिया, जिससे अमेरिकी राजनीति का समीकरण बदल गया और ट्रंप के शेष कार्यकाल पर दबाव बढ़ गया।
इस हार के पीछे सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है ईरान के साथ बढ़ता संघर्ष। अमेरिकी मतदाता इस सैन्य कार्रवाई और उसके लंबे खिंचाव से काफी नाराज हैं। ट्रंप प्रशासन से उम्मीद थी कि वह विदेश नीति में स्थिरता लाएगा, पर ईरान के साथ टकराव ने राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डाला।
मासाचुसेट्स विश्वविद्यालय एमहर्स्ट के अगस्त 2026 के सर्वेक्षण में 68 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के ईरान युद्ध को संभालने के तरीके से असहमति जताई, जबकि 54 प्रतिशत ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया।
युद्ध का असर सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा। ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, जिससे पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं और आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव पड़ा। डेमोक्रेट्स ने इस मुद्दे को चुनाव प्रचार में उठाते हुए ट्रंप प्रशासन पर सवाल खड़े किए, जिससे रिपब्लिकन पार्टी पर राजनीतिक बोझ बढ़ा।
ईरान संघर्ष से तेल और गैस की कीमतों पर भी असर पड़ा। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें हमेशा से चुनावी मुद्दे रही हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो रोज़ाना कार से काम पर जाते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाईं, जिससे अमेरिकी बाजार में भी कीमतें बढ़ीं।
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 4.27 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी, जो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के स्तर से अधिक थी। इसने उनके आर्थिक वादों पर सवाल उठने लगे।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने महंगाई कम करने और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने का वादा किया था। 2026 तक महंगाई और जीवनयापन की लागत मतदाताओं की बड़ी चिंता बनी रही। पेट्रोल के अलावा किराने का सामान, बिजली, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च भी परिवारों पर दबाव डाल रहे थे।
सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मतदाता जीवनयापन की लागत को अपने वोट के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं, और दो-तिहाई ने उच्च कीमतों के लिए ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया।
आव्रजन नीति भी चुनाव में एक प्रमुख विवाद का विषय रही। ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद बड़े पैमाने पर निर्वासन और सख्त इमिग्रेशन नियमों पर जोर दिया। लेकिन इस नीति पर मतभेद बढ़े। 22 अप्रैल 2026 के सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने कहा कि ट्रंप की निर्वासन नीति का समर्थन करने वाले उम्मीदवार को वोट देने की उनकी संभावना कम होगी।
इसका मतलब यह नहीं कि मतदाता सीमा सुरक्षा के खिलाफ थे, बल्कि निर्वासन की प्रक्रिया, उसके मानवीय प्रभाव और सरकार के सख्त रवैये पर सवाल उठे। रिपब्लिकन पार्टी को स्वतंत्र और मध्यमार्गी मतदाताओं का समर्थन पाने में कठिनाई हुई।
चुनाव में केवल नाराजगी ही नहीं, बल्कि सक्रियता भी महत्वपूर्ण है। 2026 के मिडटर्म में डेमोक्रेट्स की चुनावी सक्रियता और ट्रंप विरोधी मतदाताओं का उत्साह उन्हें लाभ पहुंचाया।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थक रिपब्लिकन समर्थकों से 14 प्रतिशत अधिक गंभीरता से चुनाव के बारे में सोचते थे, और 17 प्रतिशत अधिक उत्साहित होकर वोट देने की इच्छा जताते थे। एग्जिट पोल में भी ट्रंप का समर्थन कम महत्वपूर्ण हो गया, जबकि डेमोक्रेट्स में ट्रंप के विरोध में मतदान करने की प्रेरणा मजबूत रही।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!